गुल टेकचंदानी को आपने देखा भी होगा, सुना भी होगा, अंग्रेजी और हिंदी के बिजनेस चैनलों पर। निवेश सलाहकार हैं, बाजार के विश्लेषक हैं। निवेश उनका धंधा है। लेकिन सबसे बड़ी बात है धंधे में बड़े बेलाग हैं, ईमानदार हैं। बताते हैं कि छात्र जीवन में ही सट्टे का चस्का लग गया था। 1980-81 के आसपास शेयर बाजार से इतना कमाया कि दक्षिण मुंबई में दफ्तर, गाड़ी, बंगला सब कुछ हो गया। पिता को बोले कि मुझेऔरऔर भी

समझ में नहीं आता इन दुखी आत्माओं का क्या करूं? एक दुखी आत्मा ने लिखा है, “हेलो! आप यहां हर वक्त लिखते हैं कि मार्केंट मजबूत रहेगा। लेकिन हर वक्त वो नीचे ही नीचे जा रहा है। आपने लिखा था कि 6200 से 7000 तक निफ्टी जाएगा। मगर ऐसा नहीं हुआ। अगर आपको सही मालूम होता तो क्यों नहीं आप सबको बोलते कि निफ्टी 4500 तक जाएगा। जब निफ्टी 6200 था तब सब अपना बेच देते औरऔरऔर भी

झीलों के शहर उदयपुर (राजस्थान) में आजादी के साल 1947 में गठित कंपनी पी आई इंडस्ट्रीज के साथ इस समय कहीं कुछ तो है, जो ठीक नहीं है। कंपनी अपनी वर्किंग कैपिटल या कार्यशील पूंजी जरूरतों के लिए पॉलिमर इकाई बेचने के साथ-साथ अपनी अचल संपत्तियां भी गिरवी रख रही है। इसके लिए उसने अपने शेयरधारकों के लिए पोस्टल बैलट 12 जनवरी को तैयार किया था। इसे 17 फरवरी तक शेयरधारकों ने मंजूरी दे दी है। इसऔरऔर भी

विदेशी निवेशक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विश्वास जता रहे हैं। कोल इंडिया, पावरग्रिड कॉरपोरेशन और एनटीपीसी जैसी नौ कंपनियों में हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की हिस्सेदारी बढ़ी है। पिछले दो साल में आईपीओ लानेवाली 11 सरकारी कंपनियों की शेयरधारिता के ताजा आंकड़ों के अनुसार नौ कंपनियों में चालू वित्त वर्ष 2010-11 की दिसंबर तिमाही में सितंबर तिमाही के मुकाबले एफआईआई की हिस्सेदारी बढ़ी है। हालांकि, ऑयल इंडिया और इंजीनियर्स इंडिया में एफआईआईऔरऔर भी

हम में हर कोई शेयरों में निवेश फायदा कमाने के लिए करता है, घाटा उठाने के लिए नहीं। और, फायदा तब होता है जब शेयरों के भाव बढ़ते हैं। शेयरों के भाव तब बढते हैं जब किसी भी दूसरी चीज की तरह उसे खरीदनेवाले बेचनेवालों से ज्यादा होते हैं। अगर बेचनेवाले खरीदनेवालों से ज्यादा हो गए तो शेयर नई तलहटी पकड़ता जाता है। यह अलग बात है कि शॉर्ट सेलिंग करनेवाले शेयरों के भाव गिरने से हीऔरऔर भी

भक्त: हे भगवान! मेरी मनोकामना है कि ये बाजार चढता जाए तो अच्छा रहे। बाजार में किसान, मजदूर आदि सभी ने तरह-तरह के अच्छे अच्छे शेयर ले रखे हैं। इन ईमानदार मेहनती लोगों की गाढ़े पसीने की कमाई अमीर लोग वैसे ही हजम कर जाना चाहते हैं जैसे खड़ी सब्जी की फसल पर किसान को व्यापारी हजम कर जाना चाहता है। (वह कहता है कि सस्ते में फसल बेचो, वरना मैंने तो माल खरीदना नही है, औरऔरऔर भी

बाजार में 800 अंकों के सुधार का मतलब यह नही है कि अंधेरा खत्म, मुसीबत टल गई। हम जैसे ही यह सोचते हैं कि सब कुछ पटरी पर आ गया है, उससे पहले ही बिकवाली का नया झोंका सब कुछ फिर से पटरा कर देता है। कल मैं एक बिनजेस चैनल पर कार्यक्रम देख रहा था जहां कुछ ज्ञानी लोग एक सर्वेक्षण पर बहस कर रहे थे जिसका निष्कर्ष यह था कि देश के 97 फीसदी लोगऔरऔर भी

फंडामेंटल अमूमन शॉर्ट टर्म या छोटी अवधि में नहीं चलते और टिप्स ज्यादातर लंबी अवधि में नहीं चलतीं। इसलिए टिप्स के पीछे ट्रेडर भागते हैं, जबकि निवेशकों को हमेशा कंपनी का मूलाधार या फंडामेंटल्स देखकर ही निवेश करना चाहिए। लेकिन शेयर बाजार से कमाई वही लोग कर पाते हैं तो समय पर बेचने की कला सीख लेते हैं। यह कला अभ्यास, अनुभव और लक्ष्य बांधने से आती है। अक्सर ऐसा होता है कि कोई शेयर 45 फीसदीऔरऔर भी

यूं तो मिस्र से भारत का कोई सीधा लेनादेना नहीं है, लेकिन मिस्र में उठे राजनीतिक तूफान ने पहले से हैरान-परेशान हमारे शेयर बाजार की हवा और बिगाड़ दी है। वैसे भी जब बुरा दौर चल रहा हो, तब मामूली-सी बुरी खबर भी बिगड़ी सूरत को बदतर बनाने के लिए काफी होती है। सेंसेक्स आखिरकार आज नीचे में 18,038.48 तक चला गया। हालांकि बाद में सुधरकर 18327.76 पर बंद हुआ। भारतीय बाजार को पसंद करनेवाले किसी भीऔरऔर भी

पिछले चार दिनों से बाजार में बराबर यह खबर उड़ रही थी कि सेबी ने रिलायंस पेट्रोलियम (आरपीएल) में एसएएसटी (सब्सटैंशियल एक्विजिशन ऑफ शेयर्स एंड टेकओवर) रेगुलेशन के उल्लंघन के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) पर 400 करोड़ रुपए का जुर्माना ठोंक दिया है। आज एक प्रमुख बिजनेस चैनल ने भी यह ‘खबर’ फ्लैश कर दी। अंदरूनी व भेदिया कारोबार के माहिर खिलाड़ी निफ्टी और आरआईएल में पिछले हफ्ते से ही शॉर्ट चल रहे हैं। यही वजह हैऔरऔर भी