अनिश्चितता से भरा समय है और अनिश्चितता से ही भरा है शेयर बाज़ार। इस अनिश्चितता से जूझने के लिए जिसने रिस्क लिया, उसने या तो कमाया या अनुभव से थोड़ी समझ और हौसला हासिल किया। जिसने रिस्क नहीं लिया तो धारा के साथ बह गया या बहते-बहते कहीं किनारे लग गया। करना क्या है, यह हर किसी को रिस्क लेने की अपनी क्षमता के हिसाब से तय करना है। शेयर बाज़ार का कोई भरोसा नहीं। बड़ों कोऔरऔर भी