भारतीय रिजर्व बैंक किसी से एक धेला भी नहीं लेता। फिर वो कैसे इतना कमा लेता है कि केंद्र सरकार को साल भर में ₹2,86,588 करोड़ का लाभांश दे देता है। गौरतलब है कि 2003-04 से 2013-14 तक उसने यूपीए सरकार को दस साल में कुल ₹78,829 करोड़ लाभांश दिया था, जबकि 2014-15 से 2025-26 तक मोदी सरकार के 11 साल के कार्यकाल में वो अब तक केंद्र सरकार को ₹14,28,444 करोड़ का लाभांश दे चुका है। लाभांश में 18.12 गुना वृद्धि। नोट करने की बात है कि 2014-15 से 2025-26 की इस अवधि में रिजर्व बैंक का लाभ केवल 4.35 गुना बढ़ा है। सकल आय में सारे खर्च घटाकर रिजर्व बैंक की शुद्ध आय या लाभ बनता है। इसमें से हर साल कुल चार करोड़ रुपए अलग-अलग निधियों में डाल देने के बाद जो सरप्लस बचता है, वो पूरी रकम केंद्र सरकार को बतौर लाभांश दे दी जाती है। वित्त वर्ष 2012-13 में रिजर्व बैंक ने सकल आय से कुल खर्च घटाने के बाद बची रकम का 53.4% हिस्सा केंद्र को लाभाश दिया था। इससे पहले 2010-11 में यह हिस्सा 52.8% और 2011-12 में 37.2% था। मोदी सरकार ने 26 मई 2014 को सत्ता संभाली तो अगले महीने 2013-14 के नतीजे घोषित होने पर यह हिस्सा बढ़ाकर 99.99% कर दिया गया। तभी से रिजर्व बैंक का 99.99% लाभ खींचने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। अब सोमवार का व्योम…
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