गहने गिरवी रख लिया ऋण ~70% बढ़ा

देश के कम से कम 12.1 करोड़ युवा निठल्ले बैठे हैं। 81.35 करोड़ लोग हर महीने सरकार से मिलनेवाले पांच किलो मुफ्त राशन के मोहताज़ हैं। 9.45 करोड़ स्वाभिमानी किसानों की कमर ऐसी टूटी है कि सरकार से साल भर में 6000 रुपल्ली की सम्मान-निधि पाकर लाभार्थी बन गए। वित्त मंत्री सीतारमण विदेश जाकर भारतीय मध्यवर्ग को बेच रही हैं। कुछ दिन पहले फ्रांस में उन्होंने बताया कि भारतीय मध्यवर्ग 1995 से औसतन हर साल 6.3% बढ़ रहा है और 2030 से 2035 के बीच इसका आकार चीन के मध्यवर्ग से भी बड़ा हो जाएगा। वहीं, देश के भीतर रिजर्व बैंक बता रहा है कि मध्यवर्ग अपनी खपत पूरी करने के लिए घर के जेवर गिरवी रखकर ऋण ले रहा है। रिजर्व बैंक के ताज़ा डेटा के मुताबिक मार्च 2026 के अंत तक स्वर्ण आभूषण देकर गैर-बैकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से लिया गया ऋण ₹3.29 लाख करोड़ हो चुका है। यह साल भर पहले के ऐसे ₹1.94 लाख करोड़ के ऋण से 69.59% ज्यादा है। इसी दौरान रिटेल लोन 19.5% ही बढ़े हैं। साफ है कि लोगबाग घबरा रहे हैं कि कमाई नहीं तो ऋण कैसे लौटा पाएंगे। ऐसे में सोना देकर ऋण लेना ज्यादा सुरक्षित है। ऐसा तब हो रहा है, जब रिजर्व बैंक के ही मुताबिक वित्त वर्ष 2011-12 से 2023-24 तक आम घरों पर चढ़ा ऋण जीडीपी के 15.9% से बढ़कर 42.9% पर पहुंच चुका था। अब शुक्रवार का अभ्यास…

यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं। इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...

Existing Users Log In
   
New User Registration
Please indicate that you agree to the Terms of Service *
captcha
*Required field