दम तोड़ चुका है जनसंख्या विस्फोट का सिद्धांत

इस बार 15 अगस्त को शनिवार का दिन था। शनि का दिन, दुर्बुद्धि का दिन।...
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कर्म को दें धार, समृद्धि बरसेगी अपार

गंगोत्री से गंगा की धारा के साथ बहते पत्थर का ऊबड़-खाबड़ टुकड़ा हज़ारों किलोमीटर की...
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समझें धन का चक्र, न बनें घनचक्कर

कभी आपने सोचा है कि ज़रा-सा होश संभालते ही हम धन के चक्कर में घनचक्कर...
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तथास्तु! ताकि, फले-फूले आपका धन

हर कोई अपने धन को अधिक से अधिकतम करना चाहता है। लेकिन कर कौन पाता...
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मर्म जानो, धर्म तो समझो बाज़ार का

यह सच है कि इंसान और समाज, दोनों ही लगातार पूर्णता की तरफ बढ़ते हैं।...
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बीवी का हार नहीं, जिम्मेदारी का जिम्मा है बीमा

पहले जब तक गांव से ज्यादा जुड़ाव था, नौकरीपेशा तबके को जीवन बीमा की जरूरत...
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आइडिया में दम है, पर पूंजी कहां है?

जो भी पैदा हुआ है, वह मरेगा। यह प्रकृति का चक्र है, नियम है। ट्रेन...
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अबे सुन बे, सोने! तेरी औकात क्या है!!

सोने पर हम हिंदुस्तानी आज से नहीं, सदियों से फिदा हैं। पाते ही बौरा जाते...
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पैसा भी कैसे बन जाए कमाऊ-पूत!

भारत युवाओं का देश, जहां की 65 फीसदी आबादी 35 साल के नीचे की है।...
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फ्यूचर एंड ऑप्शन पर भगवान-भक्त संवाद

भक्त: हे भगवान! मेरी मनोकामना है कि ये बाजार चढता जाए तो अच्छा रहे। बाजार...
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नवा जूनी

पाठशाला

अच्छा लाभ मिला निफ्टी ऑप्शंस में

जून महीने के डेरिवेटिव सौदों में निफ्टी ऑप्शन का शुक्रवार से गुरुवार तक का पहला चक्र कल पूरा हो गया। इस दौरान निफ्टी 4.68% बढ़ा है। 29 मई को निफ्टी 9580.30 पर बंद हुआ था, जबकि कल 4 जून को उसका बंद स्तर 10,029.10 का रहा है। आइए, देखते हैं कि हमने शुक्रवार के भावों के आधार पर निफ्टी ऑप्शंस में ट्रेडिंग के जो चार तरीके अपनाए थे, उनका अंततः क्या हश्र हुआ है। बटरफ्लाई स्प्रेड: बटरफ्लाई स्प्रेड रणनीति कम वोलैटिलिटी होने पर ज्यादा कारगर होती है। फिर भी हमने ज्यादा वोलैटिलिटी की स्थिति होने के बावजूद इस पर अमल किया। इसके अंतर्गत हमने उस दिन निफ्टी के बंद भाव के सबसे नजदीकी स्तर 9600

ऋद्धि-सिद्धि

मुठ्ठी भर मंत्र

आगे है जीविका बचाने की कठिन जंग

भारत ही नहीं, पूरी दुनिया की अधिकतर आबादी अभी या तो लॉकडाउन में है या काफी रोकटोक के साथ काम पर जा रही है। कोरोना वायरस का प्रकोप समाप्त करने की रणनीति यह नहीं है, यह बात सभी जानते हैं। इसका मकसद बीमारी के विस्फोट का दायरा घटाने और बचाव का ढांचा खड़ा करने के लिए समय हासिल करने तक सीमित है। फ्लू के वायरस की तरह यह गर्मी आने के साथ नरम पड़ जाएगा, यह समझ पहले ही खारिज हो चुकी है। वैक्सीन या पक्का इलाज कोई है नहीं। ऐसे में बचकर चलना ही बाकी बचता है, जिसमें सारा संसार जुटा है। लेकिन इसके समानान्तर यह चिंता भी हर जगह सिर उठाने लगी है