शेयर वही खरीदने चाहिए जिनमें बढ़ने की भरपूर संभावना हो, जो हर ऊंच-नीच से उबरकर अंततः फायदा दिला सकें। हर कोई तो यही चाहता है। लेकिन फंस जाता है। खुद ऐसे शेयर निकालने की न तो सामर्थ्य होती है और न ही फुरसत। इसलिए अक्सर सलाहकारों के चंगुल में फंस जाता है। चंगुल इसलिए कहा क्योंकि ज्यादातर सलाहकार निवेशक नहीं, बल्कि अपना भला करने का मिशन लेकर चलते हैं। अपने यहां समूचा वित्तीय बाज़ार शिकारियों से भरा है जो ग्राहकों का भला नहीं, अपने कमीशन के लिए काम करते हैं। शेयर बाज़ार में ब्रोकर, सब-ब्रोकर और बिजनेस चैनलों व अखबारों के एनालिस्ट हैं तो अन्य माध्यमों मे बैंकों व बीमा कंपनियों के एजेंट हैं। म्यूचुअल फंड में आप सोच-समझकर लम्बे निवेश के लिए एसआईपी की राह चुनते हैं तो ऐसे शिकारियों से बच सकते हैं। नहीं तो इनसे बच पाना मुश्किल है। ऐसे में करें तो क्या करें? सेबी, रिजर्व बैंक या आईआरडीए से फरियाद करने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि वे कुछ भी कहें, अंततः धंधेबाज़ों का ही हित साधते हैं। इसलिए निवेशकों को अपने स्वतंत्र फोरम बनाने चाहिए। सबसे बड़ी बात कि सुनो सबकी, करो अपनी। निवेश करना है तो अपनी समझ तो बनानी ही होगी। अब तथास्तु में आज की कंपनी…
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