कुछ दिनों पहले हमने टाटा मोटर्स और एसबीआई की बात उठाई थी और इन दोनों ही शेयरों ने औरों से ज्यादा तेजी दिखाई है। आरडीबी को आईटीसी द्वारा खरीदने की बात अब पीटीआई, सीएनबीसी, एनडीटीवी, ब्लूमबर्म और रॉयटर्स जैसे कई समाचार माध्यमों में आ गई है। निश्चित रूप से अब इसका खंडन भी आएगा क्योंकि 350 करोड़ रुपए में सौदे की बात कही गई है, जबकि आरडीबी का बाजार पूंजीकरण अभी मात्र 75 करोड़ रुपए है। इसलिएऔरऔर भी

देश भर में छोटे ऑपरेटरों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। वे कुकुरमुत्तों की तरह उग रहे हैं। मुंबई में ही कम से कम 100 नए ऑपरेटर आ गए हैं। इसी के साथ वोल्यूम का धंधा चल निकला है। वैल्यूमार्ट जैसे मामूली शेयर जो कभी एक रुपए पर चल रहे थे, अब 11.50 रुपए के ऊपरी सर्किट तक चले गए हैं। फिर भी 25 लाख शेयरों तक के खरीदार सामने आ जाते हैं। कहानियां गढ़ीऔरऔर भी

हम इस बात की आशंका पहले ही जता चुके हैं। बाजार पर मंडराता जोखिम घट नहीं रहा। बहुत मुमकिन है कि जिन अग्रणी कंपनियों में बढ़त के दम पर सेंसेक्स बढ़ता जा रहा है, वे गिरावट/करेक्शन की शिकार हो जाएं और जो स्टॉक अभी तक बाजार की रफ्तार से पीछे चल रहे थे, वे अचानक सबसे आगे आ जाएं। इसके पीछे का तर्क बड़ा सीधा-सरल और आसान है। पीछे चल रहे बहुत से शेयरों का भाव उनकेऔरऔर भी

बीएसई सेंसेक्स इधर-उधर होता रहा, फिर भी उसमें ज्यादा गिरावट नहीं आई। एनएसई निफ्टी 5477 अंक को पार नही कर सका तो बाजार में करेक्शन आ गया और जो भी थोड़ी-बहुत बढ़त हुई थी, मिट गई। लेकिन इसके कोई खास फर्क नहीं पड़ता। हकीकत यह है कि एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) यानी अमीर निवेशक अब बाजार में लौट रहे हैं और कैश सेगमेंट का सतहीपन मिट रहा है, गहराई आ रही है। सभी छोटे-मोटे ऑपरेटर सक्रिय होऔरऔर भी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स जून 1990 में 850 अंक पर था। जून 2000 में यह 4850 अंक पर पहुंचा और अब जून 2010 में 17,700 अंक पर। इस तरह 20 साल में इसने मूलधन को 20 गुना बढ़ा दिया है। सालाना चक्रवृद्धि दर से देखें तो इसने 1990-2000 के दौरान 18.8 फीसदी और 2000-2010 के बीच 14.1 फीसदी सालाना रिटर्न दिया है। पूरे दो दशकों का औसत सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न 16.4 फीसदी का है।औरऔर भी

आज के स्टार परफॉर्मर रहे आईएफसीआई व टीटीएमएल (टाटा टेली महाराष्ट्र लिमिटेड) और इन दोनों के बारे में हम काफी समय से लिख रहे हैं। बैंकिंग शेयरों ने भी अच्छी गति पकड़ी। फ्यूचर सौदों में फिजिकल सेटलमेंट न होने के कुछ शिकार नजर आ रहे हैं। जेएसडब्ल्यू होल्डिंग्स 1750 रुपए तक हिट रहा, हालांकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी। इसी तरह एचसीसी 128 रुपए तक मार करता रहा और उसने तमाम स्टॉप लॉस और मार्क टू मार्केटऔरऔर भी

एलआईसी की तरफ से अक्सर होनेवाली बिकवाली का वो सिलसिला अब रुक गया है जो बीएएसई सेंसेक्स को 18,000 के शुभ अंक को पार करने से रोक रहा था। होता यह था कि इधर जब भी सेंसेक्स 18,000 के पार जाने को हुआ, एलआईसी की बिक्री ने उसे रोक दिया। लेकिन आखिरकार लगता है कि एलआईसी को सीधे नॉर्थ ब्लॉक (वित्त मंत्रालय) से हिदायत मिल गई है। अब तेजी के इस नए दौर की अगुआई रिलांयस इंडस्ट्रीजऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने शेयर बाजार में 15 मिनट का प्री-ओपन सत्र शुरू करने का फैसला किया है। यह प्री-ओपन सत्र 9 बजे से 9.15 बजे तक होगा। इसे अभी बीएसई और एनएसई में प्रायोगिक स्तर पर सेंसेक्स और निफ्टी में शामिल शेयरों से किया जाएगा। वैसे, इसमें कुल 50 कंपनियों के ही शेयर हैं क्योंकि सेंसेक्स के 30 शेयर निफ्टी के 50 शेयरों के सेट के सब-सेट ही हैं। सेबी ने प्री-ओपन सत्र मेंऔरऔर भी

बाजार में बहुत ज्यादा करेक्शन या गिरावट के आसार नहीं है क्योंकि रुझान खरीद का ही है जिससे बाजार ऊपर ही जाएगा। फिर भी हमारी सलाह है कि चुनिंदा खरीद ही करें। साथ-साथ दिमाग के किसी कोने में यह धारणा भी रखें कि बाजार गिर भी सकता है। मतलब निवेश करें, लेकिन पूरे चौकन्नेपन के साथ। जोखिम उठाएं, लेकिन नापतौल कर। वैसे भी शुक्रवार तक बाजार में तेज गति की उम्मीद न करें। गुरुवार को बाजार कमोबेशऔरऔर भी

निफ्टी में 14.5 अंक गिरावट आई और वह अब भी 5386.15 पर है। सेंसेक्स भी केवल 47.74 अंक गिरा और वह 17,938.16 पर टिका है। लेकिन बाजार में करेक्शन का सिलसिला चल निकला है क्योंकि अधिकांश खिलाड़ी सेंसेक्स के 18,000 के ऊपर पहुंचने पर मुनाफावसूली की राह पकड़ने का फैसला कर चुके हैं। मेरिल लिंच जैसे विश्वस्तरीय खिलाड़ी ने तो ऑन रिकॉर्ड कह दिया है कि बाजार अभी काफी महंगा नजर आ  रहा है। इसलिए करेक्शन काऔरऔर भी