यहां तो हर नियम टूटे है नियम से

पिछले चार दिनों से बाजार में बराबर यह खबर उड़ रही थी कि सेबी ने रिलायंस पेट्रोलियम (आरपीएल) में एसएएसटी (सब्सटैंशियल एक्विजिशन ऑफ शेयर्स एंड टेकओवर) रेगुलेशन के उल्लंघन के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) पर 400 करोड़ रुपए का जुर्माना ठोंक दिया है। आज एक प्रमुख बिजनेस चैनल ने भी यह ‘खबर’ फ्लैश कर दी। अंदरूनी व भेदिया कारोबार के माहिर खिलाड़ी निफ्टी और आरआईएल में पिछले हफ्ते से ही शॉर्ट चल रहे हैं। यही वजह है कि 21 जनवरी को तीसरी तिमाही के शानदार नतीजों की घोषणा के बाद भी आरआईएल इस हफ्ते 7.29 फीसदी गिर गया। 21 जनवरी को यह बीएसई में 986.50 रुपए पर बंद हुआ था, जबकि 28 जनवरी को यह 914.50 रुपए तक जा पहुंचा।

खैर, ऐसा तो होना ही था क्योंकि मेरा मानना कि वैश्विक बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार के सिस्टम में इतने ज्यादा सुराख हैं कि यहां चालबाजों की मर्जी चलती है। वे बाजार में जैसा चाहें, वैसा खेल कर सकते हैं। इसलिए भारत में कभी भी, कुछ भी संभव है। यहां फ्रंट रनिंग चलती है, इनसाइडर ट्रेडिंग भी हो जाती है और एकदम नियोजित तरीके से किसी शेयर को धूल चटाई जा सकती है।

यही वजह है कि मैं हमेशा आम निवेशकों को एफ एंड ओ सौदों से दूर रहने की सलाह देता हूं। यह सेगमेंट खांटी ट्रेडरों के लिए है जो सारी कमियों-खामियों को जानते हुए समझते हैं कि कब, कहां और कितना जोखिम उठाना है। हमें मान कर चलना होगा कि ट्रेडर समुदाय ट्रेडिंग से जुड़े सारे जोखिम से भलीभांति वाकिफ होता है और ट्रेडर जो कुछ कर रहे हैं, पूरी जानकारी के साथ कर सोच-समझकर कर रहे हैं। इसलिए वे अपना बोझ या दोष किसी दूसरे के सिर पर नहीं मढ़ सकते।

निवेशकों के लिए बाजार अब भी मूल्यवान स्टॉक्स को खरीदने का सुनहरा मौका दे रहा है। बिकवाली अपने आखिरी दौर में है। अगर आप अब भी नहीं खरीदते तो आपका कैश आपके पास कैश ही बनकर पड़ा जाएगा और सोने व चांदी जैसे निवेश माध्यमों जैसी कमाई कभी नहीं कर पाएगा। हालांकि सोने व चांदी में भी गिरावट सन्निकट है क्योंकि ये दोनों ही शेयर बाजार व डॉलर की विनिमय दरों से अभिन्न रूप से जुड़े हैं।

निफ्टी ने अब 200 दिनों के मूविंग एवरेज (डीएमए) का स्तर तोड़ दिया है और शुक्रवार को 5512.15 पर बंद हुआ है। इसलिए बाजार में कमजोरी छाई रहेगी। आशंका इस बात की है कि निफ्टी 5500, 5400 और यहां तक कि 5300 तक भी लुढ़क सकता है। एलआईसी के मुताबिक 5300 का स्तर बाजार में खरीद के लिए आदर्श है। बहुत सारे फंड 5400 और 5500 को खरीद के लिए आदर्श स्तर मानते हैं।

फिर भी हकीकत यही है कि वे इस दौर में आक्रामक खरीद कभी नहीं करेंगे क्योंकि बिकवाली से उन्हें और कम भाव पर शेयर मिलते जा रहे हैं। लेकिन जब वे आक्रामक खरीद करना चाह रहे होंगे, तब तक उनकी झोली भरे बगैर निफ्टी 5700 से ऊपर पहुंच गया होगा। यह बाजार है प्यारे। डर और लालच का भरपूर खेला यहां चलता है। जो आपके लिए सच है, वो एफआईआई व डीआईआई के लिए भी उतना ही सच है।

अगर आप चाहें तो चुन-चुनकर अच्छे स्टॉक्स खरीद सकते हैं और यकीन मानिए कि बाजार 5400 तक भी गिर जाए, तब भी आप निश्चित तौर पर 30 फीसदी रिटर्न हासिल कर लेंगे। इसकी सीधी-साधी वजह यह है कि बहुत से स्टॉक्स का मूल्य इस समय निफ्टी के 4000 स्तर के समतुल्य चल रहा है, न कि 5600 के। अभी तो हालत यह है कि सेंसेक्स में शामिल 30 स्टॉक्स को महज 2 फीसदी गिरा दो तो निफ्टी 5200 तक धसक जाएगा। यह सारा बड़े पैसे का खेल है।

बाजार की अंतिम आस सरकार पर टिकी है क्योंकि पूंजी बाजार से अधिकतम रकम सरकारी कंपनियों द्वारा ही जुटाई जानी है। इसलिए इतना तय है कि सरकार की तरफ से बाजार के भरोसे को फिर से कायम करने के लिए कुछ न कुछ कदम तो उठाए ही जाएंगे।

अगर आप तारीफ से फूलकर कुप्पा और आलोचना से तिलमिला जाते हैं तो समझिए कि आप अंदर से बड़े खोखले हैं। प्रशंसा और निंदा से विचलित न होना ही इंसान की असली मजबूती का परिचायक है।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह कॉलम मूलत: सीएनआई रिसर्च से लिया जा रहा है)

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