यूं तो हर मां को अपना काना बेटा भी सबसे खूबसूरत लगता है। लेकिन प्रवर्तक को अपनी कंपनी के बारे में ऐसा कोई भ्रम नहीं होता। असल में, प्रवर्तक से ज्यादा अपनी कंपनी की सही औकात कोई नहीं समझता। वह अंदर की सूचनाओं के आधार पर कोई खेल न कर दे, इसीलिए इनसाइडर ट्रेडिंग का नियम बना हुआ है। इसलिए प्रवर्तक अपनी कंपनी के शेयर जिस भाव पर खुद खरीद रहे हों या किसी और को बेचऔरऔर भी

दुनिया नाम के पीछे भागती है और दुनिया जिसके पीछे भागती है उसके दाम अपने-आप ही बढ़ जाते हैं, उसकी स्टार-वैल्यू बन जाती है। बेहतर एक्टर होने के बावजूद मनोज बाजपेयी को पान मसाला बेचना पड़ता है और औसत एक्ट्रेस होने के बावजूद प्रियंका चोपड़ा हर तरफ मटकती रहती हैं। आम जीवन का यह सूत्र शेयर बाजार पर भी लागू होता है। लेकिन हमारे बाजार में इसका उल्टा भी चलता है। लोग जिसके पीछे पड़ जाएं, उसेऔरऔर भी

लोग कहे जा रहे हैं, कहे जा रहे हैं, लेकिन नुस्ली वाडिया की ऐतिहासिक कंपनी बॉम्बे डाईंग का शेयर मरा जा रहा है तो मरा ही जा रहा है। हमारे चक्री महाशय तो बॉम्बे डाईंग को लेकर लंबे समय से बुलिश हैं। 21 दिसंबर 2010 को उन्होंने लिखा था कि यह नए साल का ब्लॉक बस्टर साबित होगा और दिसंबर 2011 तक चार अंकों में पहुंच जाएगा। यूं तो वे 31 मार्च 2010 से ही इसे तबऔरऔर भी

एडीएफ फूड्स छोटी-सी कंपनी है। 20.38 करोड़ रुपए की पूंजी है जो दस रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में बंटी है। बाजार पूंजीकरण कोई खास नहीं, 126 करोड़ रुपए है। इसलिए स्मॉल कैप में गिनी जाती है। लेकिन काम जबरदस्त करती है। भारतीय स्वाद की मास्टर है। अचार, चटनी व मसालों से लेकर फ्रोजन फूड तक बनाकर निर्यात करती है। अशोका, कैमल, एयरोप्लेन, खानखामा, ट्रूली इंडियन और सोल इसके ब्रांड हैं। 95 फीसदी कमाई मध्य-पूर्व, अमेरिका, यूरोपऔरऔर भी

यूं एक ही दिन में किसी शेयर का आधे से भी कम भाव पर आ जाना अकारण नहीं होता। अगर 7 जनवरी 2009 को सत्यम कंप्यूटर का शेयर 84 फीसदी गिरकर 188.70 रुपए से 30.70 रुपए पर आया था तो इसलिए कि उसी दिन रामालिंगा राजू ने कंपनी में किए गए फ्रॉड की घोषणा की थी। लेकिन 20 जून 2011 को जीटीएल के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था कि उसका शेयर 339.90 रुपए से 63.5औरऔर भी

ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (टीसीआई) माल की ढुलाई ही नहीं करती, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स सेवाएं भी मुहैया कराती है। 1958 में शुरुआत कोलकाता में एक ट्रक से की थी। अब दुनिया के 12 देशों तक पहुंच चुकी है। भारत में लॉजिस्टिक्स उद्योग की सबसे बड़ी कंपनी है। दावा है कि वह देश के कुल जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 2.5 फीसदी अकेले इधर से उधर करती है। फिलहाल ताजा घोषित नतीजों के अनुसार उसने वित्त वर्षऔरऔर भी

यकीनन, आप भी इस बात से इत्तेफाक करेंगे कि शेयर बाजार से पैसे कमाने का आदर्श तरीका है – सबसे कम भाव पर खरीदो और अधिकतम भाव पर बेचकर निकल जाओ। लेकिन व्यवहार में ऐसा हो नहीं पाता क्योंकि जब कोई शेयर अपने न्यूनतम स्तर पर होता है तब हमें लगता है कि यह तो डूब रहा है, अभी और नीचे जाएगा। वहीं, जब शेयर बढ़ रहा होता है तब हमें लगता है कि अभी और ऊपरऔरऔर भी

करीब दस महीने हमने इसी कॉलम में आईसीआईसीआई सिक्यूटिरीज की रिसर्च रिपोर्ट के हवाले 11 अगस्त को लिखा था कि जीवीके पावर एंड इंफ्रस्ट्रक्चर के शेयर में 20 फीसदी बढ़त की पूरी गुंजाइश है। शेयर तब 43.80 रुपए पर था। ब्रोकरेज फर्म का आकलन था कि यह साल भर में आराम से 53-54 रुपए पर चला जाएगा। हालांकि वो महीने भर में 13 सितंबर 2010 को 51.45 रुपए के शिखर तक चला गया। लेकिन उसके बाद ऐसाऔरऔर भी

मछली को पकड़ने चलो और वो हाथ से सरक कर भाग जाए। कुछ ऐसा ही हाल ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज का है। इसका शेयर 10 मई 2011 को 324 रुपए का न्यूनतम स्तर पकड़ने के बाद परसों 13 जून तक 37.56 फीसदी बढ़कर 445.70 रुपए चुका था। जैसे ही इसे पकड़ने का ख्याल दिमाग में आया कि कल यह फिर 5.42 फीसदी उछलकर 469.85 रुपए पर जा पहुंचा। इस तरह 10 मई से 13 जून के बीच यह शेयरऔरऔर भी

यह खबर का ही प्रताप है कि कल जब बाजार एकदम फ्लैट रहा, तब भी अतुल ऑटो का शेयर 6.45 फीसदी बढ़कर बंद हुआ। हालांकि दिन में यह 7.91 फीसदी तक बढ़कर 133.05 रुपए पर पहुंच गया था। लेकिन बंद हुआ 131.25 रुपए पर। यह भी अजब संयोग है कि ठीक साल भर पहले आज ही के दिन 14 जून 2010 को अतुल ऑटो का शेयर अपने न्यूनतम स्तर 70.05 रुपए पर था। मान लें कि किसीऔरऔर भी