महाराष्ट्र में प्याज निर्यात एक राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा था। खासकर नासिक के किसान निर्यात पर प्रतिबंध का विरोध कर रहे थे। इससे डर कर केंद्र सरकार ने 11 दिनों के भीतर ही प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला वापस ले लिया है। बता दें कि रिटेल बाजार में प्याज की कीमत 25 रुपए किलोग्राम पर पहुंचने के बाद सरकार ने इसी महीने 9 सितंबर को प्याज निर्यात पर रोक लगा दी थी। मंगलवारऔरऔर भी

यूरोपीय संकट का मजबूत और विश्वसनीय समाधान सबके हित में है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के जरिए समूचा वैश्विक समुदाय इस दिशा में प्रयास कर रहा है। यह बात अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गेथनर ने कही। गेथनर ने व्हाइट हाउस में कहा कि मुझे लगता है कि यूरोप फिलहाल जैसे वित्तीय दबाव में है उसके मजबूत और विश्वसनीय समाधान में हम सबका हित है। यह सिर्फ अमेरिका की बात नहीं है न ही सिर्फ यूरोपियों की।औरऔर भी

वित्त मंत्रालय से लेकर पूरी सरकार को चिंता सताए जा रही है कि कहीं ब्याज दरें बढ़ने से देश की आर्थिक व औद्योगिक विकास दर और धीमी न पड़ जाए। इसलिए वे चाहते थे कि ब्याज दरें अब न बढ़ाई जाएं। लेकिन ऊपर-ऊपर मंत्री से लेकर सलाहकार तक रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर बढ़ाने का समर्थन कर रहे हैं। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को रेपो व रिवर्स रेपो दरों में 0.25 फीसदीऔरऔर भी

खाद्य वस्तुओं के साथ मैन्यूफैक्चर्ड चीजों की महंगाई से थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर अगस्त में 9.78 फीसदी हो गई है। वित्त मंत्री का कहना है कि सरकार और रिजर्व बैंक मिलकर बढ़ती मुद्रास्फीति से निपट लेंगे। वित्त मंत्री की राय में देश में ऊंची मुद्रास्फीति का मुख्य कारण वैश्विक बाजार का दबाव है। मुखर्जी ने राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “मुद्रास्फीति दहाई अंक के करीब है। स्थिति पर सरकार कीऔरऔर भी

यूरोप सहित तमाम विकसित देशों में गहराते वित्तीय संकट और घरेलू अर्थव्यवस्था की मंद पड़ती रफ्तार से चिंतित वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को वैश्विक समुदाय का आह्‍वान करते हुए कहा कि हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए और स्थिति से मिलकर निपटना होगा। दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों के शोध से जुडी भारतीय परिषद (आईसीआरआईईआर) के एक सम्मेलन के दौरान उन्होंने अलग से कहा कि लगातार निराशाजनक समाचार मिल रहे हैं। पहले हमें औद्योगिक उत्पादन सूचकांकऔरऔर भी

मंदड़ियों के खेमे व सोच में कुछ ऐसी तब्दीलियां हुई हैं जिनके चलते 5000 को अब समर्थन का मजबूत स्तर मान लिया है। यानी, माना जा रहा है कि निफ्टी के अब इससे नीचे जाने की गुंजाइश बेहद कम है। फिर भी अगर मंदड़िए और एफआईआई मिलकर तगड़ी बिकवाली का नया दौर शुरू करते हैं तो बाजार 5000 पर भी नहीं रुकेगा और सीधे टूटकर 4700 तक चला जाएगा। ऐसा होगा या नहीं, यह तो हमें केवलऔरऔर भी

देश की आर्थिक विकास दर जून तिमाही में पिछली छह तिमाहियों में सबसे कम रही है। फिर भी यह सबसे ज्यादा आशावादी अनुमान से भी बेहतर है। इसीलिए शेयर बाजार पर जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास दर कम रहने का असर नहीं पड़ा और वह करीब 1.6 फीसदी बढ़ गया। हालांकि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने जून तिमाही की विकास दर को निराशाजनक करार दिया है। मंगलवार को सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिकऔरऔर भी

अगर भारत इसी तरह बढ़ता रहा और आर्थिक ताकत हासिल करता रहा तो हम दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए स्थिरता का स्रोत बन सकते हैं और बेचैन भटक रही वैश्विक पूंजी का सुरक्षित ठिकाना बन सकते हैं। यह आशा जताई है वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने। उन्होंने सोमवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय आर्थिक सेवा के स्वर्ण जयंती समारोह में यह बात कही। वित्त मंत्री ने कहा कि आज जैसी वैश्विक जिम्मेदारी है, भारत के ऊपर पिछलेऔरऔर भी

सरकार आखिरकार अण्णा हज़ारे के नेतृत्व में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन के आगे झुक गई लगती है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चिट्ठी के बाद टीम अण्णा के साथ सरकार की बातचीत की राह खुल गई। लेकिन सरकार यहां भी अपनी चालाकी से बाज नहीं आई है। वह जन लोकपाल विधेयक को भी संसद की स्थाई समिति को सौपने को तैयार है। लेकिन स्थाई समिति के लिए अन्य तमाम सुझावों की तरह यह भी एक सुझावऔरऔर भी

एक तरफ केंद्र की यूपीए सरकार अण्णा हज़ारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को न संभाल पाने से परेशान हैं, दूसरी तरफ शेयर बाजार की गिरावट व पस्तहिम्मती ने सरकार के प्रमुख कर्णधार व संकटमोचक वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को हिलाकर रख दिया है। दिक्कत यह भी है कि हमारे शेयर बाजार की गिरावट की मुख्य वजह चूंकि वैश्विक हालात हैं, इसलिए वित्त मंत्री ढाढस बंधाने के अलावा कुछ कर भी नहीं सकते। शुक्रवार को वि‍त्‍त मंत्री प्रणवऔरऔर भी