हम चौबीसों घंटे तो मन की हरकतों पर उड़ते या तैरते रहते हैं. तन का होश तभी आता है जब कोई तकलीफ या बीमारी जकड़ लेती है. तन का बराबर होश रहे तो शायद कभी तकलीफ और बीमारी की नौबत ही न आए.और भीऔर भी