सूर्या फार्मा में लगे हैं कई सारे चांद

आप हमें हंस मानें या न मानें, लेकिन हम समुंदर की तलहटी से आपके लिए मोती चुगकर लाने की कोशिश में लगे हैं। ऐसा ही एक मोती है सूर्या फार्मास्यूटिकल। इसका एक रुपए अंकित मूल्य का शेयर (बीएसई – 532516, एनएसई – SURYAPHARM) अभी 21.40 रुपए पर चल रहा है। कंपनी का ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (शुद्ध लाभ प्रति शेयर) 5.42 रुपए है तो शेयर का पी/ई अनुपात मात्र 3.95 निकलता है। इस शेयर की बुक वैल्यू ही 20.85 रुपए है। इस भाव पर इसे पकड़ लेने की जरूरत है क्योंकि कंपनी विकास की सीढियां बड़ी तेजी से चढ़ रही है।

चंडीगढ़ की कंपनी है। यह एक्टिव फार्मा अवयव (एपीआई) या बल्क ड्रग, दवा फॉर्मूलेशन व बल्क इंटरमीडिएट्स बनाती है। इसे देश में बीटा लैक्टम व सेफलोस्पोरीन रेंज की एंटी-बायोटिक दवाएं बनाने की प्रमुख कंपनियों में गिना जाता है। लेकिन कंपनी की खास ताकत हैं मिंट (मेंथा या पुदीना) आधारित उत्पाद। यह इससे बने उत्पादों की सबसे बड़ी भारतीय निर्यातक है। मिंट की भारी मांग टूथपेस्ट, कनफेक्शनरी, च्युइंग गम, सिगरेट व टूथपेस्थ से लेकर शैंपू व शेविंग क्रीम के लिए रहती है। हमारी यहां तो पान, गुटखा, तंबाकू वगैरह में भी लोगबाग पीपरमेंट या मिंट डालकर खाते हैं।

इसकी छह उत्पादन इकाइयां और दो शोध व अनुसंधान (आर एंड डी) इकाइयां हैं। ये इकाइयां पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हैं। पिछले वित्त वर्ष 2009-10 में कंपनी की बिक्री 56 फीसदी बढ़कर 1143.75 करोड़ और शुद्ध लाभ 41 फीसदी बढ़त के साथ 75.24 करोड़ रुपए रहा था। चालू वित्त वर्ष में दिसंबर 2010 की तिमाही में उसने 398.09 करोड़ की बिक्री पर 28.02 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है, जबकि साल पहले की इसी अवधि में उसकी बिक्री 298.09 करोड़ और शुद्ध लाभ 21.42 करोड़ रुपए था। इस तरह कंपनी की बिक्री में 33.55 फीसदी और शुद्ध लाभ में 30.81 फीसदी इजाफा हुआ है। पिछली पांच तिमाहियों में कंपनी की बिक्री औसतन 57 फीसदी और परिचालन लाभ 48 फीसदी की गति से बढ़ा है।

कंपनी की इक्विटी 18.82 करोड़ रुपए है। इसका 68.48 फीसदी हिस्सा पब्लिक और 31.52 फीसदी हिस्सा प्रवर्तकों के पास है। कंपनी के कुल शेयरधारकों की संख्या 15,169 है। उसके बड़े शेयरधारकों में डायनैमिक फिनवेस्ट सर्विसेज (11.60 फीसदी), क्रिएटिव कैपिटल सर्विसेज (7.96 फीसदी) और पेस स्टॉक ब्रोकिंग सर्विसेज (1.09 फीसदी) शामिल हैं। एफआईआई व डीआईआई के पास इसके शेयर न के बराबर हैं।

कंपनी के साथ दो और सकारात्मक बातें हैं। एक तो यह है कि उसने दिसंबर 2010 में ही अमेरिका की ओवर द काउंटर (ओटीसी यानी बिना डॉक्टर की पर्ची के बेची जानेवाली) एनल्जेसिक दवा निर्माता कंपनी एक्टिवऑन (ActivOn) का अधिग्रहण 2.2 करोड़ डॉलर (करीब 99 करोड रुपए) में किया है। एक्टिवऑन अमेरिका में वॉलमार्ट से लेकर वॉलग्रीन, सीवीएस व राइट-एड जैसे बड़े स्टोरों में बेची जाती है। इससे सूर्या फार्मा को अमेरिका में एक बना-बनाया मार्केटिंग तंत्र मिल जाएगा।

दूसरी बात यह है कि कंपनी ने अपनी सब्सिडियरी सूर्या हेल्थकेयर के जरिए दिल्ली, एनसीआर, पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ में फार्मेसी का रिटेल धंधा शुरू किया है। Viva या वीवा नाम की उसकी दुकानें हैं। ये दोनों ही बातें सूर्या फार्मा के धंधे में चार चांद लगा सकती हैं। वैसे, कंपनी दुनिया के 90 देशों के ग्राहकों को माल सप्लाई करती है। उसके दफ्तर अमेरिका के अलावा सिंगापुर व चीन में भी हैं।

हो सकता है कि सूर्या फार्मा का शेयर फटाफट न बढ़े क्योंकि आप जानते ही हैं कि हमारे बाजार में शेयरों को चढ़ाने के लिए ऑपरेटरों के जैक की जरूरत पड़ती है। लेकिन कंपनी की मजबूती को देखते हुए उसमें लंबे समय के लिए निवेश करना काफी मुनासिब और सुरक्षित लगता है। बाकी कल क्या हो जाएगा, यह तो सुनामी का कहर झेल रहे अति-विकसित देश जापान को भी नहीं पता था।

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