देश में पहले मुद्रास्फीति की दो ही दरें हुआ करती थीं। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित थोक मुद्रास्फीति और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित रिटेल मुद्रास्फीति। अब इसमें एक तीसरी भी जुड़ गई है उत्पादकों के मूल्य सूचकांक (पीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति। लेकिन ये सभी बैंकिंग, कॉरपोरेट क्षेत्र और वित्तीय तंत्र के लिए मायने रखती हैं, जबकि देश के आमजन के लिए इनका कोई खास मतलब नहीं। उसके लिए तो सालों-साल से ‘महंगाई डायन खायेऔरऔर भी