शेयर बाज़ार में अनिश्चितता है। इसे ही रिस्क कहते हैं और रिस्क से ही रिवॉर्ड का निर्धारण होता है। जहां जितना रिस्क, वहां उतना ज्यादा रिवॉर्ड या फायदा। लेकिन रिस्क को नाथने का हुनर अभ्यास से आता है और अभ्यास का मतलब कदमताल करते जाना नहीं, बल्कि अपने अनुभवों से निरंतर सीखते जाना होता है। कोई सौदा क्यों किया, वह सफल हुआ तो क्यों और विफल हुआ तो क्यों? क्या पहलू हमने नज़रअंदाज़ कर दिए और किनकोऔरऔर भी

तैयारी कितनी भी कर लें, शेयर बाज़ार की अनिश्चितता को खत्म नहीं किया जा सकता। कल तो दूसरी ही तरह की अनिश्चितता ने बाज़ार को घेर लिया। एनएसई ने टेलिकॉम सेवा देनेवालों की तरफ से उपजी समस्या के चलते ट्रेडिंग 11.40 बजे रोक दी। निफ्टी-50 सुबह 10.08 बजे के बाद अपडेट ही नहीं हो रहा था। बाज़ार जब शाम 3.30 बजे बंद होता है, तब जाकर सूचकांक अपडेट हुआ। अंततः ट्रेडिंग का समय 90 मिनट बढ़ाकर 5औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई सुनिश्चित करने के लिए तीन खास बातें आपको पता होनी चाहिए। एक, बाज़ार में भय और लालच का संतुलन कैसा चल रहा है? दो, संस्थाओं व प्रोफेशनल ट्रेडरों का रुझान क्या है? तीन, विदेशी निवेशक संस्थाओं के धन का प्रवाह कैसा चल रहा है? इसलिए हर दिन बाज़ार बंद होने के बाद एनएसई की वेबसाइट पर जाकर देख लें कि डर व घबराहट से संबंधित इंडिया वीआईएक्स सूचकांक कितना बढ़ा/घटा है।औरऔर भी

हमारा शेयर बाज़ार अब पूरी तरह ग्लोबल हो चुका है। इसलिए दिन की ट्रेडिंग शुरू करने से पहले दुनिया के बाज़ारों का हाल-चाल जान लेना चाहिए। अमेरिका का डाउ जोन्स और S&P-500 सूचकांक का कल का क्लोजिंग, आज सुबह ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX-200 सूचकांक (अपने समय से दोपहर तक) और एशिया में (दोपहर से पहले तक) जापान का निक्केई सूचकांक, कोरिया/हागकांग के बाज़ार की स्थिति के साथ-साथ सिंगापुर निफ्टी सूचकांक का हालचाल पता कर लेना चाहिए। इससे मोटाऔरऔर भी

विज्ञान में अधिकतम उपलब्ध डेटा की थाह में पहुंचकर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाता है। उसी से अगला एक्शन या कदम तय होता है। लेकिन ट्रेडिंग विज्ञान ही नहीं, कला भी है। ग्लोबल हो चुका शेयर बाज़ार हर दिन इतना डेटा फेंकता है कि उनका विश्लेषण बेहद परिष्कृत सॉफ्टवेयर ही कर सकता है। इंसान तो डेटा के इस अम्बार में डूबता-उतराता ही रह जाएगा और अंततः कन्फ्यूज़ हो जाएगा। वैसे भी बाज़ार में पक्का कुछ नहीं,औरऔर भी

जो वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग का सार नहीं समझते, वे कभी इसे अंदाज़ का कमाल, किस्मत का खेल या सही बिजनेस टीवी चैनल का प्रताप बता सकते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग शुद्ध रूप से दांव-पेंच का खेल है। आप औरों पर ज़रा-सा भी भारी पड़े तो बाज़ी आपके ही हाथ लगती है। यह अलग बात है कि लगातार स्टॉक्स पर काम करते-करते एक तरह का इन्ट्यूशन विकसित हो जाता है औरऔरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में अपनी धार खुद विकसित करनी होती है। हम किसी की नकल नहीं कर सकते। पद्धति व तरीका तो सबसे पास समान होता है। उन्नीस-बीस का फर्क। इसे हमें अपनी बुनावट के हिसाब से कसना, साधना पड़ता है। अंततः हमारे हुनर में निखार अभ्यास से आता है। यहां हर कोई अपनी ही गलतियों से सीखता हुआ आगे बढ़ता है। धीरे-धीरे एक दिन बाज़ार की प्रायिकताओं से खेलने और उनको साधने का विज्ञान सीखऔरऔर भी

ट्रेडिंग में अलग धार कैसे लाई जाए? इसके लिए पहले यह धारणा मन से निकाल देनी होगी कि सॉफ्टवेयर आधारित एल्गोरिदम ट्रेडिंग किसी इंसान के दिमाग को मात दे सकती है। फिर, बाज़ार के अलग-अलग सेगमेंट हैं। ज़रूरी नहीं कि हर तरफ हाथ-पैर मारा जाए। ध्यान रहे कि दो-चार दिन में शेयरों के भाव का बढ़ना-घटना उनकी तरफ आते या उनसे दूर जाते धन के प्रवाह पर निर्भर है। अगर कोई धन के आने-जाने का यह समीकरणऔरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग किताबी ज्ञान नहीं, बाज़ार की पल-पल बदलती व्यावहारिक हकीकत से चलती है। यहां हर पल लालच और डर की इंसानी भावनाएं हिलोर मारती रहती हैं। ठंडी गणनाओं पर काम करनेवाले ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर भी सक्रिय हैं। लेकिन उनके पीछे सक्रिय इंसान है और जीतता भी इंसान है अपनी धार की बदौलत। यह भी अकाट्य सच है कि हरेक इंसान की अपनी अलग धार होती है। सारा कुछ पढ़ने, सीखने व जानने के बाद आपऔरऔर भी

सालों-साल से यही कड़वा सच है कि शेयर बाज़ार में 95% (ज्यादातर रिटेल) ट्रेडर घाटे में रहते हैं, जबकि केवल 5% ट्रेडर कमाते हैं। ऐसा तब, जब इस समय ट्रेडिंग सीखने की किताबों से लेकर यू-ट्यूब चैनल भरे पड़े हैं। ट्रेडिंग सिखानेवाले गुरुओं की भी कमी नहीं जो खुद ट्रेडिंग से नहीं कमा पाते तो सिखाने का धंधा चलाने लगते हैं। हर छात्र से प्रतिमाह 35,000 से 50,000 रुपए। ऑनलाइन ट्रेडिंग एकेडमी तो डेढ़-दो लाख लेती है।औरऔर भी