मुद्रास्फीति 9.78% अगस्त में, निपटेगी सरकार

खाद्य वस्तुओं के साथ मैन्यूफैक्चर्ड चीजों की महंगाई से थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर अगस्त में 9.78 फीसदी हो गई है। वित्त मंत्री का कहना है कि सरकार और रिजर्व बैंक मिलकर बढ़ती मुद्रास्फीति से निपट लेंगे। वित्त मंत्री की राय में देश में ऊंची मुद्रास्फीति का मुख्य कारण वैश्विक बाजार का दबाव है।

मुखर्जी ने राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “मुद्रास्फीति दहाई अंक के करीब है। स्थिति पर सरकार की तरह रिजर्व बैंक भी नजर रखे हुए है और इस समस्या से मिलकर निपटना संभव होगा।” असल में सरकार इस बात से चिंतित है कि जुलाई में जो मुद्रास्फीति 9.22 फीसदी थी, वह अगस्त में 9.6 फीसदी के अपेक्षा के बजाय 9.78 फीसदी हो गई है। जुलाई, 2010 के बाद यह महंगाई की दर का सबसे ऊंचा आंकडा है। उस समय मुद्रास्फ़ीति 9.98 फीसदी पर थी।

बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त माह में मुद्रास्फीति की दर 9.78 फीसदी है, जो पिछले 13 माह का उच्च स्तर है। इससे रिजर्व बैंक की चिंता और बढ़ गई है। लेकिन इससे यह भी संकेत मिलता है कि मार्च 2010 के बाद से 11 बार ब्याज दरें बढ़ाने से महंगाई पर अंकुश नहीं लग सका है। वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने कहा, ‘‘इसका कोई एक समाधान नहीं है। रिजर्व बैंक को महंगाई पर नियंत्रण के साथ घटती आर्थिक विकास दर के साथ भी संतुलन बैठाना होगा।’’

जून माह की मुद्रास्फ़ीति को संशोधित कर 9.51 फीसदी कर दिया गया है। इसका शुरुआती अनुमान 9.44 फीसदी का था। सालाना आधार पर अगस्त में खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतें 9.62 फ़ीसदी उंची रहीं। इस दौरान प्याज के दाम एक साल पहले की तुलना में 45.29 फ़ीसदी, फ़ल 22.82 फ़ीसदी और आलू के दाम 11.80 फ़ीसदी ऊंचे थे।

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