सही रहेगा टाटा मोटर्स को पकड़ना

कुछ कंपनियों का दायरा इतना बड़ा होता है कि स्टैंड-अलोन नतीजे उनकी पूरी स्थिति बयां नहीं करते। टाटा मोटर्स ऐसी ही एक कंपनी जिसका दायरा वाहनों के हर सेगमेंट से लेकर देश-विदेश तक फैला हुआ है। ट्रक, सेना के विशाल ट्रक, मिनी ट्रक, बस और बड़ी कार से लेकर नैनो तक। टाटा सफारी से लेकर जैगुआर और लैंड रोवर तक। इसका शेयर 6 दिसंबर 2010 को 1381.40 रुपए का शिकर पकड़ने के बाद नीचे का रुख किए हुए है।

26 मई को उसने वित्त वर्ष 2010-11 के नतीजे घोषित किए थे। तब 1161.25 रुपए पर था। अब बीते शुक्रवार 1 जुलाई को बीएसई (कोड – 500570) में 994.50 रुपए और एनएसई (कोड – TATAMOTORS) 994.70 रुपए पर बंद हुआ है। इस दौरान 20 जून को यह नीचे में 925 रुपए तक चला गया। वैसे, उसका 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर 748.55 रुपए का है जो उसने साल भर पहले 7 जुलाई 2010 को हासिल किया था। तब कंपनी विदेशी अधिग्रहण के ऋण व घाटे के नकारात्मक असर में थी। इस बार गिरावट की खास वजह है कि कंपनी ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में उसने 62 करोड़ रुपए का एडवांस टैक्स भरा है, जो पिछले साल की समान तिमाही में जमा कराए गए 65 करोड़ रुपए के टैक्स से 4.6 फीसदी कम है।

कंपनी जल्दी ही पहली तिमाही के नतीजे घोषित करनेवाली है। सच्चाई सामने आ जाएगी। थोड़ा-बहुत इधर-उधर हो सकता है। लेकिन उसकी विजय-यात्रा जारी है और जारी रहेगी, इसमें कोई शक नहीं है। सिंगूर की जमीन पर कंपनी ममता बनर्जी से अदालत में भिड़ी हुई है। चित या पट, जीत टाटा समूह की ही होनी है। इसलिए सेंसेक्स से लेकर निफ्टी तक में शामिल यह शेयर इस समय निवेश का अच्छा मौका दे रहा है। स्टैंड-अलोन आधार पर यह थोड़ा महंगा लगता है क्योंकि वित्त वर्ष 2010-11 में इसका ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) पिछले साल के 42.37 रुपए से घटकर 30.28 रुपए पर आ गया है। लेकिन इसी दौरान कंसोलिडेटेड आधार पर कंपनी का ईपीएस 48.64 रुपए से बढ़कर 155.25 रुपए हो गया है।

इस तरह स्टैंड-अलोन आधार पर कंपनी का शेयर इस समय जहां 32.84 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, वहां कंसोलिडेटेड नतीजों के आधार पर मात्र 6.41 पर। वाहनों के क्षेत्र की इतनी पुख्ता व व्यापक आधार वाली कंपनी का शेयर इससे सस्ते में नहीं मिल सकता। अभी निवेशकों के बीच ऑटो में मारुति सुजुकी को सर्वोत्तम माना जाता है। लेकिन अगर हम बाजार के हर हिस्से में टाटा मोटर्स के दखल को देखें तो वह दूरगामी तौर पर मारुति से बहुत-बहुत आगे है। मारुति इस समय 13.9 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। यहां तक अशोक लेलैंड भी टाटा मोटर्स से ज्यादा 11 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है।

कंपनी इतनी विख्यात है कि उसके बारे में ज्यादा बताने की जरूरत नहीं है। बाकी जानकारी आप उसकी वेबसाइट से हासिल कर सकते हैं। नया कुछ होगा तो कंपनी सार्वजनिक घोषणा कर ही देती है। इस मायने में वह काफी पारदर्शी है। बाकी, दूरगामी निवेश के लिए अंदर की खबरों का खास महत्व नहीं होता। हो सकता है कि पहली तिमाही में टाटा मोटर्स के नतीजे थोड़ा दबे रहें। लेकिन इस शेयर में इस मौके पर किया गया निवेश फलदायी होगा। रिटर्न कितना हो सकता है? साल भर में कम से कम 20 फीसदी मानकर चलिए। हां, यह शेयर जल्दी ही दस रुपए अंकित मूल्य से दो रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में बंटनेवाला है। फैसला हो चुका है। शेयरधारकों का अनुमोदन बाकी है।

कंपनी के 34.83 फीसदी शेयर प्रवर्तकों, 23.60 फीसदी एफआईआई, 12.93 फीसदी डीआईआई और 28.64 फीसदी अन्य के पास हैं। उसके शेयरधारकों की कुल संख्या 3,33,176 है। कंपनी की इक्विटी पूंजी 637.71 करोड़ रुपए है जो फिलहाल दस रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में बंटी है। इस साल के लिए उसने 20 रुपए (200 फीसदी) का लाभांश घोषित किया है। इसकी रिकॉर्ड तिथि 21 जुलाई है। कंपनी के पास अभी 19,351.40 करोड़ रुपए के रिजर्व हैं और उसकी प्रति शेयर बुक वैल्यू 314.91 रुपए है।

आखिर में चलते-चलते एक सलाह। आज डीसीएम लिमिटेड (बीएसई कोड – 502820, एनएसई कोड – DCM) पर नजर रखिएगा। कुछ फंड हाउस लाभांश पकड़ने या डिविडेंट स्ट्रिपिंग के लिए फिलहाल इसे खरीद रहे हैं। तीन फंडों के पास इसके काफी शेयर हैं। ईपीएस 16 रुपए है। बुक वैल्यू 91 रुपए है। शुक्रवार को यह 6.16 फीसदी बढ़कर 87 रुपए पर बंद हुआ है। हमने इसके बारे में 24 अगस्त 2010 को इसी कॉलम में लिखा था। तब यह 101.80 रुपए पर था। 5 नवंबर 2010 को बढ़कर 170 रुपए पर चला गया। लेकिन उसके बाद से दबा हुआ है।

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