दुनिया भर में नॉमिनल जीडीपी में किसी झूठ या फ्रॉड की गुंजाइश नहीं क्योंकि वो बाज़ार मूल्यों पर आधारित होता है और बाज़ार मूल्य अमूमन झूठ नहीं बोलते। मई 2014 से पहले भारत में भी ऐसी कोई गुंजाइश नहीं थी। तब औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) जैसे मात्रा पर आधारित सूचकांकों से रीयल जीडीपी की गणना सीधे की जाती थी और फिर उसमें डिफ्लेटर जोड़कर नॉमिनल जीडीपी निकाला जाता था। लेकिन मोदी सरकार ने जनवरी 2015 से जीडीपीऔरऔर भी