देश में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 11 जून को समाप्त हुए सप्ताह में बढ़कर 9.13% पर पहुंच गई। यह ढाई महीने का उच्च स्तर है। फल, दूध, प्याज और प्रोटीन-युक्त वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ी है। इससे पिछले सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति 8.96% थी। वहीं साल भर पहले जून, 2010 के दूसरे सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति की दर करीब 23 फीसदी थी। 26 मार्च, 2011 को समाप्त हुए सप्ताहऔरऔर भी

हमारे नीति-नियामक कितने मतिअंध हैं, इसका प्रमाण पेश कर दिया मंगलवार को जारी मई माह की मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने। तीन दिन पहले ही वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु कह रहे थे कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर मई में 8.6 फीसदी रह सकती है जो अप्रैल माह के 8.66 फीसदी से कम होगी। लेकिन वास्तव में यह आंकड़ा 9.06 फीसदी का निकला है। सवाल उठता है कि क्या इतने खासऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी महंगाई की दर में मामूली गिरावट से भी उत्साहित हैं। उन्होंने भरोसा जताया है कि आनेवाले महीनों में मुद्रास्फीति और नीचे आएगी। उनका मानना है कि खाद्यान्नों के स्टॉक में बढ़ोतरी और मैन्यूफैक्चर्ड वस्तुओं की लागत घटने से महंगाई और घटेगी। मुखर्जी ने सोमवार को राजधानी दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, ‘‘अप्रैल में मैन्यूफैक्चर्ड वस्तुओं व खाद्य वस्तुओं, दोनों के दाम में गिरावट आई है। यह एक अच्छा रुख है।औरऔर भी

सब्जियों और कुछ दालों के दाम नीचे आने से 30 अप्रैल 2011 को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति की दर हफ्ते भर पहले की तुलना में 0.83 फीसदी घटकर 7.70 प्रतिशत रह गई। यह पिछले 18 महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति का न्यूनतम स्तर है। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति एक हफ्ते पहले 8.53 फीसदी रही थी। यह लगातार दूसरा सप्ताह रहा है जब खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज की गई। एक साल पहले इसी सप्ताहऔरऔर भी