मोदी सरकार ने भारत की विकासगाथा को खिलने से पहले ही कैसे कुचलकर मसल दिया है, उसके कुछ पुख्ता प्रमाण। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य रह चुके जाने-माने अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला कहते हैं कि 2013 में भारत को दुनिया की पांच फ्रेज़ाइल या भंगुर अर्थव्यवस्थाओं में गिना गया था। बाकी देश थे – इंडोनेशिया, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका और तुर्किए। लेकिन आज दुनिया में केवल दो भंगुर अर्थव्यवस्थाएं बची हैं। एक है भारत और दूसरी है तुर्किए। अपने आधे से भी कम आकार की अर्थव्यवस्था वाले तुर्किए की पांत में खड़ा होना भारत के लिए बेहद शर्मनाक है। यह भारत की विकासगाथा के पराभव का पहला बड़ा प्रमाण है। विकासगाथा के खात्मे की गवाही हमारे रुपए और शेयर बाज़ार की खस्ता हालत भी दे रही है। रुपया इस साल जनवरी से अब तक डॉलर के मुकाबले 7.04% गिर चुका है, जबकि निफ्टी-50 सूचकांक 9.91% टूटा है। सरकार के अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि इसकी मुख्य वजह ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि है। इससे पहले अमेरिका के जवाबी टैरिफ और एआई में भारत की कमज़ोरी ने विदेशी निवेशकों को हमसे दूर खींच लिया। लेकिन टैरिफ तो ब्राज़ील पर भी हमारी तरह सबसे ज्यादा 50% लगाया गया था। मगर वहां की मुद्रा और शेयर बाज़ार तो बम-बम कर रहे हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…
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