जूडो-कराटे ही नहीं, गीता तक में भगवान श्रीकृष्ण ने स्थितप्रज्ञ होने की सलाह दी है। ट्रेडिंग में भी कहते हैं कि अपनी भावनाओं को वश में रखो, उन्हें ट्रेडिंग पर कतई हावी मत होने दो। ऐसा करना ज़रूरी है। लेकिन क्या कामयाबी के लिए इतना पर्याप्त है? आप ही नहीं, दुनिया भर के ट्रेडरों का अनुभव इसका जवाब नहीं में देगा। दरअसल, बाज़ार शक्तियों की पूरी मैपिंग आपके दिमाग में होनी चाहिए। पकड़ते हैं मंगलवार का ट्रेड…औरऔर भी

दिसंबर महीने के दूसरे पखवाड़े में आम लोगों के लिए ऐसे सरकारी बांड जारी कर दिए जाएंगे जिसमें बचत को महंगाई की मार से सुरक्षित रखा जा सकता है। इन बांडों का नाम है इनफ्लेशन इंडेक्स्ड नेशनल सेविंग्स सिक्यूरिटीज – क्यूमुलेटिव (आईआईएसएस-सी)। इन्हें रिजर्व बैंक केंद्र सरकार से सलाह-मशविरे के बाद लांच कर रहा है। शुक्रवार को रिजर्व बैंक ने आधिकारिक जानकारी दी कि इन्हें दिसंबर माह के दूसरे हिस्से में पेश कर दिया जाएगा। बता देंऔरऔर भी

बैंक ऑफ जापान अपने यहां मुद्रास्फीति को बढ़ाकर 2% कर देना चाहता है। इसके लिए वह नोटों की सप्लाई को दोगुना करने जा रहा है। वहां इस साल फरवरी में मुद्रास्फीति की दर बढ़ने के बजाय 0.70% घटी है। वह भी तब, जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं, रहने के खर्च, परिवहन व संचार और संस्कृति व मनोरंजन का भार 71.5% (25 + 21 + 14 +11.5) है, जबकि ईंधन, बिजली व पानी का 7%, मेडिकलऔरऔर भी

मुद्रास्फीति की दर जनवरी में उम्मीद से कुछ ज्यादा ही घटकर 6.55 फीसदी पर आ गई है। यह थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित सकल मुद्रास्फीति का नवंबर 2009 के बाद का सबसे निचला स्तर है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में आर्थिक विकास दर के त्वरित अनुमान के घटकर 6.9 फीसदी रह जाने और मुद्रास्फीति के काफी हद तक काबू में आ जाने के बाद रिजर्व बैंक पर इस बार का दबाव बढ़ जाएगा कि वह ब्याज दरोंऔरऔर भी

पहले औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों ने खुशखबरी दी कि नवंबर में यह 5.9 फीसदी बढ़ गया है। फिर दिसंबर की मुद्रास्फीति ने साफ कर दिया कि करीब दो साल से अर्थव्यवस्था के सीने पर धमधम करता बोझ हल्का पड़ गया है। सोमवार को वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक सकल मुद्रास्फीति की दर दिसंबर 2011 में 7.47 फीसदी रही है। इससे पिछले महीने नवबंर में यह 9.11 फीसदी थी औरऔरऔर भी

इस समय जो-जो चीजें किसानों के पास बहुतायत में हैं, उन सभी की कीमत में भारी गिरावट के कारण खाद्य मुद्रास्फीति की दर शून्य से नीचे पहुंच गई है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 24 दिसंबर 2011 को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्यों पर आधारिक खाद्य मुद्रास्फीति की दर (-) 3.36 फीसदी रही है। लेकिन किसानों के पास जो चीजें नहीं हैं, मसलन दूध, फल, दाल व मांस-मछली व अंडे, उनऔरऔर भी

आपको याद होगा कि ठीक एक हफ्ते पहले 15 दिसंबर को वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने दावा किया था कि जनवरी के पहले हफ्ते तक खाद्य मुद्रास्फीति तीन फीसदी से नीचे आ जाएगी। लेकिन ये तो कमाल ही हो गया! दिसंबर के दूसरे हफ्ते में ही यह दो फीसदी से नीचे आ गई। गुरुवार को वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, 10 दिसंबर को खत्म हफ्ते में खाद्य मुद्रास्फीति कीऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति की दर 39 महीनों के न्यूनतम स्तर पर आ गई है। गुरुवार को आए इन आंकड़ों से वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी इतने उत्साहित हुए कि उन्होंने संसद में महंगाई पर बहस में विपक्ष को ललकारते हुए दावा किया कि गेहूं, चावल व दाल समेत विभिन्न खाद्य वस्तुओं की कीमतें दो साल पहले की तुलना में कम हुई हैं। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य मुद्रास्फीति की दरऔरऔर भी

पिछले 52 हफ्तों की खाद्य मुद्रास्फीति का औसत भले ही 10.52 फीसदी हो, लेकिन सरकार के लिए सुकून की बात है कि इसकी दर 19 नवंबर को खत्म सप्ताह में ठीक 8 फीसदी पर आ गई है। इससे पिछले हफ्ते खाद्य वस्तुओं के थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित यह दर 9.03 फीसदी थी। मुद्रास्फीति को अभी के हफ्ते के थोक मूल्य सूचकांक और साल पहले के हफ्ते के थोक मूल्य सूचकांक के अंतर के प्रतिशत के रूपऔरऔर भी

सरकार के लिए थोड़े सुकून की बात की है कि 12 नवंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति की दर दहाई अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 9.01 फीसदी पर आ गई। यह पिछले नौ हफ्तों का न्यूनतम स्तर है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इन आंकड़ों के जारी होने के बाद कहा कि अगर खाद्य वस्तुओं के दाम में गिरावट का यही रुख रहा तो मुद्रास्फीति में कमी आ सकती है। वित्त मंत्री के शब्दों में,औरऔर भी