लो! आ ही गए महंगाई को मात देनेवाले बांड

दिसंबर महीने के दूसरे पखवाड़े में आम लोगों के लिए ऐसे सरकारी बांड जारी कर दिए जाएंगे जिसमें बचत को महंगाई की मार से सुरक्षित रखा जा सकता है। इन बांडों का नाम है इनफ्लेशन इंडेक्स्ड नेशनल सेविंग्स सिक्यूरिटीज – क्यूमुलेटिव (आईआईएसएस-सी)। इन्हें रिजर्व बैंक केंद्र सरकार से सलाह-मशविरे के बाद लांच कर रहा है। शुक्रवार को रिजर्व बैंक ने आधिकारिक जानकारी दी कि इन्हें दिसंबर माह के दूसरे हिस्से में पेश कर दिया जाएगा।

बता दें कि मुद्रास्फीति के असर को खत्म करनेवाले बांड जारी करने की घोषणा वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने चालू वित्त वर्ष 2013-14 के बजट भाषण में की थी। इन्हें सबसे पहले बड़े निवेशकों के लिए पेश किया गया और इन्हें थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति से जोड़ा गया। ऐसे बांडों की अब तक दो किश्तें जारी की जा चुकी हैं। पहली 4 जून को और दूसरी 26 नवंबर को। इन बांडों से इस साल सरकार का लक्ष्य अधिकतम 15,000 करोड़ रुपए का उधार जुटाना है।

लेकिन जहां पहले के बांड सभी तरह के निवेशकों के लिए थे, वहीं नए बांड केवल रिटेल निवेशकों के लिए हैं। पहले के बांड थोक मुद्रास्फीति से असर को खत्म करने के लिए थे, जबकि नए बांड उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित रिटेल मुद्रास्फीति को बेअसर करने के लिए हैं। दोनों तरह की मुद्रास्फीति में काफी फासला रहता है। जैसे, अक्टूबर में थोक मुद्रास्फीति 7 फीसदी रही है, जबकि रिटेल मुद्रास्फीति की दर 10.09 फीसदी दर्ज की गी है। जाहिर है कि रिटेल मुद्रास्फीति से जुड़े बांडों निवेशकों को ज्यादा राहत देंगे।

इन्हें रिटेल मुद्रास्फीति से जोड़ने का फैसला रिजर्व बैंक के नए गवर्नर रघुराम राजन का है। थोक मुद्रास्फीति पर आधारित बांडों में जहां स्थिर ब्याज की दर 1.44 फीसदी रखी गई थी, वहीं रिटेल मुद्रास्फीति से जुड़े बांडों पर ब्याज दर 1.50 फीसदी तय की गई है। इनफ्लेशन इंडेक्स्ड नेशनल सेविंग्स सिक्यूरिटीज नाम के नए बांड में कोई भी निवेश कर सकता है। कम से कम निवेशक 5000 रुपए और ज्यादा से ज्यादा निवेश पांच लाख रुपए का किया जा सकता है। बांड दस साल में परिपक्व होंगे।

इन बांडों पर हर छह महीने पर ब्याज निकाला जाएगा और उसे मूलधन में जोड़ दिया जाएगा। ब्याज की गणना यूं की जाएगी कि सीपीआई पर आधारित ब्याज दर को मूलधन में जोड़ दिया जाएगा। फिर उसके ऊपर 1.50 फीसदी ब्याज दिया जाएगा। इस तरह इन बांडों में निवेशक को हमेशा रिटेल मुद्रास्फीति से कम से कम 1.50 फीसदी ज्यादा ब्याज मिलेगा। रिटेल मुद्रास्फीति की दर तीन महीने पहले की ली जाएगी। जैसे दिसंबर 2013 में रिटेल मुद्रास्फीति सितंबर 2013 की गिनी जाएगी। अभी तक के थोक मुद्रास्फीति से जुड़े बांडों पर मुद्रास्फीति चार महीने की ली जाती रही है।

अगर कोई रिटेल निवेशक दस साल तक धन न निकाले, तभी उसे इन बांडों का भरपूर लाभ मिलेगा। हालांकि वो चाहे तो बीच में भी धन निकाल सकता है। 65 साल या उससे ऊपर के निवेशक एक साल बाद और बाकी निवेशक तीन साल के बाद अपना धन निकाल सकते हैं। लेकिन उन्हें ठीक पिछले छह महीने के ब्याज का आधा हिस्सा बतौर पेनाल्टी चुकाना पड़ेगा।

Inflation Indexed National Savings Securities-Cumulative (IINSS-C) नाम के इन बांडों की सबसे बड़ी खामी यह है कि इस पर निवेशक को अपनी आय के हिसाब से इनकम टैक्स देना होगा। सवाल उठता है कि जब कोई शख्स महंगाई यानी एक तरह के टैक्स के असर को खत्म करने के लिए इन बांडों में निवेश कर रहा है तो उससे सरकार दोबारा टैक्स क्यों ले रही है? वैसे, ये बांड सरकार द्वारा आम आदमी से उधार लेने का एक माध्यम हैं। इन बांडों को आप अपने बैंक से खरीद सकते हैं। इसके अलावा स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसएचसीआईएल) की तरफ से भी इनकी बिक्री की जाएगी।

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