देश-दुनिया के लिए भारत की 65% युवा आबादी उसकी ऐसेट या आस्ति है। लेकिन सरकार ऐसा नहीं मानती क्योंकि मान लें तो उसे इसकी ज़िमेमदारी उठानी पड़ेगी, इसे अपना मानकर संभालना पड़ेगा। कोई एक भी युवा रोज़गार में नहीं लगा तो सरकार को इस राष्ट्रीय नुकसान की भरपाई उस खजाने से करनी पड़ेगी जिसे वो इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स, कैपिट गेन्स टैक्स, सिक्यूरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स व प्रॉपर्टी टैक्स जैसे प्रत्यक्ष और कस्टम, एक्साइज़ व जीएसटी जैसे परोक्षऔरऔर भी