बेचनवाले तो गंजे को भी कंघी बेच देते हैं। इस समय शेयरों के निवेश में एआई के कमाल की ऐसी ही बिक्री चल रही है। वॉरेन बफेट, मेरिल लिंच के साथ राकेश झुनझुनवाला की बुद्धि व शैली से कंपनियों का चयन। ऊपर से फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस के मेल ‘कैनस्लिम’ का तड़का। देश में लिस्टेड करीब 6000 कपनियों के वित्तीय ही नहीं, गर्वनेंस तक का सारा डेटाबेस। दावा कि राजेश एक्सपोर्ट्स के घोटाले का संकेत एक सालऔरऔर भी

पुरुष बली नहिं होत है, समय होत बलवान। भीलन छीनी गोपियां, वही अर्जुन वही बाण। निवेश की दुनिया में भी समय की बड़ी महत्ता है। शर्त इतनी है कि जो कंपनी चुन रहे हैं, उसमें विकास की संभावनाएं भरपूर होनी चाहिए। फिर समय के साथ आपका निवेश पांच-दस साल में पांच-दस नहीं, बल्कि बीस-तीस गुना हो सकता है। मसलन, हमने इसी कॉलम में करीब दस साल पहले 11 सितंबर 2016 को अपार इंडस्ट्रीज़ को चुना था औरऔरऔर भी

सूचनाओं की भरमार है। तरह-तरह की इतनी सूचनाएं कि फैसला लेना मुश्किल। हाल-फिलहाल कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे आ रहे हैं। इसी के साथ मैनेजमेंट के प्रजेंटेशन। फिर भांति-भांति के एनालिस्टों के विश्लेषण। ब्रोकरों की तरफ से खरीदने की संस्तुतियां। सबके पीछे कंपनी के वित्तीय नतीजों से लेकर सालाना रिपोर्ट तक। भूत से लेकर वर्तमान और भविष्य तक का गहरा विश्लेषण। गूगल के जेमिनाई या ओपन एआई के चैट जीपीटी पर कंपनी का नाम डालो। कंपनीऔरऔर भी

आम या रिटेल निवेशकों के लिए शेयर बाज़ार में सीधे निवेश का सूत्र इसमें छिपा है कि कैसे छोटी कंपनियों को तब पकड़ लिया जाए, जब उन पर बड़े निवेशकों की नज़र न पड़ी हो। वैसे भी छोटी कंपनियों को म्यूचुअल फंड या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक आईपीओ के बाद अमूमन हाथ नहीं लगाते क्योंकि उनकी खरीद इतनी बड़ी होती है कि छोटी कंपनियों के शेयर अचानक चढ़ जाते हैं। इसलिए छोटी और संभावनामय कंपनियां दौलत बनाने केऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में अक्सर ऐसा कुछ होता रहता है जो पहले कभी नहीं हुआ। इसलिए दुनिया की तरह शेयर बाज़ार को भी स्थिर व शाश्वत नियमों से चलनेवाला तंत्र मान लेना गलत है। आज तक ऐसा नहीं हुआ कि आईपीओ के बाद लिस्ट होने से पहले ही किसी कंपनी के शेयरों को बेचने की सलाह या सेल-कॉल दे दी जाए। लेकिन भारत ही नहीं, दुनिया में वोल्यूम के आधार पर सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंज एनएसई के साथऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में धन का प्रवाह बढ़ता है तो सूचकांक से लेकर अलग-अलग स्टॉक्स तक बढ़ने लगते हैं। धन का प्रवाह सूखते ही सारी तेज़ी हवा हो जाती है। सितंबर 2024 के बाद विदेशी पोर्टफलियो निवेशकों (एफपीआई) के निकलने जाने से हमारे शेयर बाज़ार की यही दशा-दिशा चल रही है। एफपीआई झूमकर लौटे नहीं तो अपना शेयर बाज़ार एक कदम आगे, दो कदम पीछे चलता रहेगा। ऐसा नहीं कि विदेशी निवेशक भारत से चिढ़कर भाग रहे हैं।औरऔर भी

पश्चिम एशिया के संकट से उपजी अनिश्चितता काफी हद तक खत्म हो चुकी है। प्रति बैरल कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर के पार जाने के बाद 70 डॉलर के आसपास डोल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने सदी के सबसे बड़े संकट को रणनीतिक फैसलों और राजनय से निपटा दिया। लेकिन क्या भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सब कुछ सामान्य हो गया है? क्या हमारा शेयर बाज़ार उसी तरह बम-बम करेगा, जैसाऔरऔर भी

भारतीय शेयर बाज़ार में पंजीकृत निवेशकों की संख्या 25 करोड़ के पार जा चुकी है। इनमें से अलग-अलग पैन नंबर वाले निवेशकों की संख्या 13.1 करोड़ के आसपास है। इनमें से कम से कम 12 करोड़ निवेशक आम और 1.1 करोड़ निवेशक खास होने चाहिए। जब आम निवेशक आईपीओ या सीधे बाज़ार से शेयर खरीदते हैं तो सामने से ज्यादातर खास निवेशक बेचते हैं। खास निवेशकों में तमाम विदेशी निवेशक होते हैं जो वेंचर कैपिटल और प्राइवेटऔरऔर भी

स्पेसएक्स के आईपीओ से पहले एलन मस्क की नेटवर्थ 813 से 970 बिलियन डॉलर थी। आईपीओ आने के बाद उनकी नेटवर्थ 1.1 से 1.3 ट्रिलियन डॉलर हो गई और वे दुनिया के पहले ट्रिलियनर बन गए। 11 जून को आईपीओ में स्पेसएक्स के शेयर 135 डॉलर मूल्य पर जारी हुए। हालांकि इसका अंतर्ऩिहित मूल्य 63 डॉलर ही बताया जाता है। 12 जून को आईपीओ बंद होने तक इसमें लाखों छोटे निवेशकों और हज़ारों बड़े संस्थागत निवेशकों नेऔरऔर भी

ईरान युद्ध अंततः खत्म होने जा रहा है। होर्मुज़ स्ट्रैट से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति जल्दी ही बहाल हो जाएगी। कच्चे तेल के दाम 80-85 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुके हैं। शेयर बाजार फिर से उछलने के मुहाने पर है। बाज़ार में उत्साह लौटने लगा है क्योंकि 15 हफ्तों के चल रहा कंटक अब कटने को है। लेकिन इस दौरान जो शेयर बाज़ार से सब बेच-बाचकर निकल लिए, उनके लिए पछताने का दौर है।औरऔर भी