कल और आज कुल मिलाकर महज 10,000 करोड़ रुपए के ही सौदों का रोलओवर हुआ है। ऑपरेटर अपनी पोजिशन आगे ले जाने के मूड में नहीं है। कल निफ्टी में 6100 के ऊपर बहुत से खिलाड़ी टेक्निकल चार्टों से निकले यकीन के आधार पर लांग हो गए, यानी उन्होंने खरीद के सौदे कर लिए। लेकिन इस बार तकनीकी गलती की वजह से बाजार ने उन्हें अपनी राय बदलने को बाध्य कर दिया। इतना तय है कि 6050औरऔर भी

रिटेल निवेशक कब तक टेक्निकल एनालिस्टों के चार्टों की धुन पर, सपेरों की बीन पर सांप की तरह नाचते रहेंगे? यह एक बड़ा सवाल है और इसका जवाब रिटेल निवेशक ही दे सकते हैं। अभी तक वे ब्रांड-भक्त बने हुए हैं और अपने ही ब्रोकरों का कहा सुनते हैं। लेकिन इन ब्रोकरों का सरोकार तो अपने धंधे-पानी से ज्यादा और रिटेल निवेशकों की जेब से कम होता है। जैसी कि उम्मीद थी, चार्टवाले राग अलापने लगे किऔरऔर भी

ईक्लर्क्स सर्विसेज (बीएसई कोड – 532927, एनएसई कोड – ECLERX) की बुक वैल्यू अभी 82.83 रुपए है। वित्त वर्ष 2009-10 में ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 38.23 रुपए रहा है। उसका ठीक पिछले बारह महीनों (टीटीएम) का ईपीएस 31.10 रुपए है। शेयर कल बीएसई में 600.05 रुपए पर बंद हुआ है। इस तरह वह 19.29 (600.25/31.10) के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। जाहिर है, यह शेयर कहीं से भी सस्ता नजर नहीं आ रहा। लेकिन एचडीएफसीऔरऔर भी

दोपहर तक बीएसई सेंसेक्स 20,000 के नीचे और एनएसई निफ्टी 6000 के नीचे चला गया था। लेकिन यह कोई चिंता की बात नहीं, क्योंकि बाजार दो कदम आगे बढ़ने से पहले एक कदम पीछे चलकर अपने पैर जमाता है। चिंता की बात यह है कि हजारों कंपनियों के बीच हम निवेश के लिए किन-किन को चुनें। इसमें भी कंपनियों को चुनना तो बाद में होता रहेगा। उससे पहले यह जानने की जरूरत है कि कौन से सेक्टरऔरऔर भी

सेंसेक्स का 20,500 अंक पर पहुंचना और चालू वित्त वर्ष 2010-11 के अनुमानित लाभ के 21 पी/ई अनुपात पर ट्रेड होना निश्चित रूप से ऐसे पहलू हैं जिन पर निवेशकों को ध्यान देने की जरूरत है। बाजार की मौजूदा तेजी की खास वजह ज्यादा तरलता या लिक्विडिटी है। इसलिए हमें खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि यह तरलता कब तक रहेगी? अगले दो महीने में 77,000 करोड़ रुपए के आईपीओ आने हैं जो बाजार से भारीऔरऔर भी

मैं अपनी पुरानी राय पर कायम हूं और उसमें कोई तब्दीली नहीं आई है। यह भी तय मान लें कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं अपनी राय नहीं बदलूंगा क्योंकि ऐसा करना मुझे कतई मंजूर नहीं। इस महीने 77,000 करोड़ रुपए के आईपीओ आने हैं। ऐसे में बाजार में करेक्शन न आए, ऐसा कैसे हो सकता है? अभी तो कोल इंडिया की वजह से बाजार में रवानगी बची हुई है। इसके आईपीओ का मूल्य मंगलवार, 12औरऔर भी

हां, दुनिया के बाजारों ने भारतीय बाजार को एक और आवेग दिया जिससे निफ्टी फिर से 6215 तक चला गया। हालांकि वह एक बार 6248 के खतरे के निशान को भी छू गया था। लेकिन मैं अब भी निफ्टी के बारे में तेजी की धारणा पालने को तैयार नहीं हूं। मैं यही चाहूंगा कि मेरे साथ चलनेवाले भी इस मामले में पर्याप्त सावधानी बरतें। मैंने निफ्टी, ऑटो और बैंकिंग में बेचने की सलाह दी थी, लेकिन उसेऔरऔर भी

बाजार का नई ऊंचाई पर पहुंच जाना कोई मजाक नहीं है। सितंबर का सेटलमेंट ऐसा सेटलमेंट रहा जब निफ्टी 5555 अंक से पलटकर वापस मुड़ा। यह वह स्तर था जहां से फंडों ने अपनी तमाम सारी शॉर्ट पोजिशन को तौबा बोलकर बाजार में खरीद का सिलसिला शुरू किया। निवेशक और ट्रेडर आमतौर पर यह बात भूल जाते हैं कि कोई भी स्टॉक तेजी के दौर में जाने से पहले अपने को जमाता है, उसी तरह जैसे कोईऔरऔर भी

आलोचकों की कोई हद नहीं है। वे कुछ भी बक सकते हैं। निफ्टी 6100 के ऊपर चला गया। फिर भी बहुत से ‘पंडित’ मानते हैं कि हमारी खबरें, विश्लेषण और सूचनाएं यूं ही बस लम्तड़ानी हैं। लेकिन करें क्या। दुनिया तो इन आलोचकों की मुठ्ठी में नहीं है। वे भले ही इनकी कीमत न समझें, लेकिन लोगों के बीच इन्हें पसंद किया जाता है। हम तो अपने तमाम मतिअंध आलोचकों से निवेदन करते हैं कि वे ब्राउजिंगऔरऔर भी

ऑर्किड केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के धंधे में बराबर बरक्कत हो रही है। चालू वित्त वर्ष में जून 2010 की पहली तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 172 फीसदी बढ़ा है। इधर कंपनी का शेयर भी पिछले करीब एक महीने से धीरे-धीरे बढ़ रहा है। 30 अगस्त को 187.40 रुपए था। 27 सितंबर तक 213.10 रुपए पर पहुंच गया। लेकिन कल 28 सितंबर को 1.01 फीसदी गिरकर 210.95 रुपए पर बंद हुआ है। शेयर बीएसई (कोड – 534372)औरऔर भी