वि‍त्‍त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि‍ मुद्रास्फीति को स्वीकार्य स्तर पर लाना जरूरी है और रि‍जर्व बैंक द्वारा ब्याज दर आधा फीसदी बढ़ाने से मुद्रास्फीति की अपेक्षा को थामने में मदद मिलेगी। उन्होंने मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा की पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 7.50 फीसदी से 8 फीसदी कर मंहगाई में और कमी लाने का ठोस संकेत दि‍या है। वि‍त्‍त मंत्री ने कहा कि ‍इसऔरऔर भी

मुद्रास्फीति के बढ़ते जाने की चिंता रिजर्व बैंक पर लगता है कि कुछ ज्यादा ही भारी पड़ गई है। इसको थामने के लिए उसने ब्याज दरों में सीधे 50 आधार अंक या 0.50 फीसदी की वृद्धि कर दी है। इतनी उम्मीद किसी को भी नहीं थी। आम राय यही थी कि रिजर्व बैंक ब्याज दरें 0.25 फीसदी बढ़ा सकता है। कुछ लोग तो यहां तक कह रहे थे कि औद्योगिक धीमेपन को देखते हुए शायद इस बारऔरऔर भी

बढ़ती मुद्रास्फीति को काबू में लाना रिजर्व बैंक की प्राथमिकता है। इसके लिए कड़ी मौद्रिक नीति को अपनाना जरूरी है, भले ही आर्थिक विकास को धक्का पहुंच जाए। रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की पहली त्रैमासिक समीक्षा से ठीक पहले आर्थिक हालात की स्थिति बयां करते हुए यह बात कही है। इसलिए माना जा रहा है कि इस बार भी वह नीतिगत दरों (रेपो व रिवर्स) में 0.25 फीसदी वृद्धि कर सकता है। अभी रेपो दर 7.50औरऔर भी

असली मायने-मतलब भरोसे का होता है। टेक्निकल एनालिस्ट बाधाएं खड़ी करते हैं क्योंकि इनका काम ही यही है। इंसानों का काम है उनके प्रतिरोध व बाधाओं को तोड़ देना। निफ्टी में 5660 प्रतिरोध का बहुत ही मजबूत स्तर था और किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह स्तर टूट जाएगा और वो भी रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की त्रैमासिक समीक्षा से ठीक पहले, खासकर तब, जब बाजार कमजोरी के साथ गिरकर खुला था। लेकिन दोऔरऔर भी

सब कुछ यंत्रवत। न थोड़ा इधर, न थोड़ा उधर। गिने-चुने लोगों को छोड़कर सब यही माने बैठे थे कि रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की पहली मध्य-तिमाही समीक्षा में ब्याज दरें 0.25 फीसदी बढ़ाएगा और मुद्रास्फीति को बड़ी चुनौती मानेगा। सो, ऐसा ही हुआ। रिजर्व बैंक ने चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत रेपो दर को 7.25 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। रिवर्स रेपो दर को चूंकि इससे एक फीसदी कम और एमएसएफ (मार्जिनल स्टैंडिंगऔरऔर भी

एक तरफ लगभग आम राय बन चुकी है कि मुद्रास्फीति को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की पहली मध्य-तिमाही समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों को चौथाई फीसदी बढ़ा सकता है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार के नए कैबिनेट सचिव अजित कुमार सेठ मुद्रास्फीति को कोई खतरा नहीं मानते। उनका कहना है कि मुद्रास्फीति को लेकर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं हैं। सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जबकि नवीनतम आंकड़ोंऔरऔर भी

हमारे नीति-नियामक कितने मतिअंध हैं, इसका प्रमाण पेश कर दिया मंगलवार को जारी मई माह की मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने। तीन दिन पहले ही वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु कह रहे थे कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर मई में 8.6 फीसदी रह सकती है जो अप्रैल माह के 8.66 फीसदी से कम होगी। लेकिन वास्तव में यह आंकड़ा 9.06 फीसदी का निकला है। सवाल उठता है कि क्या इतने खासऔरऔर भी

शेयर बाजार की निगाह इस हफ्ते गुरुवार 16 जून को पेश होनेवाली रिजर्व बैंक मध्य तिमाही समीक्षा पर टिकी रहेगी। लेकिन इससे पहले दो दिन भी काफी अहम हैं। इसलिए हफ्ते के शुरू में कारोबार फीका रह सकता है। निवेशकों को मई के मुद्रास्फीति के आंकड़ों का भी इंतजार होगा जो मंगलवार, 14 जून को जारी किया जाएगा। वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु का अनुमान है कि मई में मुद्रास्फीति की दर 8.6 फीसदीऔरऔर भी

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के चेयरमैन सी रंगराजन ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 8.5 फीसदी रहने की उम्मीद है। उनका मानना है कि सेवा क्षेत्र और उद्योगों के विस्तार से यह आर्थिक वृद्धि दर हासिल हो सकती है, हालांकि कृषि क्षेत्र का योगदान घट सकता है। बता दें कि इस साल के बजट में वित्त मंत्री ने 9 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया। लेकिन रिजर्वऔरऔर भी

फल, अनाज और प्रोटीन आधारित खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से 14 मई को समाप्त हुए सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 8.55 फीसदी पर पहुंच गई। विशेषज्ञों ने आगाह किया कि हाल ही में पेट्रोल के दामों में की गई बढ़ोतरी से खाद्य वस्तुओं की कीमतें और बढ़ सकती है। खाद्य मुद्रास्फीति में तेजी के साथ ही विनिर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ने से रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति से निपटने के लिए अगले महीने मौद्रिक नीति की समीक्षा मेंऔरऔर भी