नया नाक-नक्श क्रॉम्प्टन ग्रीव्स का

क्रॉम्प्टन ग्रीव्स बहुत बदल चुकी है। खासकर पिछले पांच सालों में वह नया कलेवर पकड़ती जा रही है। 1937 में बनी थापर समूह की यह कंपनी साठ के दशक तक मोटर, ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर और बिजली से जुड़े तमाम उपभोक्ता सामान बनाती थी। अब वह दुनिया की मशहूर इंजीनियरिंग कंपनियों में गिनी जाती है। पहले सिर्फ भारत में थी। अब इसका मैन्यूफैक्चरिंग आधार बेल्जियम, कनाडा, हंगरी, इंडोनेशिया, आयरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका तक पहुंच गया है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में शोध व अनुसंधान के सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के लिए इसे पुरस्कृत भी किया जा चुका है। इसकी कॉरपोरेट पहचान देश में अब भी क्रॉम्प्टन ग्रीव्स की है, लेकिन विदेश में यह सीजी हो चुकी है।

एसएमसी ग्लोबल ने क्रॉम्प्टन ग्रीव्स को साल 2011 के टॉप 11 शेयरों में चुना है। उसका आकलन है कि यह शेयर इस साल 360 रुपए तक जा सकता है। कंपनी का दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर कल बीएसई (कोड – 500093) में 310.10 रुपए और एनएसई (कोड – CROMPGREAV) 309.10 रुपए पर बंद हुआ है। ए ग्रुप का शेयर है तो इस पर कोई सर्किट ब्रेकर नहीं लगता। पिछले ही महीने 2 दिसंबर को इसने 349 रुपए पर 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर हासिल किया है, जबकि इसका न्यूनतम स्तर 219.10 रुपए (25 मई 2010) का है। एसएमसी ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 13.65 रुपए है। इस हिसाब से इसका पी/ई अनुपात 22.7 निकलता है। वहीं सीएनआई रिसर्च के अनुसार इसका टीटीएम ईपीएस 9.77 रुपए है और इसका शेयर 31.74 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है।

खैर, इससे इतर एसएमसी ग्लोबल की रिसर्च के मुताबिक कंपनी इस साल की तरह ही अगले वित्त वर्ष में करीब 600 करोड़ रुपए का पूंजी-खर्च करेगी। यह खर्च मुख्यतया बिजली व औद्योगिक सेगमेंट में होगा। कंपनी प्रबंधन 15 फीसदी से ज्यादा वृद्धि दर हासिल करने की कोशिश में लगा है और यह लक्ष्य वित्त वर्ष 2011-12 में हो जाएगा। उपभोक्ता सेगमेंट में भी कंपनी 14-15 फीसदी वृद्धि हासिल कर लेगी और उसका मौजूदा लाभ मार्जिन बरकरार रहेगा। कंपनी ने सितंबर 2010 की तिमाही में 1444.78 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री (एक्साइज को छोड़कर) पर 158.49 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। इससे पहले वित्त वर्ष 2009-10 में उसकी बिक्री 5283.99 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 617.34 करोड़ रुपए था।

कंपनी ने स्पेन की कंपनू जेडआईवी के साथ मिलकर भारत में एक संयुक्त उद्यम बनाया है जो सब-स्टेशन ऑटोमेशन सिस्टम व बस बार सिस्टम वगैरह बनाएगा। इससे क्रॉम्प्टन ग्रीव्स का दायरा और व्यापक हो जाएगा। इस संयुक्त उद्यम कंपनी की इक्विटी 10 करोड़ रुपए है जिसमें क्रॉम्प्टन ग्रीव्स 7 करोड़ रुपए लगाकर 70 फीसदी की हिस्सेदार रहेगी। इधर कंपनी बेल्जियम की अपनी सब्सिडियरी सीजी गोल्डिंग्स के जरिए सऊदी अरब के ईआईसी ग्रुप के साथ मिलकर मध्य-पूर्व के देशों में अपने पैर जमाने में लगी है।

अवंता पावर में कंपनी की 41 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसकी लिस्टिंग इसके शेयर को आगे बढ़ाने के ट्रिगर का काम कर सकती है। कुल मिलाकर एसएमसी ग्लोबल की रिसर्च रिपोर्ट का आकलन है कि कंपनी का धंधा नए साल में अच्छी-खासी रफ्तार से बढ़ेगा और इसमें किया गया निवेश आम निवेशकों को साल भर कम से कम 16 फीसदी रिटर्न दे सकता है।

कंपनी की कुल इक्विटी 128.30 करोड़ रुपए है। इसका 40.92 फीसदी हिस्सा प्रवर्तकों, 20.36 फीसदी एफआईआई और 22.22 फीसदी डीआईआई के पास है। कंपनी दिसंबर 2006 में पांच पर दो और मार्च 2010 में चार पर तीन शेयरों का बोनस अपने शेयरधारकों को दे चुकी है। वह पिछले कई सालों से बराबर लाभांश भी दे रही है। अभी नवंबर में ही उसने 40 फीसदी का अंतरिम लाभांश घोषित किया है। हालांकि दो रुपए अंकित मूल्य पर यह महज 80 पैसे बनता है। फिर भी लाभांश देने का ही मतलब होता है कि कंपनी का कामकाज चौचक चल रहा है।

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