रिजर्व बैंक ने ब्याज दर रखी जस की तस, लेकिन 0.5% घटाया सीआरआर

रिजर्व बैंक ने मौद्रिक की तीसरी त्रैमासिक समीक्षा में ब्याज दरों को जस का तस रखा है, लेकिन नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को आधा फीसदी घटाकर 6 से 5.5 फीसदी कर दिया है। दूसरे शब्दों में बैंकों को अब अपनी कुल जमा का 6 फीसदी नहीं, बल्कि 5.5 फीसदी हिस्सा ही रिजर्व बैंक के पास रखना होगा। यह फैसला 28 जनवरी 2012 से शुरू हो रहे पखवाड़े से लागू हो जाएगा। ध्यान दें कि सीआरआर में आधा फीसदी कटौती और ब्याज दरों से कोई छेड़छाड़ न किए जाने की सूचना हमने आधिकारिक घोषणा से करीब चौदह घंटे पहले ही आपको कल रात नौ बजे के आसपास दे दी थी।

रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव ने मंगलवार को सुबह 11 बजे पेश किए गए नीति वक्तव्य में इस फैसले का ऐलान किया। सीआरआर में कटौती बैकिंग तंत्र को अधिक तरलता या लिक्विडिटी उपलब्ध कराने के मकसद से की गई है। उनका कहना है कि 2011-12 के दौरान ज्यादातर आमतौर तक घाटे में रही लिक्विडिटी की स्थिति नवंबर 2011 के दूसरे हफ्ते से और बिगड़ गई। इसकी आंशिक वजह है – रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में किया गया हस्तक्षेप और मध्य-दिसंबर में अग्रिम करों की अदायगी के चलते बैंकों से निकाली गई रकम।

रिजर्व बैंक की चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतगर्त रेपो दर पर बैंकों द्वारा लिया जानेवाला रोजाना का औसत उधार अप्रैल-सितंबर 2011 के 48,000 करोड़ रुपए से बढ़कर नवंबर में 92,000 करोड़ रुपए और मध्य-दिसंबर तक 1.17 लाख करोड़ रुपए हो गया। जनवरी 2012 में 20 तारीख तक प्रतिदिन का औसत उधार 1.20 लाख करोड़ रुपए रहा है। आज सुबह भी बैंकों ने रिजर्व बैंक से रेपो दर पर 1,23,250 करोड़ रुपए उधार लिये हैं।

रिजर्व बैंक का कहना है कि उसने तरलता के दबाव को कम करने के लिए नवंबर 2011 से मध्य जनवरी 2012 कर ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के तहत 70,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के सरकारी बांड बाजार से खरीदे। फिर भी बैंकों का तरलता संकट हल्का नहीं हुआ। कई बैंक मार्जिंनल स्टैंडिंग सुविधा (एमएसएफ) के तहत रेपो से एक फीसदी ज्यादा, 9.5 फीसदी ब्याज देकर उससे उधार लेते रहे। कॉल मनी बाजार में ज्यादातर ब्याज दर रेपो के आसपास रही है। लेकिन कभी-कभी तरलता की तंगी के चलते कॉल मनी की दर एमएसएफ में निर्धारित ब्याज 9.5 फीसदी के भी पार चली गई। तरलता के इसी दबाव को कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने सीआरआर में आधा फीसदी कमी की है। इससे बैंकों को अपनी कुल जमा का आधा फीसदी यानी, करीब 32,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त मिल जाया करेगा।

रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा में पूरे वित्त वर्ष 2011-12 के लिए आर्थिक विकास दर का अनुमान 7.6 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया है। लेकिन इधर मुद्रास्फीति के घटने से वह थोड़ी तसल्ली महसूस कर रहा है। इसलिए उसने मार्च 2012 तक सकल मुद्रास्फीति के 7 फीसदी पर आ जाने के पुराने अनुमान को जस का तस रखा है। उसे यकीन है कि मुद्रास्फीति घटकर इतने पर तो आ ही जाएगी। दिसंबर 2011 में मुद्रास्फीति की दर 7.47 फीसदी रही है, जबकि इससे एक महीने पहले नवंबर 2011 में यह 9.11 फीसदी थी।

हां, रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार की बढ़ती उधारी पर जरूर चिंता जताई है। उसका कहना है कि 2011-12 में अप्रैल-नवंबर के दौरान केंद्र सरकार का घाटा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि से ज्यादा रहा है। यहां तक कि पिछले साल स्पेक्ट्रम बिक्री से मिली एकमुश्त रकम हटा भी दें, तब भी इस बार का घाटा पहले से ज्यादा है। यह सरकार की बढ़ती उधारी से झलकता है। चालू वित्त वर्ष में सरकारी उधारी का बजट अनुमान 4.17 लाख करोड़ रुपए था। इसे सितंबर में करीब 53,000 करोड़ और फिर दिसंबर में 40,000 करोड़ रुपए बढ़ा दिया गया। इस तरह पूरे वित्त वर्ष में सरकार की सकल उधारी 5.10 लाख करोड़ रुपए और शुद्ध उधारी 4.36 लाख करोड़ रुपए रहेगी।

इस सकल उधारी का 83 फीसदी हिस्सा (4.22 लाख करोड़ रुपए) हिस्सा और शुद्ध उधारी का 80 फीसदी हिस्सा (3.48 लाख करोड़ रुपए) 16 जनवरी 2012 तक जुटाया जा चुका है। केंद्र सरकार ने इस बार 15,000 करोड़ रुपए के बजट अनुमान के बजाय ट्रेजरी बिलों से 1,02,500 करोड़ रुपए ज्यादा जुटाने की घोषणा कर रखी है। बता दें कि रिजर्व बैंक देश के बैंकों के नियमन व मुद्रा प्रबंधन के साथ-साथ हमारी सरकार के ऋण व्यवस्थापक का भी काम करता है।

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