रिजर्व बैंक गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव ने संकेत दिया है कि आगे ब्याज दरों में कटौती हो सकती है। मौद्रिक की अगली मध्य-तिमाही समीक्षा गुरुवार 15 मार्च को होनी है और शायद यह कटौती उसी दिन से शुरू हो जाए। तब तक संभवतः नए वित्त वर्ष 2012-13 का आम बजट भी आ चुका होगा। डॉ. सुब्बाराव ने मंगलवार को मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही की समीक्षा पेश करने के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सीआरआर मेंऔरऔर भी

ज्यादातर रोल्स कल से होना शुरू हो गए हैं। यूं तो रोलओवर का सच बाजार के और बढ़ने की इजाजत नहीं देता। लेकिन बाजार बढ़ा जा रहा है। तमाम कंपनियों के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। बहुत से स्टॉक्स दिसंबर तिमाही के खराब नतीजों के बावजूद नहीं गिर रहे हैं। इसका मतलब यही हुआ कि बाजार खुद को जमा रहा है। यह लंबे समय के लिए बड़ा शुभ लक्षण है। रिजर्व बैंक ने उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरोंऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने मौद्रिक की तीसरी त्रैमासिक समीक्षा में ब्याज दरों को जस का तस रखा है, लेकिन नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को आधा फीसदी घटाकर 6 से 5.5 फीसदी कर दिया है। दूसरे शब्दों में बैंकों को अब अपनी कुल जमा का 6 फीसदी नहीं, बल्कि 5.5 फीसदी हिस्सा ही रिजर्व बैंक के पास रखना होगा। यह फैसला 28 जनवरी 2012 से शुरू हो रहे पखवाड़े से लागू हो जाएगा। ध्यान दें कि सीआरआर में आधाऔरऔर भी

मुद्रास्फीति को लेकर रिजर्व बैंक कुछ हद तक निश्चिंत हो गया है। लेकिन इतना नहीं कि मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही में ब्याज दरों में कटौती कर दे। मंगलवार को सुबह 11 बजे रिजर्व बैंक नए मौद्रिक उपायों की घोषणा करने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक मुद्रा बाजार में इस समय जिस तरह तरलता की किल्लत चल रही है, उसमें पूरे आसार इस बात के हैं कि वह नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में आधा फीसदी कटौतीऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने पिछले साल अगस्‍त में भारतीय उद्योपतियों के साथ बैठक में मांगे गए सुझावों को आगे बढ़ाने की कोशिश की। लेकिन अगर, कुछ मोर्चों, खासतौर से मल्‍टी ब्रांड में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) जैसे मामलों में आर्थिक सुधारों और कुछ विधायी संशोधनों को पारित नहीं कराया जा सका तो इसके लिए सरकार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। वित्त मंत्री ने बुधवार को प्रमुख उद्योग संगठन फिक्की की 84वींऔरऔर भी

पहले औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों ने खुशखबरी दी कि नवंबर में यह 5.9 फीसदी बढ़ गया है। फिर दिसंबर की मुद्रास्फीति ने साफ कर दिया कि करीब दो साल से अर्थव्यवस्था के सीने पर धमधम करता बोझ हल्का पड़ गया है। सोमवार को वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक सकल मुद्रास्फीति की दर दिसंबर 2011 में 7.47 फीसदी रही है। इससे पिछले महीने नवबंर में यह 9.11 फीसदी थी औरऔरऔर भी

फ्रांस के डाउनग्रेड के बाद बाजार में एक बार फिर हल्की-सी सिहरन दौड़ गई। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधरते मूलाधार यूरोपीय कारकों को बेअसर करने के लिए काफी हैं। दिसंबर में मुद्रास्फीति की दर 7.47 फीसदी पर आ चुकी है। यह साफ संकेत इस बात का है कि ब्याज दरों में कटौती अब ज्यादा दूर नहीं है। मुद्रास्फीति की दर पर हमारा अनुमान 7.5 फीसदी से 8 फीसदी का था। वास्तविक आंकड़े का इससे कम रहना बाजारऔरऔर भी

बाजार में ज्यादा गिरने की गुंजाइश अब बची नहीं है। लेकिन हमारा बाजार इतना खोखला है कि यहां डेरिवेटिव्स के जरिए कृत्रिम स्तर बना दिए जाते हैं। यूं तो इस हफ्ते निफ्टी 4742.80 से शुरू होकर आज 4866 पर बंद हुआ। लेकिन सारी अच्छी खबरों के बावजूद इसे गिराकर 4400 से 4000 तक पहुंचा दिया जाए तो मुझे कोई अचंभा नहीं होगा। असल में अपने यहां पिछले 12 महीनों में निचले स्तरों, निफ्टी के औसतन 5000 केऔरऔर भी

अजीब खींचतान का शिकार रहा बाजार। आईटी सेक्टर नीचे खींच रहा था तो बैंकिंग सेक्टर ऊपर। इनफोसिस ने भविष्य के अनुमान का झटका दिया तो एचडीएफसी के नतीजे बाजार की सोच से कमतर रहे। इस ऊंच-नीच और खींचतान में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की अप्रत्याशित वृद्धि भी बाजार का मूड उठा नहीं सकी। निफ्टी दिन में 11 बजे के आसपास 4869.20 तक उठ गया। लेकिन सवा घंटे के भीतर ही 4803.90 तक गोता लगा गया। अंत में बंदऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने अभी तक मार्च 2012 के अंत तक सकल मुद्रास्फीति का अनुमान 7 फीसदी पर यथावत रखा है। लेकिन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का कहना है कि तब तक मुद्रास्फीति की दर 6 से 7 फीसदी के बीच रह सकती है। वित्त मंत्री का यह बयान गुरुवार को खाद्य मुद्रास्फीति के ताजा आंकड़ों के जारी होने के बाद आया है जिसके मुताबिक 31 दिसंबर 2011 को समाप्त सप्ताह में भी खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने के बजायऔरऔर भी