अभी सस्ता है एनआईआईटी टेक्नो

एनआईआईटी लिमिटेड मूल कंपनी है और एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज 2004 में उससे अलग निकालकर बनाई गई कंपनी है। आप जानते ही होंगे कि एनआईआईटी 1981 में बनी आईटी शिक्षण की प्रमुख कंपनी है। धीरे-धीरे उसने सॉफ्टवेयर भी बनाना शुरू कर दिया। साल 2002 तक यह स्थिति हो गई कि उसके कारोबार का काफी बड़ा हिस्सा सॉफ्टवेयर बिजनेस से आने लगा तो उसने 2004 में सॉफ्टवेयर बिजनेस को अलग कंपनी एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज में डाल दिया है।

इस समय एनआईआईटी लिमिटेड का दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर 57 रुपए पर चल रहा है, लेकिन उसका पी/ई अनुपात 26 है, जबकि एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज का दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर 207.10 रुपए पर चल रहा है और उसका पी/ई अनुपात मात्र 10.60 है क्योंकि उसका ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर शुद्ध लाभ) 19.54 रुपए है। इस लिहाज से एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज (बीएसई – 532541, एनएसई – NIITTECH) को निवेश के लिए सस्ता शेयर माना जाएगा। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 234.90 रुपए का है जो उसने 22 अक्टूबर 2010 को हासिल किया था।

पिछले हफ्ते 18 जनवरी को घोषित नतीजों के मुताबिक दिसंबर 2010 की तिमाही में कंपनी ने समेकित आधार पर 300.60 करोड़ रुपए का कारोबार किया है जिस पर उसका शुद्ध लाभ 47.8 करोड़ रुपए है। साल भर पहले की इसी अवधि की तुलना में उसका कारोबार 30.6 फीसदी और शुद्ध लाभ 35.3 फीसदी बढ़ा है। अगर सब्सिडियरी इकाइयों को निकाल दें तो कंपनी ने अकेले दम पर दिसंबर 2010 की तिमाही में 174.04 करोड़ रुपए के कारोबार पर 30.03 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है।

एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज के ग्राहक देश के अलावा अमेरिका, यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया तक में हैं। पिछले कुछ सालों में कंपनी ने अपने आईटी-केंद्रित बिजनेस मॉडल को काफी बदला है। वह नोएडा में एक एसईजेड (स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन) बना रही है। कंपनी ने इस पर 13 करोड़ रुपए का पूंजी खर्च किया है। अगले कुछ महीनों में वह 28 करोड़ रुपए का पूंजी खर्च करनेवाली है, जिसमें से 22 करोड़ एसईजेड के लिए होंगे।

कंपनी पिछले ही महीने अमेरिका में एक पेशेंट रिफरल सिस्टम, प्रेफर के अधिग्रहण के साथ हेल्थकेयर सेगमेंट में भी उतर गई है। इसके जरिए वह अमेरिका में मरीजों का हेल्थ-रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप से व्यवस्थित करने का काम करेगी। बराक ओबामा अपने यहां हेल्थकेयर सेवाओं पर खास ध्यान दे रहे हैं। अमेरिकी संसद में हेल्थकेयर विधेयक के पारित हो जाने के इस धंधे की संभावना बढ़ गई है।

कंपनी अभी मध्यम स्तर की आईटी कंपनियों में लाभप्रदता के लिहाज से काफी बेहतर स्थिति में है। ब्रोकर फर्म एसएमसी ग्लोबल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि कंपनी का परिचालन लाभ लगातार हर तिमाही में बढ़ता रहा है और उसने जिस तरह की रणनीति अपनाई है, उससे उसका भविष्य उज्ज्वल रहेगा। 18 जनवरी तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद इसका शेयर ऊपर से 217 तक चला गया था। उसके बाद गिरकर नीचे में 206 तक चला गया है। हो सकता है कि अभी इसमें थोड़ी और गिरावट आए। लेकिन साल भर के नजरिए के साथ इनमें किया गया निवेश फायदे का सौदा साबित होगा।

1 Comment

  1. अनिल जी,
    ’शेयर बाजार में सौदा जुआरीयों का काम है’ ये विश्वास हमारे जनमानस में गहराई तक है, और अभी की जैसी हर गिरावट इस बात को और पुख्ता करती जाती हैं, वहीं आप और आपकी टीम अर्थकाम जैसे विचार के जरिये इस अंधविश्वास को जड से समूल नाश करने में लगे है जो सच्ची देश भक्ति, सही व्यापार है जिसका उदाहरण कैम्फर, रामस्वारुप है ही, साथ ही ईश्वर से और आपसे प्रार्थना है कि आपको कभी भी बाजारूपन ना अपनाना पडे। सी एन आई का एक दिन का सब्सक्रिब्श्न इसी बाबत लिया था।

    अनिल जी २६ जनवरी २०१० का कैम्फर तो आज काफी पुराना हो गया है, इसके बारे नई समीक्षा का इंतजार है और जहॉ तक आपने सि्खाया है तो मेरा कैम्फर के बारे मेरा आकलन ८०० रु है। सही है ना! जवाब का इंतजार रहेगा कैम्फर समीक्षा के रुप मे।
    -नमस्कार

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