दिल्ली के राजनीतिक हलकों में भले ही हड़बड़ी मची हो, लेकिन रिजर्व बैंक को फिलहाल कोई हड़बड़ी नहीं है। उसने मौद्रिक नीति की मध्य-तिमाही समीक्षा में कुछ भी नहीं बदला। सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) को पिछले ही हफ्ते उसने 5.5 फीसदी से घटाकर 4.75 फीसदी किया था तो उसे घटाने की गुंजाइश थी नहीं। ब्याज दर या रेपो दर में जरूर 0.25 फीसदी कमी की उम्मीद थी। बहुतेरे विश्लेषक मान रहे थे कि इसे 8.50 फीसदी सेऔरऔर भी

लगता है कि मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक की परीक्षा ले रही है। सरकार की तरफ से बुधवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में सकल मुद्रास्फीति की दर पिछले पांच महीनों से घटते-घटते अचानक बढ़ गई। जनवरी में इसकी दर 26 महीनों के न्यूनतम स्तर 6.55 फीसदी पर पहुंच गई थी। लेकिन फरवरी में बढ़कर 6.95 फीसदी पर पहुंचा गई। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भरोसा जताया है कि चालू मार्च में यह 6.50 फीसदी पर आऔरऔर भी

मेरे तईं रेल बजट बाजार के लिए कोई खास मायने नहीं रखता। हम बखूबी जानते हैं कि चाहे वो रेल बजट हो या आम बजट, सरकार के लिए धन जुटाना बड़ी समस्या है। फिर भी रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने सालों बाद किराया बढ़ाने की जुर्रत की है, जिसके लिए उनकी दाद देनी पड़ेगी। हालांकि मैं तो अर्थव्यवस्था की उस सूक्ष्म तस्वीर को पकड़ने की कोशिश कर रहा हूं जो निश्चित रूप से बजट के छोटे दायरेऔरऔर भी

यूरो ज़ोन अब ऋण संकट के साथ-साथ रिकॉर्ड बेरोजगारी, घटते औद्योगिक उत्पादन और बढ़ती महंगाई से भी परेशान हो गया है। यूरोप के सांख्यिकी कार्यालय यूरोस्टैट के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक यूरो ज़ोन में बेरोजगारी की दर जनवरी में अचानक बढ़कर 10.7 फीसदी हो गई। ऋण संकट से बुरी तरह घिरे स्पेन में बेरोजगारी की दर 23.3 फीसदी हो गई है जो पूरे यूरो ज़ोन में सबसे ज्यादा है। ऑस्ट्रिया की हालत सबसे अच्छी है। लेकिन वहांऔरऔर भी

सरकार ने मंगलवार को पहली बार मुद्रास्फीति के वो आंकड़े जारी किए जिनका वास्ता औद्योगिक खपत से नहीं, बल्कि आम उपभोक्ता के जीवन से है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर नए साल के पहले महीने जनवरी में मुद्रास्फीति 7.65 फीसदी रही है। जनवरी माह की ही थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 6.55 फीसदी रही है। इस तरह उपभोक्ताओं के लिए मुद्रास्फीति की दर औद्योगिक खपत से 1.10 फीसदी ज्यादा है। खास बात यह है किऔरऔर भी

मुद्रास्फीति की दर जनवरी में उम्मीद से कुछ ज्यादा ही घटकर 6.55 फीसदी पर आ गई है। यह थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित सकल मुद्रास्फीति का नवंबर 2009 के बाद का सबसे निचला स्तर है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में आर्थिक विकास दर के त्वरित अनुमान के घटकर 6.9 फीसदी रह जाने और मुद्रास्फीति के काफी हद तक काबू में आ जाने के बाद रिजर्व बैंक पर इस बार का दबाव बढ़ जाएगा कि वह ब्याज दरोंऔरऔर भी

अर्थशास्त्रियों को उम्मीद थी कि अक्टूबर में 4.7 फीसदी घटने के बाद नवंबर में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) जिस तरह 5.9 फीसदी बढ़ा था, उसे देखते हुए दिसंबर में आईआईपी की वृद्धि दर 3.4 फीसदी तो रहनी ही चाहिए। लेकिन सीएसओ (केंद्रीय सांख्यिकी संगठन) की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक उत्पादन में वास्वतिक वृद्धि मात्र 1.8 फीसदी की हुई है। साल भर पहले दिसंबर 2010 में यह वृद्धि दर 8.1 फीसदी रही थी।औरऔर भी

फ्रांस की जिस कंपनी डास्सू एविएशन ने अपने 76 सालों के इतिहास में एक भी जहाज विदेश में न बेचा हो, उसे अचानक भारतीय वायुसेना से 126 राफेल युद्धक विमानों का ऑर्डर मिल जाना किसी को भी चौंका सकता है। वह भी तब, जब सौदा 15 अरब से 20 अरब डॉलर (75,000 करोड़ से एक लाख करोड़ रुपए) का हो। फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोज़ी ने पिछले हफ्ते मंगलवार, 31 जनवरी को भारत सरकार के इस फैसलेऔरऔर भी

अमेरिका में बेरोज़गारी की दर तीन सालों के न्यूनतम स्तर पर आ चुकी है। डाउ जोन्स मई 2008 के बाद के सर्वोच्च स्तर पर आ चुका है। वह शुक्रवार को 1.2 फीसदी की बढ़त लेकर 12,862.23 पर बंद हुआ है। लेकिन अब वहां करेक्शन आना लाजिमी है। देश में निफ्टी बड़े शान से 5300 का स्तर तोड़कर ऊपर आ चुका है। लगातार तीन दिन से 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) से ऊपर टिका है। अरसे सेऔरऔर भी

नए साल का पहला महीना बीएसई सेंसेक्स और रुपए के लिए ऐतिहासिक बढ़त का महीना रहा है। जनवरी में सेंसेक्स 11.3 फीसदी बढ़ा है। यह पिछले 18 साल में जनवरी के दौरान सेंसेक्स में हुई सबसे ज्यादा बढ़त है। इससे पहले जनवरी 1994 में 19.4 फीसदी बढ़ा था। इसी तरह भारतीय रुपए के लिए भी जनवरी का महीना पिछले 17 सालों की सबसे ज्यादा बढ़त का साक्षी रहा। इस महीने डॉलर के सापेक्ष रुपया 7.45 फीसदी मजबूतऔरऔर भी