साल 2012 में बाजार का पहला दिन। हर ब्रोकरेज हाउस व बिजनेस अखबार नए साल के टॉप पिक्स लेकर फिर हाजिर हैं। चुनने के लिए बहुत सारे विकल्प सामने हैं। ऐसे में आपको और क्यों उलझाया जाए! हालांकि अगर साल 2011 के टॉप पिक्स का हश्र आपके सामने होगा तो शायद आपने इस हो-हल्ले को कोई कान ही नहीं दिया होगा। इन पर ध्यान देना भी नहीं चाहिए क्योंकि ढोल, झांझ, मजीरा व करताल लेकर यह मंडलीऔरऔर भी

हम सभी में उससे कहीं ज्यादा सामर्थ्य और संभावना होती है, जितना हम सोचते हैं। बस जरूरत है इसे निखारने की। इसके लिए चाहिए अटूट आत्मविश्वास और लड़कर हासिल करने का जुनून।और भीऔर भी

समय हथेलियों से फिसलती रेत की तरह निकलता जाता है। हाथ मलते रह जाते हैं हम कि इस साल भी खास कुछ नहीं कर पाए। तय करें कि नए साल के हर पल का तेल निकाल लेंगे, निरर्थक नहीं जाने देंगे।और भीऔर भी

उधर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नए साल के संदेश में कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों के दाम तर्कसंगत होने चाहिए, इधर सरकारी तेल कंपनियों ने नए साल के पहले कामकाजी दिन सोमवार से पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 2.10 रुपए से 2.13 रुपए बढ़ाने की तैयारी कर ली है। कंपनियों का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से कच्चा तेल महंगा हो गया है। इसलिए पेट्रोल के दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी है। इसीऔरऔर भी

जो भी मंत्र, तंत्र या वस्तु हमारी बुद्धि व दृष्टि को तेज करती हो, उसका स्वागत है। लेकिन नजर को धुंधला और शक्ति को धूमिल करनेवाली हर चीज त्याज्य है क्योंकि वह किसी चालबाज का फेंका जाल है।और भीऔर भी

हम अमूमन यही माने रहते हैं कि हम तो चलते रहे, जबकि दूसरे ठहरे रहे। पर ये कैसे संभव है? एक पांव वर्तमान और दूसरा अतीत में रखकर रिश्ते नहीं चल सकते हैं। उन्हें समय के साथ लाना जरूरी है।और भीऔर भी

इकनॉनिक टाइम्स एकमात्र दिल्ली से छपनेवाला अपना हिंदी संस्करण बंद करने जा रहा है। आज, गुरुवार को उसकी टीम आखिरी बार अखबार का काम करेगी और कल शुक्रवार को उसका आखिरी अंक आएगा। फिर पटाक्षेप। तीन साल दस महीने दस दिन पहले 19 फरवरी 2008 को जब यह अखबार शुरू हुआ था तो प्रबंधन की तरफ से बड़े-बड़े वादे किए गए थे। हिंदी समाज को भी इससे बड़ी अपेक्षाएं थीं। लेकिन कम से कम लागत में ज्यादाऔरऔर भी

बहुत कम लोग हैं जिन पर देश-दुनिया का फर्क पड़ता है। इनमें से भी ज्यादातर लोग भावना में बहकर पूरा सच नहीं देख पाते, गुमराह हो जाते हैं। स्वार्थ में धंसे दुनियादार लोग उन पर हंसते है, तरस खाते हैं।और भीऔर भी

जो चीज सबके हित से जुड़ी हो, जिससे सबका वास्ता हो, उससे जुड़ी बातों को छिपाना गुनाह है। निजी बातों को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए। लेकिन सार्वजनिक बातों की परदादारी से भ्रष्टाचार उपजता है।और भीऔर भी

इन दुनिया की खूबसूरती यह है कि यहां किसी की भी तानाशाही शाश्वत नहीं होती। यहां अंततः सामंजस्य और संतुलन ही चलता है। हर अति के अंदर से ही वे तत्व पनपते हैं जो उसका अंत कर देते हैं।और भीऔर भी