अनिश्चितता से भरा समय है और अनिश्चितता से ही भरा है शेयर बाज़ार। इस अनिश्चितता से जूझने के लिए जिसने रिस्क लिया, उसने या तो कमाया या अनुभव से थोड़ी समझ और हौसला हासिल किया। जिसने रिस्क नहीं लिया तो धारा के साथ बह गया या बहते-बहते कहीं किनारे लग गया। करना क्या है, यह हर किसी को रिस्क लेने की अपनी क्षमता के हिसाब से तय करना है। शेयर बाज़ार का कोई भरोसा नहीं। बड़ों को पटक देता है और छोटों को आसमान पर बैठा देता है। हमने साल भर पहले इसी कॉलम में 19 अक्टूबर 2025 को जिलेट इंडिया जैसी मजबूत कंपनी को पकड़ा था। उसका शेयर तब से 25% गिर चुका है। वहीं, करीब नौ साल पहले 3 सितंबर 2017 को निट्टा जिलेटिन को ₹175 पर उठाया था। उसका शेयर इसी साल जुलाई में ₹2088 तक जाने के बाद गिरने पर भी अभी ₹1715 की रेंज में है। नौ साल में करीब दस गुना। वर्तमान की बात करें तो अनिश्चितता ही छाई है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति 7 अक्टूबर को आनी है। तब तक कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे आने शुरू हो जाएंगे। उधर, पश्चिम एशिया के हालात सामान्य होने का नाम नहीं ले रहे। ऊपर से ट्रम्प का टैरिफ हमला। इसी अनिश्चितता के बीच तथास्तु में आज की कंपनी…
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