खाद्य मुद्रास्फीति में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है और 8 जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान यह 15.52 फीसदी पर आ गई है। हालांकि सब्जियों विशेषकर प्याज के दाम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं। गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार दाल, गेहूं व आलू के दाम में कमी की वजह से खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले 1 जनवरी को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 16.91 फीसदी थी,औरऔर भी

बाजार में जिस तरह बड़े पैमाने पर चालबाजी व जोड़तोड़ चल रही है, भावों को सायास गिराया-उठाया जा रहा है, उसके रहते सही रुझान का पता लगाना बहुत मुश्किल है। फिर भी यह तो साफ दिख रहा है कि बाजार ने ऊपर की यात्रा तो फिर से शुरू कर दी है। बीएसई सेंसेक्स जहां 209.80 अंक (1.11 फीसदी) की बढ़त लेकर 19092.05 पर बंद हुआ है, वहीं एनएसई निफ्टी 69.30 अंक (1.23 फीसदी) बढ़कर 5724.05 पर पहुंचऔरऔर भी

थोड़ी-सी मुद्रा-स्फीति हमें भी दे दो यह कहते हैं दुनिया के कुछ देशों की केन्द्रीय बैंकों के प्रमुख हमारे डी. सुब्बाराव से। भारतीय रिर्ज़व बैंक के गवर्नर सुब्बाराव ने बताया कि हम मुद्रा-स्फीति घटाने के लिए परेशान हैं और कुछ देश मुद्रा-स्फीति बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। 25 जनवरी को की जाने वाली मौद्रिक नीति की तीसरी त्रैमासिक समीक्षा में मुद्रा-स्फीति को नियंत्रण में लाने व विकास-दर को बढ़ाने के लिए अनुरुप कदम उठाने पड़ेंगे।औरऔर भी

क्या आनेवाले दिनों में बाज़ार में बिकवाली का दबाव बढ़ेगा क्योंकि निफ्टी 5690 का समर्थन स्तर तोड़कर नीचे जा चुका है? ये सवाल हर किसी के दिमाग में नाच रहा है। बहुत से लोग इसका जवाब हाँ मानते हैं। लेकिन इससे निचले स्तरों पर खरीद के अवसर बढ़ गए हैं। ऐसा माननेवालों में से बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास 25 से 50 फीसदी कैश है। इसलिए उनकी राय को अनुचित नहीं माना जा सकता। 5368औरऔर भी

एक तो शुक्रवार, ऊपर से 13 तारीख। पश्चिम देशों के निवेशक इसे बडा अपशगुनी संयोग मानते हैं। इसलिए वे उस दिन घर से निकले ही नहीं। भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार, 13 जनवरी का दिन कतई अच्छा नहीं रहा। बीता हफ्ता करेक्शन के लिहाज से ही नहीं, उथल-पुथल के लिहाज से भी हमारे शेयर बाजार के लिए सबसे बुरा हफ्ता रहा। हम बाजार की गिरावट से ज्यादा चौंके नहीं क्योंकि हमारा मानता है कि निफ्टी मेंऔरऔर भी

गठबंधन की मजबूरियों को महंगाई पर नियंत्रण में बाधक बताये जाने संबंधी कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के बयान को बीजेपी ने हास्यापद बताया है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस में नेतृत्व का घोर अभाव है। बीजेपी की प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने बुधवार को राजधानी दिल्ली में संवाददताओं से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘कमरतोड़ महंगाई से जहां पूरा देश त्रस्त है, वहीं ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर राहुल गांधी का बयान किसी के गले नहीं उतर रहा है।औरऔर भी

भारतीय शेयर बाजार में बाजार के शातिर उस्तादों और राजनेताओं का क्या खेल हो सकता है? उनके बीच क्या कोई दुरभिसंधि है? वह भी तब जब पूरा बाजार, खासकर डेरिवेटिव सेगमेंट बेहद खोखले आधार पर खड़ा है? शेयर बाजार में होनेवाले कुल 1,70,000 करोड़ रुपए के कारोबार में से बमुश्किल 15,000 करोड़ कैश सेगमेंट से आता है। इस कैश सेगमेंट से अरबों डॉलर का बाजार पूंजीकरण एक झटके में उड़ जाता है, जबकि वास्तविक स्थिति यह हैऔरऔर भी

खाने-पीने की चीजों के दामों में लगातार तेजी से परेशान प्रधानमंत्री मनमोहन सिहं ने महंगाई को थामने के उपायों पर विचार-विमर्श के लिए आज, मंगलवार को राजधानी दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक की। लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। इसलिए विचार-विमर्श का सिलसिला कल भी जारी रहेगा। सूत्रों के मुताबिक कोई नतीजा न निकलने की वजह कृषि व खाद्य मंत्री शरद पवार का अड़ियल रवैया रहा है। इसलिए संभव है कि सरकार अगले फेरबदल में पवार सेऔरऔर भी

कल भारी वोल्यूम के साथ निफ्टी के 5800 अंक से नीचे चले जाने के साथ बाजार ने ट्रेडरों और निवेशकों के विश्वास को डिगाकर रख दिया है। मुझे उम्मीद थी कि निफ्टी 5820 के बाद वापस उठेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका कारण मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के बढ़ने का अंदेशा बताया जा रहा है। पर यह बाजार के इस तरह धराशाई हो जाने का असली कारण नहीं हो सकता। जब वित्त मंत्री ऑन रिकॉर्ड कह रहेऔरऔर भी

मुद्रास्फीति क्यों बढ़ रही है? मुद्रा का प्रसार ज्यादा है, जबकि क्रय-शक्ति ठहरी हुई है। नतीजतन मुद्रास्फीति बढ़ती जा रही है। निश्चित रूप से अगर मौद्रिक नीति के जरिए मुद्रास्फीति से लड़ना है तो ब्याज दरें बढ़ाना ही इकलौता विकल्प है। हालांकि, मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए आपूर्ति बढ़ाने, आयात शुल्क घटाने और जमाखोरी पर अंकुश लगाने जैसे कई दूसरे उपाय भी किए जा सकते हैं। अगर कारगर उपाय किए जाएंऔरऔर भी