इस समय देश में गजब का समीकरण है। शीर्ष मौद्रिक संस्था, रिजर्व बैंक देश में किसी से भी एक धेला तक नहीं लेता, जबकि राजनीतिक सत्ता खुद एक धेला भी नहीं कमाती। सब कुछ या तो जनता पर लगाए टैक्स और सरकारी कंपनियों व संस्थाओं के लाभांश या देश की संप्रभुता को भुनाकर लिए गए ऋण से हासिल करती है। अवाम और सरकारी संस्थानों से हर दमड़ी वसूल करने का क्रूर सिलसिला 2014 में प्रधानमंत्री मोदी नेऔरऔर भी