क्या एफआईआई फिर लौटकर पहले जैसे जोशोखरोश के साथ भारत आएंगे? यकीनन, उनको आना ही है, बशर्ते भारतीय बाज़ार में उन्हें अमेरिका या अन्य विकसित देशों से ज्यादा रिटर्न मिलता है। अर्थशास्त्रियों से लेकर तमाम बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का कितना भी कुप्रबंधन कर लिया जाए, लेकिन उसकी आंतरिक सामर्थ्य इतनी ज्यादा है कि उसे निखरने से कोई रोक नहीं सकता। वैसे, अब भी हम गौर करें तो सेंसेक्स का प्रदर्शन डाउ जोन्सऔरऔर भी

आज विदेशी संस्थागत या पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) हमारे शेयर बाज़ार के दिशा-निर्धारक बन गए है। पूरे बाजार ही नहीं, तमाम अच्छे-खासे मजबूत स्टॉक्स की नियति उनकी मुठ्ठी में है। वे ही इनका रुख तय करते हैं। कोई फंडामेंटल नहीं, केवल विदेशी धन या निवेश का प्रवाह भावों को तय करने लगा है। मौजूदा साल 2022 में जुलाई से अब तक भारतीय शेयर बाज़ार में 57,579 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद के बावजूद उन्होंने कुल मिलाकर 1,59,779 करोड़औरऔर भी

अमेरिका का शेयर बाज़ार घटे-बढ़े तो टोक्यो का शेयर बाज़ार घट-बढ़ जाता है। इनके असर से भारत से लेकर कोरिया तक के स्टॉक एक्सचेंज बच नहीं पाते। कभी-कभी लंदन और ऑस्ट्रेलिया की दिशा अलग होती है। लेकिन यूरोप के शेयर बाज़ार तो कुल मिलाकर अमेरिका को ही फॉलो करते हैं। ऐसे में तमाम देशों की अपनी अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति शेयर बाज़ार के संदर्भ में अक्सर बेमानी हो जाती है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति निर्णायक। आखिर क्याऔरऔर भी

दुनिया भर के वित्तीय बाज़ारों का केंद्र अमेरिका है। दुनिया की हर बड़ी-छोटी मुद्रा की संदर्भ मुद्रा अमेरिकी डॉलर है, भले ही वह बिटिश पाउंड हो या यूरोप का यूरो हो, जापान का येन हो, इंडोनेशिया का रुपैया हो या भारत का रुपया। अपना रुपया तो डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होता-होता 81 रुपए तक जा पहुंचा है। हालांकि यूरो के मुकाबले वो मजबूत होकर 82 से 79 रुपए हो गया है। लेकिन इस तरह मुद्रा के डावांडोलऔरऔर भी

वॉरेन बफेट किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके मूलभूत पहलुओं का बेहद गहराई और बारीकी से अध्ययन करते रहे हैं। लेकिन गुण के साथ मात्रा का संतुलन ज़रूरी है। उनका कहना है, “सचमुच ज्यादा धन वही निवेशक बनाते हैं जो क्वालिटी के आधार पर सही फैसले करते हैं। लेकिन कम से कम मेरे विचार से पक्का धन मात्रा संबंधी फैसलों से बनता है।” इसी सोच पर चलते हुए बफेट संभावनाओं से भरी छोटी कंपनियोंऔरऔर भी

वैसे तो निवेश भी एक तरह की ट्रेडिंग है। वह लम्बे समय की ट्रेडिंग है, जबकि ट्रेडिंग छोटे समय का निवेश। राकेश झुनझुनवाला ने दोनों को मिलाकर शेयर बाज़ार में कामयाबी हासिल की। लेकिन वॉरेन बफेट ने खुद को हमेशा निवेश तक सीमित रखा। वे अपने गुरु बेन ग्राहम से सीखे सिद्धांतों पर डटे रहे। उनमें काफी कुछ नया भी जोड़ा। उनकी सफलता के पीछे निवेश की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि स्टॉक्स का चयन भी था। ऐसाऔरऔर भी

वॉरेन बफेट ने निवेश के शुरुआती दस सालों में बराबबर 30% से ज्यादा सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से रिटर्न कमाया। 31.6% का यह रिटर्न उन्होंने अपने शुरुआती निवेश उद्यम, बफेट पार्टनरशिप के ज़रिए साल 1957 से 1968 तक की अवधि में हासिल किया। उस दौरान अमेरिका के बेंचमार्क शेयर सूचकांक डाउ जोन्स का रिटर्न 9.1% था। उन दिनों बफेट का लक्ष्य था निवेश से कम से कम 10% सीएजीआर से कमाकर बेंचमार्क सूचकांक को मात देना। बादऔरऔर भी

दुनिया भर में शेयर बाज़ार में निवेश व ट्रेडिंग के उस्तादों पर जैक श्वैगर ने ‘मार्केट विज़ार्ड्स’ नाम की किताबों की पूरी सीरीज लिख रखी है। जॉर्ज सोरोस और उनके पूर्व पार्टनर जिम रोजर्स ने अपनी निवेश रणनीति पर अनेक किताबें लिखी हैं। वॉरेन बफेट पर तो बाज़ार में अनगिनत किताबें हैं। उन्हें दुनिया के महानतम निवेशकों में गिना जाता है। उन्होंने सात दशकों में करीब 10,000 करोड़ डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपए) की दौलत कमाईऔरऔर भी

भारत में विकासगाथा में अटूट विश्वास शेयर बाज़ार के निवेश में राकेश झुनझुनवाला की अप्रतिम सफलता का मूलाधार बन गया। जिस वॉरेन बफेट से उनकी तुलना की जाती है, उन्होंने उनसे ज्यादा कमाया। लेकिन वॉरेन बफेट की सफलता और निवेश रणनीति पर अनेकों-अनेक किताबें हैं, जबकि राकेश झुनझुनवाला पर एक भी नहीं। अपने यहां यही दिक्कत है कि राजनेताओं के मरने से पहले ही उनके जीवनवृत्त लिख लिए जाते हैं और मरने के चंद दिन बाद छापऔरऔर भी

अपने शेयर बाज़ार में हर्षद मेहता निपट गए। केतन पारेख का चांद भी डूब गया। लेकिन राकेश झुनझुनवाला का सितारा मरते दम तक चमकता रहा, दौलत बढ़ती रही। इसकी दो साफ वजहें हैं। एक तो यह कि राकेश ने कभी ठगी या फ्रॉड का सहारा नहीं लिया, न ही उन्होंने कभी फिक्सर का काम किया, जबकि हर्षद मेहता से लेकर केतन पारेख तक हमेशा सिस्टम को मैन्यूपुलेट करते रहे, उससे खेलते रहे। वहीं, झुनझुनवाला समय व हालातऔरऔर भी