भारत तमाम गलत व खोखली नीतियों के बावजूद अगर कई सालों से दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है तो मूल वजह इसकी अंतर्निहित सामर्थ्य है। इसलिए यहां शेयर बाज़ार में लम्बे समय का निवेश आनेवाले कई दशकों तक लाभदायी होगा। लेकिन निवेश का पूरा फल पाने के लिए हमें पांच अहम पहलुओं पर गौर करना होता है। पहला, बढ़ती अर्थव्यवस्था में कौन-से उद्योग व सेवा क्षेत्र हैं जो अधिक तेज़ी से बढ़ रहे हैं। दूसरा, ऐसे सेक्टर की कौन-सी कंपनियां हैं जिनके शेयर भरपूर संभावनाओं के बावजूद निवेशकों के निगाह में अभी तक चढ़े नहीं है और दबे हुए पड़े हैं। तीसरे, इन्हें किन भावों पर पकड़ना सबसे सही हो सकता है। चौथा, कब इन्हें बेचकर निकल लेना चाहिए। वैसे तो हम जैसे आम या रिटेल निवेशकों को ऐसी ही कंपनियों के शेयर खरीदने चाहिए जो हमेशा के लिए हों। लेकिन आज के तेज़ी से बदलते दौर में हो रही ऊंच-नीच सारे समीकरण बिगाड़ सकती है। इसलिए किसी स्टॉक से बहुत ज्यादा चिपके रहने का कोई मतलब नहीं। पांचवा व अंतिम चरण बड़ा अहम है। इसमें हम देखते हैं कि अपनी रिस्क सीमा के भीतर किसी स्टॉक में निवेशयोग्य धन का कितना हिस्सा लगाया जाए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…
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