जापानी कंपनी होंडा ने हीरो होंडा में अपनी 26 फीसदी हिस्सेदारी सिंगापुर में मुंजाल परिवार की तरफ से बनाए गए विशेष एसपीवी (स्पेशल परपज वेहिकल) को बेच दी है। यह सौदा 120 करोड़ अमेरिकी डॉलर (5565 करोड़ रुपए) में हुआ है। इसकी आधिकारिक घोषणा 25 सितंबर को की जाएगी। बता दें कि हीरो होंडा से होंडा के निकलने की खबर सबसे पहले हमने आपको दी थी और सबसे पहले सौदे का ब्यौरा भी आपको हम ही देऔरऔर भी

बाजार का बहुत तेजी से बढ़ना अच्छा नहीं है तो पंटर भाईलोग शॉर्ट सेलिंग करने लगे। पहले कहा जा रहा था कि बहुत धीमा होना बाजार के लिए बहुत बुरा है और इसलिए शॉर्ट सेलिंग हो रही है। अरे भाई मेरे! आप लोग बाजार को कब समझेंगे? निफ्टी 5800 पर है और सारे के सारे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) सेंसेक्स में शामिल स्टॉक खरीदने में जुटे हैं क्योंकि ऐसा करना उनकी मजबूरी है। मैं तो कहूंगा किऔरऔर भी

यह वक्त है देखने-समझने का कि हमने आपसे क्या कहा था और दुनिया भर के विश्लेषक क्या कह रहे थे। उन्होंने हिन्डेनबर्ग अपशगुन के नाम पर मुनादी की थी कि सितंबर में बाजार में जबरदस्त गिरावट आएगी, जबकि हमने डंके की चोट पर कहा था कि बाजार नई ऊंचाई पकड़ेगा। सीएनबीसी से लेकर एनडीटीवी व तमाम दूसरे चैनलों पर एनालिस्ट लोग आपका ब्रेनवॉश करते रहे और कहते रहे कि निफ्टी का 5600 अंक पर जाना असंभव है।औरऔर भी

हम साबित करने बैठे हैं कि बाजार के लिए हिन्डेनबर्ग या कोई दूसरा अपशगुन कभी कोई मायने नहीं रखता। न ही चार्टों के आधार पर की गई टेक्निकल एनालिसिस, खरीद-बिक्री की सलाह, ज्योतिष के नुस्खे और वैल्यूएशन के बारे में मंदी के आख्यान कोई काम आते हैं। आप खुद ही देखिए कि होंडा के अलग होने की खबर आ जाने के बाद भी सफेदपोश एनालिस्ट हीरो होंडा को मूल्यवान स्टॉक बताकर खरीदने की सलाह दिए जा रहेऔरऔर भी

डीलर, ट्रेडर और ब्रोकर अपनी स्क्रीन रीडिंग के आधार पर बाजार का रुझान तय करते हैं। स्क्रीन तो दिखा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से एफआईआई की खरीद नदारद है। इसलिए बाजार नीचे फिसल रहा है और करेक्शन के लिए तैयार है। उनकी स्क्रीन रीडिंग से मुझे कोई इनकार नहीं। लेकिन यह अल्पकालिक तरीका है क्योंकि बाजार में अगर दो बजे खरीद शुरू होती है तो यही लोग इस तरह के सिद्धांत गढ़नेवाले अपने गुरुघंटालों काऔरऔर भी

हिन्डेनबर्ग की अशुभ छाया का डर बरकरार है। पूरे सितंबर भर रहेगा। दुनिया के बाजार गिरेंगे तो स्वाभाविक रूप से भारत पर भी असर पड़ेगा। वैसे भी हमारे एक बड़े फंड हाउस के प्रमुख कह चुके हैं कि बाजार में 10 फीसदी करेक्शन आना है। लेकिन कौन बेचेगा जिसके चलते यह करेक्शन आएगा? बीते शुक्रवार को बाजार (बीएसई सेंसेक्स) 1.25 फीसदी गिर गया। इस हिसाब से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सौदों के ओपन इंटरेस्ट में कमी आनी चाहिएऔरऔर भी

क्या सितंबर में बाजार के धराशाई होने का हिन्डेनबर्ग अपशगुन सही साबित होगा या यह लेखक जो कह रहा है कि हमारा बाजार इस दौरान नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगा? इसका फैसला तो सितंबर 2010 के अंत ही हो पाएगा। आज वो मौका नहीं है कि मैं बताऊं कि आपको क्या करना चाहिए। बस, थोड़ा इंतजार कीजिए। हकीकत आपके सामने होगी। अभी तो आप वाकई अवांछित बातों और विचारों को सुन-सुनकर डरे हुए होंगे। ऐसे में मेराऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पब्लिक इश्यू (आईपीओ व एफपीओ) में रिटेल निवेशकों की निवेश सीमा को एक लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए करने की पेशकश की है। मजे की बात है कि इसके लिए उसने मुद्रास्फीति के बढ़ने का तर्क दिया है, जबकि शेयर के इश्यू मूल्य का कोई सीधा रिश्ता मुद्रास्फीति से नहीं होता। उसने इस बारे में एक बहस पत्र पेश किया है जिसमें सभी संबंधितऔरऔर भी

मैं ये तो नहीं कहता कि एफआईआई मूरख हैं। आखिर वे हमारे बाजार की दशा-दिशा तय करते हैं। लेकिन इतना जरूर है कि उन्हें बहुत आसानी से मूर्ख बनाया जा सकता है या ऐसा भी हो सकता है कि वे आसानी से मूर्ख बनने का स्वांग करते हों। उन्होंने अपने इर्दगिर्द 200 करोड़ रुपए के बाजार पूंजीकरण की लक्ष्मण रेखा खींच रखी है। वे वही स्टॉक इतने या इससे ज्यादा बाजार पूंजीकरण पर खरीदते हैं जिन्हें ऑपरेटरऔरऔर भी

बाजार शुरुआती बढ़त को टिकाए नहीं रख सका और बाद में सेंसेक्स 100 से ज्यादा अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। असल में कारोबार के दूसरे हिस्से में उन आवेगी स्टॉक्स में करेक्शन आता ही है जिनमें रिटेल निवेशक ज्यादा खरीद कर चुके होते हैं। मारुति अपनी खोई स्थिति फिर से हासिल कर रहा है। कंपनी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने एक इंटरव्यू में कहा है कि मानेसर के दूसरे संयंत्र में उत्पादन शुरू होऔरऔर भी