बाजार में मिथ है कि एफआईआई जिस शेयर को खरीदते हैं, उसके भाव अपने-आप बढ़ जाते हैं। लेकिन सिर्फ यही कारक किसी शेयर को नहीं बढ़ा सकता। जैसे, मार्च 2011 के अंत तक अल्सटॉम प्रोजेक्ट्स इंडिया में एफआईआई की इक्विटी हिस्सेदारी 2.56 फीसदी थी, जबकि जून 2011 के अंत तक यह बढ़कर 4.10 फीसदी हो गई। जाहिर है कि एफआईआई की यह सारी खरीद 1 अप्रैल से 30 जून 2011 के बीच हुई होगी। लेकिन 1 अप्रैलऔरऔर भी

कहने को अलेम्बिक लिमिटेड 104 साल पुरानी 30 जुलाई 1907 को बनी भारतीय दवा कंपनी है। ललित मोदी की जगह आईपीएल के चेयरमैन व कमिश्नर बने चिरायु अमीन इसके सीएमडी हैं। एक संयंत्र वडोदरा (गुजरात) तो दूसरा संयंत्र बड्डी (हिमाचल प्रदेश) में है। दुनिया के लगभग 75 देशों में उसकी पहुंच है। कल उसने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। इनके मुताबिक जून 2011 में खत्म तिमाही में उसने 39.55 करोड़ रुपएऔरऔर भी

नेशनल पेरॉक्साइड 1954 में बनी नुस्ली वाडिया परिवार की कंपनी है। नुस्ली के बेटे नेस वाडिया इसके चेयरमैन हैं। कंपनी कल्याण (महाराष्ट्र) की फैक्टरी में तीन रसायन बनाती है – हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, सोडियम परबोरेट व पैरासेटिक एसिड बनाती है। लेकिन इसमें प्रमुख है हाइड्रोडन पेरॉक्साइड जिसमें देश का 40 फीसदी बाजार उसके हाथ में है। कंसोलिडेट आधार पर कंपनी वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी का ईपीएस (प्रति शेयर मुनाफा) 101.23 रुपए और स्टैंड-एलोन आधार पर 100.65 रुपएऔरऔर भी

इस बाजार की बलिहारी है। 10 जून को आईएफसीआई ने सूचित किया कि तीन-तीन एजेंसियों – इक्रा, केयर व ब्रिकवर्क रेटिंग ने उसकी रेटिंग बढ़ा दी है। लेकिन इस अच्छी खबर के ठीक तेरह दिन बाद 23 जून को आईएफसीआई का शेयर 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर 42.55 रुपए पर पहुंच गया। महीने भर बाद अब भी उसी के आसपास डोल रहा है। शुक्रवार, 22 जुलाई को एनएसई (कोड – IFCI) में 46.85 रुपए और बीएसई (कोडऔरऔर भी

यूं तो यह जमाना ही अपने मुंह मियां मिठ्ठू बनने का है। लेकिन यहां मैं अपनी तारीफ नहीं कर रहा। बल्कि, यह बताने की कोशिश कर रहा हूं कि कैसे सहज बुद्धि से अच्छी कंपनियों का चयन किया जा सकता है और उनमें निवेश से फायदा कमाया जा सकता है। केवल दो उदाहरण देना चाहता हूं। एक, पेट्रोनेट एलएनजी का और दूसरा, ईसाब इंडिया का। पेट्रोनेट एलएनजी के बारे में हमने पहली बार चौदह महीने पहले 24औरऔर भी

बहुत मुमकिन है कि आपने गांवों में कुंओं पर चलनेवाली रहट नहीं देखी होगी। मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती जैसे पुराने गानों में देख सकते हैं। एक चक्र में चलती है रहट। खाली कूप नीचे जाता है और पानी भरकर ऊपर आ जाता है। नीचे जाकर मूल्यवान बनने का ऐसा ही चक्र हमारे शेयर बाजार में भी चलता है। हां, यहां रहट एक जगह टिकी नहीं रहती, बल्कि वह भी कंपनी का मूल्य बढ़नेऔरऔर भी

ल्यूपिन लिमिटेड नाम से कुछ भी लगे। लेकिन है यह खांटी देसी कंपनी। केमिस्ट्री में एमएससी करनेवाले देशबंधु गुप्ता ने 1968 में इसकी स्थापना की। बताते हैं कि गुप्ता जी शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के जमाने में जाली दवाएं बनाकर बेचते थे। लेकिन 1970 में भारतीय पेटेंट एक्ट आ गया। फिर गुप्ता जी को वाल्मीकि के अंदाज में समझ में आ गया है कि गलत धंधा करने में फायदा नहीं और वे कुशल सारथी व उद्यमी कीऔरऔर भी

ग्लोडाइन टेक्नोसर्व आईटी सेवाओं में सक्रिय मुंबई की कंपनी है। आनंद सरनायक इसके संस्थापक प्रवर्तक और सीएमडी हैं। सरनायक 1997 में यह कंपनी बनाने से पहले एचसीएल-एचपी में काम करते थे। कंपनी की दो खास सेवाएं हैं टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट सर्विसेज (आईएमएस) और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर सर्विसेज। आप कहेंगे कि इससे हमको क्या लेना-देना। तो बात यह है कि ठीकठाक धंधा कर रही इस कंपनी का शेयर कल 18 जुलाई 2011 को अपने न्यूनतम स्तर 298 रुपए तकऔरऔर भी

अगर हम किसी चीज को नहीं जानते तो यह हमारी अपनी सीमा है। लेकिन हर चीज को कोई न कोई तो जानता ही है और इनमें से हर अच्छी चीज वाजिब भाव भी मिलता है। कंपनियां हमारी आंखों से ओछल रहकर काम करती रहती हैं। हम अनजान रहने के कारण उनकी विकास यात्रा का फल नहीं चख पाते। लेकिन हमारे जानने या न जानने से उनकी विकास यात्रा पर कोई फर्क नहीं पड़ता। वह यात्रा सतत जारीऔरऔर भी

हमारा शेयर बाजार या तो किसी योगी और पहुंचे हुए संत-फकीर की तरह बर्ताव करता है जो दीन-दुनिया से एकदम निर्लिप्त है या उस मूढ़ की तरह जिस पर कोई जगतगति नहीं ब्यापती। नहीं तो क्या वजह है कि बुधवार की शाम मुंबई में आतंकवादियों के सीरियल बम धमाकों के बाद गुरुवार को शेयर बाजार ने ऐसा दिखाया जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। बीएसई सेंसेक्स बुधवार के बंद स्तर 18,596.02 से जरा-सा नीचे 18,563.69 पर खुला।औरऔर भी