श्री रेणुका शुगर्स में निवेश करने की सलाह सात-आठ महीने पहले शुरू हो गई थी। अक्टूबर से दिसंबर 2010 के बीच सभी ललकार कर कहते हैं कि इसे खरीद लो, इसमें अच्छा रिटर्न मिलेगा। लेकिन तब यह शेयर बहुत बेहतर स्थिति में था। नवंबर में 108.15 रुपए तक चला गया जो 52 हफ्ते का उसका उच्चतम स्तर है। जनवरी में उसका सर्वोच्च स्तर 101.50 रुपए रहा। लेकिन अजीब बात है कि जो शेयर अक्टूबर से दिसंबर-जनवरी तकऔरऔर भी

अनजाने में चूक हो जाए तो समझ में आता है। लेकिन सब कुछ जानते-बूझते हुए भी गलती हो जाए तो वह अनायास नहीं होती, उसके पीछे कोई न कोई स्वार्थ होता है। जानते हैं कि हमारे शेयर बाजार में कंपनियों की मजबूती जानने के बाद भी उनके शेयर क्यों पिटते रहते हैं? इसलिए यहां निवेशक नहीं, ट्रेडरों की बहुतायत है। हर्षद मेहता के समय 1991-92 में रिटेल निवेशकों की संख्या दो करोड़ से ज्यादा थी। आज इधर-उधरऔरऔर भी

मानसून अच्छा है। समय पर है। इसलिए खेती-किसानी की हालत बेहतर रहेगी। बहुत साफ-सी बात है कि इसी के अनुरूप खाद व उर्वरक की मांग भी बढ़ेगी। इससे उर्वरक कंपनियों का धंधा चमकेगा। धंधा चमकेगा तो उनके शेयर भी चमकेंगे। लेकिन दिक्कत यह है कि उर्वरक कंपनियों में जब भी निवेश की बात आती है तो लोग आमतौर पर नागार्जुन फर्टिलाइजर्स और चंबल फर्टिलाइजर्स की ही चर्चा करते हैं। नागार्जुन फर्टिलाइजर्स के बारे में सालों-साल से चर्चाऔरऔर भी

मैंने सुना और अखबारों में पढ़ा भी कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) दोनों ही छोटी व मध्यम आकार की कंपनियों के लिए जल्दी ही अलग एसएमई एक्सचेंज शुरू करने जा रहे हैं। इस एक्सचेंज को लेकर बहुत सारे ट्रेडर और निवेशक काफी उत्साहित हैं। छोटी कंपनियों के आईपीओ में अमूमन कॉरपोरेट गवर्नेंस का स्तर अच्छा नहीं होता। ऐसे ज्यादातर आईपीओ खुलने से पहले ही बिक जाते हैं। आईपीओ की लिस्टिंग पर भावऔरऔर भी

महाराजा श्री उम्मेद मिल्स का शेयर पिछले चार कारोबारी सत्रों से कुलांचे मार रहा है। 2 जून, गुरुवार को उसका 10 रुपए अंकित मूल्य का शेयर 425.40 रुपए पर बंद हुआ था। 3 जून, शुक्रवार को यह 6.21 फीसदी बढ़कर 451.80 रुपए पर बंद हुआ। सोमवार को खुला 460 रुपए पर। लेकिन बंद हुआ 496.75 रुपए तक उठने के बाद 7.12 फीसदी बढ़कर 483.95 रुपए पर है। कल, 7 जून को तो उसने 511.05 रुपए पर नयाऔरऔर भी

कल क्या होगा, इसे ठीक-ठीक न आप बता सकते हैं, न मैं और न ही कोई और। हम कल के बारे में इतना ही जानते हैं जितना आज तक की योजनाएं हमें बताती हैं। अगर योजनाएं दुरुस्त हैं, उनमें दम है तो कल सुनहरा हो सकता है। नहीं तो कल आज से भी बदतर हो सकता है। कंपनियों पर भी यह बात लागू होती है। देश में निजी क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी मरकेटर लाइंसऔरऔर भी

यश बिड़ला की कंपनी बिड़ला श्लोका एजुटेक और उसके शेयर दोनों की हालत इस समय खराब चल रही है। पिछले महीने 20 मई को घोषित नतीजों के मुताबिक वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी की आय 179.80 करोड़ रुपए से 3.23 फीसदी बढ़कर 185.60 करोड़ रुपए हो गई, लेकिन शुद्ध लाभ 5.01 करोड़ रुपए से 9.18 फीसदी घटकर 4.55 करोड़ रुपए रह गया। कंपनी का शेयर केवल बीएसई (कोड – 511607) में लिस्टेड है। पहले अहमदाबाद स्टॉक एक्सचेंजऔरऔर भी

साल के साथ साल का संयोग देखने में बना मजा आता है। ठीक साल भर पहले 3 जून 2010 को बैद ग्लोबल वेंचर्स का शेयर 45.70 रुपए पर 52 हफ्ते की तलहटी पकड़े हुए था। अब 186.85 रुपए पर है। इस साल भर के दौरान कंपनी में बहुत कुछ बदल चुका है। पहले इसका मालिक कोई और था, अब कोई और है। पहले इसका नाम लिविंग रूम लाइफस्टाइल लिमिटेड था, फिर चिसेल एंड हैमर (मोबेल) लिमिटेड हुआऔरऔर भी

हमारे शेयर बाजार में वेलस्पन नाम की पांच कंपनियां लिस्टेड हैं – वेलस्पन कॉर्प, वेलस्पन इंडिया, वेलस्पन इनवेस्टमेंट्स, वेलस्पन प्रोजेक्ट्स और वेलस्पन सिन्टेक्स। ये सारी की सारी एक ही समूह की कंपनियां है और इनके सामूहिक चेयरमैन बाल कृष्ण गोयनका हैं। आज यहां हम बात कर रहे हैं वेलस्पन कॉर्प की। यह बड़े व्यास की लंबी-लंबी पाइप बनानेवाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है। भारत ही नहीं, दुनिया भर की तमाम पाइपलाइन परियोजनाओं को इसनेऔरऔर भी

महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज या छोटे में कहें तो महिंद्रा फाइनेंस का फोकस ग्रामीण व अर्धशहरी इलाकों पर है। वह बैंकों और माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं के बीच की चीज है। नई-पुरानी ट्रक, जीप, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल व कार के लिए लोन से लेकर घर बनाने और शादी, इलाज व बच्चों की पढ़ाई के लिए भी कर्ज देती है। गावों के करीब 10 लाख लोगों को अपना ग्राहक बना चुकी है। कंपनी की कई सब्सिडियरी इकाइयां भी हैं।औरऔर भी