देश की शीर्ष मौद्रिक संस्था, भारतीय रिजर्व बैंक ने झूठ बोलने का हुनर देश की राजनीतिक, वित्तीय व आर्थिक सत्ता यानी केंद्र सरकार से सीखा है। बारह सालों से केंद्र में कुण्डली मारकर बैठी मोदी सरकार ने सरेआम देश-दुनिया और अवाम की आंखों में धूल झोंकने का ऐसा प्रपंच खड़ा कर दिया है जिसे कोई टक्कर नहीं दे सकता, न भूतो न भविष्यति। सरकार का कहना है कि जो सबको दिखता है, वो सच नहीं। जो वो बता रही है, वही सच है। शुक्रवार, 5 जून को सरकार ने डंका बजाया कि देश के जीडीपी की रीयल विकास दर बीते वित्त वर्ष में 7.7% रही है जो पिछले तीन सालों का सर्वोच्च स्तर है क्योंकि रीयल जीडीपी 2024-25 में 7.1% और 2023-24 में 7.2% बढ़ा था। लेकिन रीयल जीडीपी डिफ्लेटर का बनावटी खेल है। जो असली है, जो आम लोगों से लेकर कॉरपोरेट क्षेत्र तक को दिखता और मायने रखता है, वो है नॉमिनल जीडीपी और उसकी विकास दर। 2025-26 में जीडीपी की नॉमिनल विकास दर 8.9% रही है जो तीन सालों की न्यूनतम दर है। 2024-25 में यह दर 9.7% और 2023-24 में 11.0% रही थी। इस बार की नॉमिनल विकास दर 2025-26 के बजट अनुमान 10.1% के आसपास भी नहीं फटकती। जीएसटी संग्रह बढ़ना भी विशुद्ध झांकी है। यह संग्रह बढ़ने का कमाल खपत नहीं, बल्कि आयात पर लगे आईजीएसटी का है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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