मैं ये दावा तो नहीं करता कि मैं सब कुछ समझता हूं। लेकिन इतना तय है कि मैं खुद को सर्वश्रेष्ठ होनेवाले का दावा करनेवाले तमाम एनालिस्टों से बेहतर समझता हूं। जब एफआईआई की खरीद के चलते बाजार में धन का प्रवाह बढ़ रहा हो, तब खरीद की कॉल देने के लिए किसी अतिरिक्त बुद्धि की जरूरत नहीं होती। इसका मतलब तब हात, जब आपने खरीद की कॉल तब दी होती, जब सेंसेक्स 8000, 15,000 या यहांऔरऔर भी

कोल इंडिया के आईपीओ के मूल्य-निर्धारण ने एफआईआई निवेश के जमकर आने का माहौल बना दिया है। इस इश्यू में बाहर से कम से कम 75,000 करोड़ रुपए आने की उम्मीद है। अगर विदेशी निवेशकों को कोल इंडिया के आईपीओ में आवंटन नहीं मिला तो वे इसके शेयर लिस्टिंग होने के बाद बाजार से खरीदेंगे। अगर कोल इंडिया का शेयर लिस्टिंग पर बहुत महंगा हो गया तो बाहर से आया यह धन एनएचपीसी, आरईसी और एनटीपीसी कीऔरऔर भी

मैं अपनी पुरानी राय पर कायम हूं और उसमें कोई तब्दीली नहीं आई है। यह भी तय मान लें कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं अपनी राय नहीं बदलूंगा क्योंकि ऐसा करना मुझे कतई मंजूर नहीं। इस महीने 77,000 करोड़ रुपए के आईपीओ आने हैं। ऐसे में बाजार में करेक्शन न आए, ऐसा कैसे हो सकता है? अभी तो कोल इंडिया की वजह से बाजार में रवानगी बची हुई है। इसके आईपीओ का मूल्य मंगलवार, 12औरऔर भी

हां, दुनिया के बाजारों ने भारतीय बाजार को एक और आवेग दिया जिससे निफ्टी फिर से 6215 तक चला गया। हालांकि वह एक बार 6248 के खतरे के निशान को भी छू गया था। लेकिन मैं अब भी निफ्टी के बारे में तेजी की धारणा पालने को तैयार नहीं हूं। मैं यही चाहूंगा कि मेरे साथ चलनेवाले भी इस मामले में पर्याप्त सावधानी बरतें। मैंने निफ्टी, ऑटो और बैंकिंग में बेचने की सलाह दी थी, लेकिन उसेऔरऔर भी

इस समय छह से आठ ऑपरेटरों व एफआईआई के 1.25 करोड़ से ज्यादा निफ्टी के शॉर्ट सौदे फंसे पड़े हैं जो उन्होंने 5400 के स्तर के बाद से किए हैं। इन्हें वे काट ही नहीं पा रहे। काटने जाते हैं तो निफ्टी और बढ़ जाता है। यह स्थिति निफ्टी को नीचे नहीं आने दे रही। हर मंदड़िया भगवान से दुआ कर रहा है कि निफ्टी में कमजोरी आ जाए। लेकिन अभी तो तेजड़िए ही भगवान बने हुएऔरऔर भी

हमें यकीन नहीं था कि बाजार खुद को ऊपरी स्तर पर टिकाए रख पाएगा, फिर भी हमने शॉर्ट सौदे काटने को क्यों कहा? यह एक बड़ा सवाल है और आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों है? तो जवाब है कि बारिश ने भारत की विकासगाथा को धुंधला कर दिया है। राष्ट्रमंडल खेलों की भयंकर खामियों व घपलों ने विदेश में भारत और भारतीय राजनीति की छवि को दागदार बना दिया है। अभी देश के जीडीपी कीऔरऔर भी

बाजार ने तेजी का एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया। सेंसेक्स 20,000 के पार तो निफ्टी 6000 के पार जाकर बंद हुआ। इस मौके पर मैं अपनी खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकता। फिर भी आपको चेतावनी देने से खुद को नहीं रोक पा रहा। एक बात जान लें कि जुनून जितना तल्ख होगा, करेक्शन उतना ही गहरा होगा और आपकी पूरी बैलेंस शीट चंद दिनों में साफ हो सकती है। मगर, शॉर्ट सौदे करते वक्तऔरऔर भी

बाजार पर नाहक ही तेजी का सुरूर चढ़ा हुआ है। मेरा सुझाव है कि ट्रेडरों को इस सेटलमेंट में तब तक बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है जब बाजार में करेक्शन नहीं आ जाता। फिलहाल करेक्शन इसलिए नहीं आ रहा क्योंकि ट्रेडर अब भी हर बढ़त पर शॉर्ट हुए जा रहे हैं। इस दौरान अगर शॉर्ट सेल भी होती है तब भी आपको अफरातफरी मचाने की जरूरत नहीं है। बाजार खुद को करेक्शन के बिना सेंसेक्स केऔरऔर भी

इस साल फरवरी से म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या में शुरू हुआ घटने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। यह संख्या म्यूचुअल फंड फोलियो से गिनी जाती है। म्यूचुअल फंडों के साझा मंच एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड एसोसिएशन इन इंडिया) के आंकड़ों के अनुसार फरवरी से अगस्त 2010 के बीच म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या में 5.84 लाख की कमी आ चुकी है। फरवरी में कुल म्यूचुअल फोलियो 483.09 लाख थे, जबकि अगस्त अंतऔरऔर भी

बाजार में बढ़त जारी है। बीएसई सेंसेक्स 20000 के स्तर से करीब 410 अंक और एनएसई निफ्टी 6000 के स्तर से करीब 120 अंक पीछे है। लेकिन मेरा यकीन है कि इस सेटलमेंट में ऐसा नहीं हो पाएगा। हालंकि इसी सेटलमेंट में निफ्टी 6000 अंक के ऊपर चला गया तो मैं इस दुनिया का सबसे खुश इंसान होऊंगा क्योंकि यह मेरा सपना रहा है। मैं निफ्टी में 2800 अंक से लेकर आपको 5900 तक लाया हूं औरऔरऔर भी