थोड़ा और फिसलने दें महिंद्रा फाइनेंस

महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज या छोटे में कहें तो महिंद्रा फाइनेंस का फोकस ग्रामीण व अर्धशहरी इलाकों पर है। वह बैंकों और माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं के बीच की चीज है। नई-पुरानी ट्रक, जीप, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल व कार के लिए लोन से लेकर घर बनाने और शादी, इलाज व बच्चों की पढ़ाई के लिए भी कर्ज देती है। गावों के करीब 10 लाख लोगों को अपना ग्राहक बना चुकी है। कंपनी की कई सब्सिडियरी इकाइयां भी हैं। जैसे – महिंद्रा इंश्योरेंस ब्रोकर्स, महिंद्रा रूरल हाउसिंग फाइनेंस व महिंद्रा बिजनेस एंड कंसल्टिंग सर्विसेज जो नाम के अनुरूप काम करती हैं। इन सबका धंधा एक जगह जुटता है। इसलिए महिंद्रा फाइनेंस के स्टैंड एलोन के बजाय कंसोलिडेटेड नतीजे ज्यादा बेहतर तस्वीर पेश करेंगे।

कंपनी ने 25 अप्रैल को वित्त वर्ष 2010-11 के सालाना नतीजे घोषित कर दिए थे। इनके मुताबिक उसने 2042.52 करोड़ रुपए के धंधे पर 493.66 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। कंसोलिडेटेड या समेकित नतीजों के आधार पर कंपनी का ईपीएस (प्रति शेय़र मुनाफा) इस समय 50.92 रुपए है। उसका शेयर कल बीएसई (कोड – 532720) में 2.42 फीसदी गिरकर 643.95 रुपए और एनएसई (कोड – M&MFIN) में 2.35 फीसदी गिरकर 640.90 रुपए पर बंद हुआ है। इस तरह उसका शेयर अभी 12.65 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। वैसे, इसी तरह की अन्य कंपनी बजाज फिनसर्व का शेयर अभी 7.2 के ही पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। इसलिए उस पर भी नजर रखी जा सकती है।

महिंद्रा फाइनेंस का धंधा वित्त वर्ष 2010-11 में 29 फीसदी और शुद्ध लाभ 35 फीसदी बढ़ा। यही नहीं, मार्च 2011 की तिमाही में उसका परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) 75.25 फीसदी और शुद्ध लाभ मार्जिन (एनपीएम) 26.46 फीसदी रहा, जबकि एक तिमाही पहले दिसंबर 2010 में ओपीएम 68.89 फीसदी और एनपीएम 22.27 फीसदी था। इन अच्छे व उत्साहवर्धक नतीजों के बावजूद शेयर गिरता जा रहा है। नतीजे आने के दिन 25 अप्रैल 2011 को यह ऊपर में 813.95 तक गया था। इसके बाद गिरते-गिरते कल 31 मई 2011 को नीचे में 632 तक चला गया।

कंपनी के साथ ऐसा कुछ भी नकारात्मक नहीं हुआ कि उसके शेयर को यूं महीने भर में 22.35 फीसदी का फटका लग जाए। असल में हम महिंद्रा फाइनेंस के शेयरों की चाल को देखें तो उसमें लहरों की तरह का एक पैटर्न है। नवंबर 2010 में वह ऊपर में 913 रुपए तक गया था। उसके बाद फरवरी 2011 में नीचे में 595 रुपए तक चला गया। मार्च 2011 में उठते-उठते 835.05 रुपए तक पहुंच गया। इसके बाद फिर गिर रहा है। इसके पीछे ऑपरेटरों वगैरह का क्या खेल है, इसका पता लगाना हमारे अपारदर्शी बाजार में मुमकिन नहीं है। लेकिन हम मानकर चल सकते हैं कि महिंद्रा फाइनेंस अभी और गिरेगा। नोट करने की बात है मार्च 2011 की तिमाही के दौरान कंपनी ने अपने शेयर बड़े संस्थागत निवेशकों (क्यूआईबी) को 695 रुपए में बेचे हैं। वैसे, इसे संयोग ही कहा जाएगा कि महिंद्रा फाइनेंस साल भर पहले आज ही के दिन, 1 जून 2010 को 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर 415 रुपए पर था।

जानकार बताते हैं कि महिंद्रा फाइनेंस का शेयर जैसे ही गिरते-गिरते 600 रुपए के आसपास आए, उसे खरीद लेना चाहिए। यह लंबे निवेश के काफी सुरक्षित व लाभदायी शेयर है। यह धारणा हवा-हवाई नहीं, बल्कि ठोस कारकों पर आधारित है। कंपनी अपने धंधे का दायरा बढ़ा रही है। हाल ही में वह अपनी उधार सीमा को 15,000 करोड़ से बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपए करने की मंजूरी के लिए शेयरधारकों के पास पहुंची है। देश भर में कंपनी के दफ्तरों या शाखाओं की संख्या 547 है, जिसे मार्च 2012 तक वह 597 करने में जुटी है। वह अपने दफ्तरों को एकल आईटी नेटवर्क से जोड़ने की कोशश में है। कंपनी ने कुछ महीने पहले ही अमेरिका के राबोबैंक ग्रुप के एक कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम बनाया है।

कंपनी की इक्विटी 104 करोड़ रुपए है जो 10 रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में बंटी है। इसमें से 57.49 फीसदी प्रवर्तकों और बाकी 42.51 फीसदी पब्लिक के पास है। पब्लिक के हिस्से में एफआईआई के पास कंपनी के 34.06 फीसदी और डीआईआई (घरेलू निवेशक संस्थाओं) के पास 4.35 फीसदी शेयर है। मार्च तिमाही में एफआईआई ने कंपनी में अपना निवेश बढ़ाया है, जबकि डीआईआई ने घटाया है। कंपनी के कुल शेयरधारकों की संख्या 37,824 है। उसके बड़े निवेशकों में कॉफथैल मॉरीशस (3.43 फीसदी), पीसीए इंडिया इक्विटी (2.38 फीसदी), सिटीग्रुप ग्लोबल (1.88 फीसदी), वैलिएंट मॉरीशस पार्टनर्स (2.10 फीसदी) और क्रेडिट सुइस (1.78 फीसदी) शामिल हैं।

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