सेबी के कार्यकारी निदेशक जे एन गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए गए एक इंटरव्यू में भारतीय पूंजी बाजार नियामक संस्था को अमेरिका जैसे विकसित पूंजी बाजार की नियामक संस्था से बेहतर बताया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या सेबी का भारतीय बाजार पर अमेरिका के एसईसी (सिक्यूरिटीज एक्सचेंज कमीशन) की तुलना में ज्यादा नियंत्रण है तो उनका कहना था – यकीकन। श्री गुप्ता का कहना था कि सेबी ने तमाम ऐसे उपाय करऔरऔर भी

एवीटी नेचुरल प्रोडक्ट्स का शेयर लगातार कुलांचे मार रहा है। 28 सितंबर 2010 से 28 जून 2011 के बीच के नौ महीनों में वह 88.40 रुपए के न्यूनतम स्तर से 287.90 रुपए के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। साल भर से भी कम वक्त में 225 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न! बीते जून माह में ही यह दोगुना हो गया है। एक जून को नीचे में 140.15 रुपए पर था और 28 जून को ऊपर में 287.90औरऔर भी

बीएसई सेंसेक्स में शामिल 30 शेयरों में पांच ऐसे हैं जिन्होंने चालू साल 2011 की पहली छमाही में बाजार को मात दी है। 3 जनवरी 2011 को बाजार में कारोबार के पहले दिन और छमाही के आखिरी दिन 30 जून 2011 को सेंसेक्स और इन शेयरों के बंद भाव के अंतर को देखकर साफ हो जाता है कि कैसे इन्होंने बाजार की दिशा से अलग हटकर बढ़त हासिल की है। सेंसेक्स के ये पांच पांडव है –औरऔर भी

आंध्रा शुगर्स सिर्फ चीनी नहीं बनाती। वह इसके अलावा एल्कोहल व उससे संबंधित रसायन, एस्पिरिन, क्लोरो एल्कली – सल्फ्यूरिक एसिड, सुपर फॉस्फेट व कॉस्टिक सोडा और बिजली तक बनाती है। इन सभी रसायनों से उसे फायदा हो रहा है, जबकि चीनी उसके गले का कंटक बन गई है। वित्त वर्ष 2010-11 के नतीजों के अनुसार चीनी से हुई उसका बिक्री साल भर पहले के 211.42 करोड़ रुपए से 51.75 फीसदी घटकर 102.01 करोड़ रुपए रह गई औरऔरऔर भी

कुछ कंपनियों का दायरा इतना बड़ा होता है कि स्टैंड-अलोन नतीजे उनकी पूरी स्थिति बयां नहीं करते। टाटा मोटर्स ऐसी ही एक कंपनी जिसका दायरा वाहनों के हर सेगमेंट से लेकर देश-विदेश तक फैला हुआ है। ट्रक, सेना के विशाल ट्रक, मिनी ट्रक, बस और बड़ी कार से लेकर नैनो तक। टाटा सफारी से लेकर जैगुआर और लैंड रोवर तक। इसका शेयर 6 दिसंबर 2010 को 1381.40 रुपए का शिकर पकड़ने के बाद नीचे का रुख किएऔरऔर भी

ज्ञान की बातें बाद में। पहले कुछ काम की बात। तिलकनगर इंडस्ट्रीज के बारे में जानना चाहते हैं लोग। दक्षिण भारत की इस शराब कंपनी का शेयर 20 जून को घटकर 30.50 रुपए पर आ गया। अभी शुक्रवार, 1 जुलाई को बीएसई (कोड – 507205) में 43.20 रुपए और एनएसई (कोड – TI) में 43.30 रुपए पर बंद हुआ था। बीते साल 10 नवंबर 2010 को यह शेयर 147.80 रुपए के शिखर पर था। हमने भी 24औरऔर भी

वायेथ लिमिटेड का शेयर 2 जून से 30 जून के बीच 875 रुपए से 965 रुपए पर पहुंच गया। लेकिन महीने भर में 10.28 फीसदी बढ़ जाने के बावजूद यह बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों में सबसे सस्ता शेयर है। फिलहाल 18.52 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। हालांकि नोवार्टिस का शेयर इससे भी कम 18.15 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, लेकिन वो कंपनी तो विदेशी प्रवर्तक की 76.42 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी के साथऔरऔर भी

सेटलमेंट का आखिरी दिन। निफ्टी 5600 के ऊपर डटा रहा। 5657.90 तक जाने के बाद 5634.90 पर बंद हुआ। साफ संकेत अगली बढ़त का। महीने का अंत आते-आते मैंने अपना जो लक्ष्य आपको बताया था, वह 5735 पर कायम है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और एसबीआई ने बाजार को उठने में मदद की है। हालांकि आरआईएल में अब भी बढ़त की काफी गुंजाइश बाकी है। जब तक यह 880 रुपए के नीचे नहीं जाता, तब तक इसमें रुझानऔरऔर भी

वित्त मंत्री ने वॉशिंगटन में इतना भर कहा कि इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 8.5 फीसदी रहेगी और मुंबई में हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी और कॉलगेट पामोलिव के शेयर कम से कम बीस सालों के शिखर पर पहुंच गए। इनमें सबसे ज्यादा 10.33 फीसदी की बढ़त कॉलगेट में दर्ज की गई जो 1011.10 रुपए पर जा पहुंचा। हालांकि बंद हुआ 7.75 फीसदी की बढ़त के साथ बीएसई (कोड – 500830) में 987.50 रुपए और एनएसई (कोडऔरऔर भी

धूमिल की मशहूर कविता है – एक आदमी रोटी बेलता है। एक आदमी रोटी खाता है। एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है। वह सिर्फ़ रोटी से खेलता है। थोड़े भिन्न अर्थ में कुछ यही अंदाज है पीटीसी इंडिया का। वह न बिजली बनाती है, न खुद बिजली सोखती है। वह सिर्फ बिजली से खेलती है, उसका व्यापार करती है। तार पर बहने और बैटरी में रखी जानेवाली अमूर्त चीजऔरऔर भी