शेयर बाजार के बिगड़े माहौल के चलते 15 कंपनियों ने पूंजी बाजार नियामक सेबी की मंजूरी के बावजूद अपने आईपीओ पेश नहीं किए। इन्हें मिली मंजूरी की मीयाद पूरी हो गई और ये कंपनियां पूंजी बाजार में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं। इस साल जनवरी से जून 2011 के बीच 15 आईपीओ से कुल 25,186 करोड़ रुपए जुटाने की योजना थी। लेकिन इनमें से कोई भी आईपीओ बाजार में नहीं आया। बता दें कि सेबी सेऔरऔर भी

एमएससीआई (मॉरगन स्टैनले कैपिटल इंटरनेशनल) सूचकांक को बदला जा रहा है। इसमें उभरते बाजारों का वजन बढ़ाया जाएगा। इससे भारतीय बाजार में एफआईआई की खरीद 13 करोड़ डॉलर बढ़ सकती है। लेकिन बाजार के लिए 13 करोड़ डॉलर कोई मायने नहीं रखता। साथ ही इस एमएससीआई के भारत सूचकांक में छह नई कंपनियों – टाइटन इंडस्ट्रीज, डाबर इंडिया, श्रीराम ट्रांसपोर्ट, मुंद्रा पोर्ट, बैंक ऑफ इंडिया और एशियन पेंट्स को शामिल किया गया है। बाजार में आम गिरावटऔरऔर भी

तमिलनाडु न्यूजप्रिंट एंड पेपर्स लिमिटेड का शेयर (बीएसई – 531426, एनएसई – TNPL) साल भर पहले 8 फरवरी 2010 को 83.30 रुपए पर था। अब 4 फरवरी 2011 को 131.70 रुपए पर बंद हुआ है। इस दरमियान यह ऊपर में 163.30 रुपए (28 अक्टूबर 2010) और नीचे में 77.05 रुपए (24 फरवरी 2010) पर जा चुका है। इस तरह इसमें निवेश पर साल भर में 58.1 फीसदी से लेकर 96.03 फीसदी कमाया जा सकता था। इसमें भीऔरऔर भी

ज़ेनसार टेक्नोलॉजीज आरपीजी समूह की आईटी सलाह व सॉफ्टवेयर और बीपीओ सेवाओं से जुड़ी कंपनी है। कंपनी के चेयरमैन हर्ष गोयनका हैं। लेकिन उसका प्रबंधन वाइस चेयरमैन व सीईओ गणेश नटराजन के नेतृत्व में बनी बारह सदस्यों की टीम देखती है। इसके नीचे ग्यारह सदस्यों की प्रबंधन परिषद है। कंपनी ने अलग-अलग उद्योगों को दी जा रही सेवाओं के मुताबिक अपने कामकाज को पांच वर्टिकल सेगमेंट में बांटा है। नए वर्टिकल अप्रैल 2011 से काम करना शुरूऔरऔर भी

कोई भी कंपनी आज क्या है, निवेश के लिए इससे ज्यादा अहम होता है कि उसके भावी विकास का ग्राफ कहां जाता दिख रहा है। जब तक आपको कंपनी समझ में नहीं आ जाती, उसकी मजबूती और भावी विकास के बारे में आप आश्वस्त नहीं हो जाते, तब तक कतई निवेश न करे। आखिर आपकी गाढ़ी कमाई कहीं भागी तो नहीं जा रही। बस यह है कि अभी बैंक उसका फायदा उठा रहा है। आप समझदार होऔरऔर भी

एनआईआईटी लिमिटेड मूल कंपनी है और एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज 2004 में उससे अलग निकालकर बनाई गई कंपनी है। आप जानते ही होंगे कि एनआईआईटी 1981 में बनी आईटी शिक्षण की प्रमुख कंपनी है। धीरे-धीरे उसने सॉफ्टवेयर भी बनाना शुरू कर दिया। साल 2002 तक यह स्थिति हो गई कि उसके कारोबार का काफी बड़ा हिस्सा सॉफ्टवेयर बिजनेस से आने लगा तो उसने 2004 में सॉफ्टवेयर बिजनेस को अलग कंपनी एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज में डाल दिया है। इस समय एनआईआईटीऔरऔर भी

ऑयल इंडिया सरकार की नवरत्न कंपनी है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के धंधे में है। सितंबर 2009 में इसका आईपीओ 1050 रुपए प्रति शेयर मूल्य पर आया था। शुक्रवार को यह बीएसई (कोड – 533106) में 3.18 फीसदी की गिरावट के साथ 1328.70 रुपए और एनएसई (कोड – OIL) में 2.32 फीसदी गिरकर 1336.30 रुपए पर बंद हुआ है। हो सकता है आज भी गिरावट आए। लेकिन कंपनी के कामकाज और भावी योजनाओं को देखें तोऔरऔर भी

हमने आईडीएफसी (इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी) की चर्चा इसी कॉलम में 31 मई 2010 को थी। तब 25 मई को 141.35 रुपए की तलहटी पकड़ने के बाद यह 28 मई को 154.15 रुपए तक पहुंचा था। हमने उस वक्त कहा था कि यह शेयर अगले कुछ महीनों में 180 रुपए तक जाने की सामर्थ्य रखता है। वाकई यह शेयर बढ़ते-बढ़ते 8 नवंबर को 218.20 रुपए तक जा पहुंचा। लेकिन अब फिर गिरते-गिरते 168.25 रुपए पर आ चुकाऔरऔर भी

क्रॉम्प्टन ग्रीव्स बहुत बदल चुकी है। खासकर पिछले पांच सालों में वह नया कलेवर पकड़ती जा रही है। 1937 में बनी थापर समूह की यह कंपनी साठ के दशक तक मोटर, ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर और बिजली से जुड़े तमाम उपभोक्ता सामान बनाती थी। अब वह दुनिया की मशहूर इंजीनियरिंग कंपनियों में गिनी जाती है। पहले सिर्फ भारत में थी। अब इसका मैन्यूफैक्चरिंग आधार बेल्जियम, कनाडा, हंगरी, इंडोनेशिया, आयरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका तक पहुंच गया है।औरऔर भी