पिछले साल पावर ऑफ आइडियाज़ के विजेता के रूप में आईआईएम अहमदाबाद में हम जैसे चुनिंदा उद्यमियों को प्रोफेसर अरिंदम बनर्जी ने पढ़ाया था कि वैल्यू या मूल्य वो है जो कोई उपभोक्ता आपकी सेवा या उत्पाद के लिए देने को तैयार है। यह वो कीमत है जो वह अपना फायदा देखकर लागत के ऊपर आपको देता है। दूसरी बात यह कि अगर आपको अपने उद्यम का अंतर्निहित मूल्य पता करना हो तो ये देखिए कि कलऔरऔर भी

अमेरिका का डाउ जोंस सूचकांक शुक्रवार को 267.01 अंक बढ़कर 11,808.79 पर पहुंच गया, जबकि इसका अब तक का शिखर 12,876 का है। वैसे, 12,876 का यह स्तर किसी अनार के फूटने की तरह था जो ज्यादा टिका नहीं। इसलिए 12,500 को डाउ का औसत उच्चतम स्तर माना जाता है। इस औसत से अमेरिकी शेयर बाजार गिरकर 10,405 तक चला गया था जो करीब-करीब 17 फीसदी की गिरावट दर्शाता है। लेकिन नीचे का स्तर भी ज्यादा टिकाऔरऔर भी

इस सेटलमेंट को खत्म होने में बस दो दिन बचे हैं और तेजड़ियों के लिए नए नवंबर के सेटलमेंट की जबरदस्त शुरुआत के लिए शुक्रवार से बेहतर कोई दूसरा दिन हो नहीं सकता। इधर हर बढ़त पर उनका सामना शॉर्ट सौदों से हो रहा है जो उनके लिए दिवाली गिफ्ट साबित हो रहे हैं। अगर सेटलमेंट के अंत में बाजार बढ़कर, मान लीजिए 5250 पर बंद होता है तो सारी कॉल मनी उनकी जेब में चली जाएगीऔरऔर भी

सारा का सारा बाजार कल यह उम्मीद लगा बैठा था कि निफ्टी आज 5200 के ऊपर खुलेगा। यह अलग बात है कि हमने धारा के खिलाफ जाकर खरीदने के बजाय निफ्टी में बेचने की सलाह दे रखी थी। हुआ यह कि प्री-ओपन सत्र में ही निफ्टी कल से 1.02 फीसदी गिरकर 5086.55 पर पहुंच गया। फिर गिरता-गिरता 5033.95 तक जाने के बाद दिन के अंत में थोड़ा सुधरकर 0.92 फीसदी की गिरावट के साथ 5091.90 पर बंदऔरऔर भी

हिंदुस्तान ज़िंक पहले साल 2003 तक भारत सरकार की कंपनी हुआ करती थी। अब कबाड़ी से अरबपति अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह की कंपनी है। कंपनी की 845.06 करोड़ रुपए की इक्विटी में वेदांता समूह की हिस्सेदारी 64.92 फीसदी है, जबकि भारत सरकार के पास अब भी उसके 29.54 फीसदी शेयर हैं। फ्लोटिंग स्टॉक कम होने के बावजूद उसका शेयर बहुत ज्यादा ऊपर-नीचे नहीं होता। 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 155.25 रुपए (21 अप्रैल 2011) और न्यूनतमऔरऔर भी

डेरिवेटिव सौदों में कैश सेटलमेंट की मार के अलावा ऐसा कुछ भी नहीं है जो पिछले दो दिनों में बदला हो। लेकिन बाजार हिचकोले खा रहा है। निफ्टी कल 1.58 फीसदी गिरा तो आज 2.02 फीसदी बढ़ गया। डिश टीवी के नतीजों में ऐसी कुछ भी खराबी नहीं थी। लेकिन चूंकि इसमें बाजार के तमाम ट्रेडर 83 रुपए पर लांग हो गए थे, इसलिए बाजार को खिलानेवालों ने इसे 73.70 रुपए तक तोड़ डाला। इसी तरह क्रॉम्प्टनऔरऔर भी

कोई कंपनी जब टी ग्रुप में डाल दी जाती है तो उसमें उसी दिन डिलीवरी के कारण लिक्विडिटी एकदम सूख जाती है। हो सकता है कि वहां पड़े-पड़े कोई शेयर किसी दिन एकदम इल्लिक्विड हो जाए, मतलब उसमें कोई खरीद-फरोख्त हो ही नहीं। बाजार नियामक सेबी और हमारे एक्सचेंज इसे लिस्टेड कंपनियों को सजा देने के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ऐसा बी ग्रुप की किसी अच्छी-खासी कंपनी के साथ होने लगे तो आप क्या कहेंगे? जी,औरऔर भी

हमने अपनी सारी लॉन्ग कॉल्स शुक्रवार को ही बंद कर दी थीं क्योंकि हमें पूरा अहसास था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और टीसीएस सितंबर तिमाही के नतीजों से बाजार को निराश करेंगी। इसके ऊपर से दुनिया के बाजारों ने आग में घी डालने का काम कर दिया। कुछ बाजार सूत्रों का कहना है कि आज दो प्रमुख एफआईआई ने निफ्टी में अपनी लांग पोजिशन काटी है। लेकिन मैं पक्की तरह जानता हूं कि यह सब ड्रामा है। गिरावटऔरऔर भी

हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) का धंधा एकदम सीधा सरल है। पहले हमारे बाप-दादा रिटायर होने के बाद ही घर बना पाते थे। लेकिन आज 30-35 साल के नौकरीपेशा लोग भी मुंबई व दिल्ली जैसे शहर में अपना घर बना ले रहे हैं तो इसे सुगम बनाने और इस ख्वाहिश को बिजनेस म़ॉडल बनाने का श्रेय एचडीएफसी के संस्थापक हंसमुख ठाकुरदास पारेख को जाता है। 1977 में उन्होंने आम मध्य वर्ग के लोगों को हाउसिंग फाइनेंस देनेऔरऔर भी

एक फिर हमारी नजर तमाम बहुराष्ट्रीय ब्रोकिंग फर्मों से तेज व पारखी साबित हुई है। हमने बाजार से आगे निकलकर सबसे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) में खरीद की कॉल पेश की और बेचकर बाजार से पहले ही मुनाफा भी कमा लिया। हमें साफ-साफ लग गया कि आरआईएल के नतीजे उम्मीद से कमतर थे। इसलिए इसमें मुनाफावसूली होनी ही थी। हालांकि बहुत से लोग ने इसे मानने को राजी नहीं थे। रिलायंस का स्टॉक आज करीब 4 फीसदीऔरऔर भी