एवीटी नेचुरल में अस्वाभाविक तेजी

एवीटी नेचुरल प्रोडक्ट्स का शेयर लगातार कुलांचे मार रहा है। 28 सितंबर 2010 से 28 जून 2011 के बीच के नौ महीनों में वह 88.40 रुपए के न्यूनतम स्तर से 287.90 रुपए के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। साल भर से भी कम वक्त में 225 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न! बीते जून माह में ही यह दोगुना हो गया है। एक जून को नीचे में 140.15 रुपए पर था और 28 जून को ऊपर में 287.90 तक जा पहुंचा। फिलहाल उसका दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर कल, 5 जुलाई को बीएसई (कोड – 519105) में 269.10 और एनएसई (कोड – AVTNPL) में 268.55 रुपए पर बंद हुआ है।

आखिर ऐसा क्या हो गया जो इस शेयर में बाजार को अचानक मूल्य नजर आ गया? साल भर पहले जो शेयर 10-11 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा था, वह अचानक 30-34 पी/ई पर कैसे ट्रेड होने लगा? क्यों यह महीने भर में ही दोगुना हो गया? इसमें कोई दो राय नहीं कि कंपनी अच्छी, मजबूत और संभावनामय है। 1994 में बनी कोच्चि (केरल) की कंपनी है। परिष्कृत खेती और फसलों के बेहद मूल्य-वर्धित उत्पाद बनाने का काम करती है। गेंदे के फूल से ओलियोरेजिन बनाती है। कोच्चि को दुनिया में मसालों की राजधानी माना जाता है तो कंपनी मसालों के भी ओलियोरेजिन बनाती है। चाय, कॉफी, रबर व मसालों के प्लांटेशन में सक्रिय ए वी थॉमस समूह से ताल्लुक रखती है। उच्च श्रेणी की चाय भी बनाती है। कुछ नई फसलों की भी खेती में उतरने का इरादा है।

गेंदे की खेती उसने 200 एकड़ से शुरू की थी। अब वह 35,000 एकड़ में गेंदा उगाती है और एक लाख टन फूल पैदा कर रही है। वह गेंदे के फूल के ओलियोरेजिन की सबसे बड़ी निर्यातक है। साथ ही वनीला बीन्स भी निर्यात करती है। वह तमिलनाडु व कर्नाटक में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए भी फसलें उगाती है। खर्च न बढ़े और उपज खराब न हो, इसके लिए उसने नजदीक में ही प्रोसेसिंग केंद्र बना रखे हैं। उसके छह उत्पादन संयंत्र हैं। इनमें से दो संयंत्र कर्नाटक, एक तमिलनाडु, एक आंध्र प्रदेश, एक मध्य प्रदेश और एक संयंत्र केरल में है। कंपनी की अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी के जरिए सिंगापुर से चीन तक पहुंची हुई है। जाहिर है कि उत्पादन से लेकर बाजार तक पहुंचने की व्यवस्था कंपनी ने बड़े करीने से कर रखी है।

बढ़ भी तेजी से रही है। पिछली पांच तिमाहियों में उसकी बिक्री औसतन 55 फीसदी और परिचालन लाभ 40 फीसदी की दर से बढ़ा है। मार्च 2011 तिमाही में तो उसकी बिक्री 119 फीसदी और परिचालन लाभ 65 फीसदी बढ़ा है, जबूकि शुद्ध लाभ 71 फीसदी बढ़ा है। पूरे वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी ने 138.41 करोड़ रुपए की बिक्री पर 10.69 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। साल भर पहले से उसकी बिक्री 66.82 फीसदी और शुद्ध लाभ 63.96 फीसदी ज्यादा है। 29 अप्रैल को इन नतीजों के सामने आने के बाद उसका शेयर बढ़ने लगा। महीने भर में 126 से 157 रुपए पर पहुंच गया और फिर अगले एक महीने में 287 रुपए तक।

कंपनी का सालाना ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 14.05 रुपए है। इस तरह उसका शेयर अभी 19.11 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। शेयर का बाजार भाव उसकी बुक वैल्यू 75.97 रुपए का 3.54 गुना है। यानी, फिलहाल महंगा है। असल में यह शेयर एक जुनून के दौर से गुजरा है। पिछले महीने किसी-किसी दिन एऩएसई-बीएसई मिलाकर इसके दस लाख से ज्यादा शेयरों के सौदे हुए। अब यह जुनून धीरे-धीरे उतर रहा है। वोल्यूम घटकर 25,000 शेयरों से नीचे आ चुका है। हमें इस जुनून के पूरी तरह उतरने का इंतजार करना चाहिए। जब यह शेयर दोबारा 160-170 की रेंज में आ जाए तो इसे लंबी अवधि के लिए खरीद लेना चाहिए।

कंपनी यूं तो छोटी है। 204 करोड़ रुपए के बाजार पूंजीकरण के साथ इसे स्मॉल कैप माना जाएगा। लघु उद्योग क्षेत्र (एसएमई) में गिनी जाती है। लेकिन इसमें संभावनाएं बहुत व्यापक हैं। कंपनी की इक्विटी मात्र 7.61 करोड़ रुपए है जिसका 30.40 फीसदी पब्लिक और बाकी 69.60 फीसदी प्रवर्तकों के पास है। पब्लिक के हिस्से में से महज 0.03 फीसदी डीआईआई के पास हैं। एफआईआई इसमें नहीं हैं। कंपनी के कुल शेयरधारकों की संख्या 5037 है। इनमें से महज 12 शेयरधारक ऐसे हैं जिनका निवेश एक लाख रुपए से ज्यादा है।

अंत में कल घोषित नव भारत वेंचर्स (बीएसई – 513023, एनएसई – NBVENTURES) की बात। हमने इस शेयर के बारे में पहली बार जब 30 नवंबर 2010 को लिखा था, तब यह 302 रुपए था और वह 5.33 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा था। अब 5 जुलाई 2011 तक घटकर 216.90 रुपए पर आ चुका है और 5.56 के पी/ई पर ट्रेड हो रहा है। कल लगा था कि इसमें तात्कालिक निवेश से फायदा हो सकता है। लेकिन गौर किया तो पाया कि पिछले दो सालों में इसका इसका पी/ई अनुपात कभी 8 के ऊपर गया ही नहीं है। इसलिए बहुत लंबी सोच और धैर्य वाले लोगों को ही इसमें हाथ डालना चाहिए।

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