देश की आर्थिक विकास दर जून से सितंबर 2011 तक की तिमाही में 6.9 फीसदी रही है। यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दो सालों से ज्यादा वक्त में किसी भी तिमाही में हुई सबसे कम विकास दर है और लगातार तीसरी तिमाही में 8 फीसदी से नीचे रही है। चिंता की बात यह है कि इस दौरान मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर मात्र 2.7 फीसदी रही है, जबकि खनन क्षेत्र बढ़ने के बजाय 2.9 फीसदी घटऔरऔर भी

बाजार के बारे में क्या कहा जाए! यहां कोई न्यूनतम स्तर भी न्यूनतम स्तर नहीं होता। जैसे, नव भारत वेंचर्स ने पिछले साल 29 नवंबर 2010 को 295.10 रुपए पर तलहटी बनाकर 302 रुपए पर बंद हुआ तो उसका तब का पी/ई अनुपात 5.33 था और शेयर की बुक वैल्यू थी 234.06 रुपए। ऐसे में इसमें निवेश की सलाह तो बनती ही थी। लेकिन यह शेयर 30 अगस्त 2011 को 158 रुपए के नए न्यूनतम स्तर पहुंचऔरऔर भी

महज रस्से के सहारे तीखे पहाड़ को पार करने की हिम्मत बिरले लोग ही जुटा पाते हैं। उनके जैसा बनने का मंसूबा तो हम नहीं पाल सकते। लेकिन उनके जैसा आत्मविश्वास हम जरूर पाल सकते हैं।और भीऔर भी

देश की सबसे बड़ी और एकमात्र सरकारी जीवन बीमा कंपनी, एलआईसी (भारतीय जीवन बीमा निगम) के 55 साल के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है कि उसे बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) की लताड़ खानी पड़ी है। इरडा ने मृत्यु दावों में लेटलतीफी के खिलाफ एलआईसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था जिस पर उसने 17 अक्टूबर को एलआईसी के कार्यवाहक चेयरमैन डी के मेहरोत्रा व कार्यकारी निदेशक के गणेश के साथ आमने-सामने बातऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने शेयर बाजार में अल्गोरिदम ट्रेडिंग को बैन करने की किसी भी संभावना से इनकार किया है। लेकिन इससे जुड़े उत्पादों के तेजी से बढ़ने पर वो चिंतित जरूर है। सेबी के चेयरमैन यू के सिन्हा मे मंगलवार को मुंबई में उद्योग संगठन सीआईआई और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्यूरिटीज मार्केट्स (एनआईएसएम) द्वारा पूंजी बाजार पर आयोजित एक समारोह में यह बात कही। उन्होंने अलग से मीडिया से बात करते हुए कहा, “सेबीऔरऔर भी

यूपीए सरकार मल्टी-ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर उसी तरह व्यग्र हो गई है जैसे तीन साल पहले वह जुलाई 2008 में भारत-अमेरिका परमाणु संधि को लेकर हुई थी। जहां एक तरफ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने साफ कर दिया है कि सरकार इस फैसले से पीछे नहीं हटेगी, वहीं उनके करीबी और वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने तो यहां तक कह दिया कि अगर विदेशी सुपरमार्केट्स को भारत में आनेऔरऔर भी

देश में 31 जुलाई 2011 तक एलोपैथिक डॉक्टरों की संख्या 8,56,065 रही है। इनमें से करीब 6 लाख डॉक्टर ही नियमित प्रैक्टिस करते हैं। देश की आबादी करीब 121 करोड़ है। इस तरह हर 2016 लोगों पर देश में एक एलोपैथिक डॉक्टर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक है कि हर 1000 लोगों पर एक एलोपैथिक डॉक्टर होना चाहिए। योजना आयोग के एक विशेषज्ञ दल का अनुमान है कि भारत यह मानक साल 2028 तक हासिल करऔरऔर भी

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट, फेसबुक अगले साल अप्रैल से जून के बीच पूंजी बाजार में उतर सकती है। वह अपना आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) लाने का विचार कर रही है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक अपने शेयर बेचकर बाजार से 10 से 12 अरब डॉलर (500 से 600 अरब रुपए) की पूंजी जुटाना चाहती है। लेकिन फेसबुक के प्रवक्ता लैरी यू ने कहा है कि वे आईपीओ केऔरऔर भी

भारत सरकार का प्राथमिक घाटा चालू वित्त वर्ष 2011-12 में अप्रैल से सितंबर तक के पहले छह महीनों में 1,58,311 करोड़ रुपए रहा है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के 12 महीनों के लिए बजट में इसका निर्धारित लक्ष्य 1,44,831 करोड़ रुपए का है। इस तरह साल के छह महीने में ही देश का प्राथमिक घाटा पूरे साल के लिए निर्धारित लक्ष्य का 109.3 फीसदी हो चुका है। यह इसलिए भी चिंता की बात है क्योंकि पिछले वित्तऔरऔर भी

एस्कोर्ट्स लिमिटेड बनी तो 1960 में। लेकिन इसके बनने की शुरुआत देश को आजादी मिलने से तीन साल पहले 1944 में ही हो गई थी। कंपनी ट्रैक्टर व अन्य कृषि उपकरण ही नहीं, ऑटो कंपोनेंट और रेलवे व कंस्ट्रक्शन के काम के उपकरण भी बनाती है। उसने बाकायदा अलग से अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी एस्कोर्ट्स कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट नाम से बना रखी है। कंपनी ने कल ही वित्त वर्ष 2010-11 के सालाना नतीजे घोषित किए हैं। आपऔरऔर भी