बायोकॉन लिमिटेड दवा व्यवसाय से ज्यादा अपनी चेयरमैन व प्रबंध निदेशक किरण मजुमदार शॉ के नाम से जानी जाती है। बीते शुक्रवार, 21 जनवरी को उन्होंने बैंगलोर में कंपनी के दिसंबर 2010 तिमाही के नतीजे पेश करते हुए कहा था, “बायोकॉन ने अब तक का सबसे ज्यादा कर-बाद लाभ घोषित किया है और यह 100 करोड़ के पार चला गया है। कंपनी का परिचालन लाभ मार्जिन भी इस तिमाही में 24 फीसदी बढ़ गया है। यह हमारेऔरऔर भी

ऑयल इंडिया सरकार की नवरत्न कंपनी है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के धंधे में है। सितंबर 2009 में इसका आईपीओ 1050 रुपए प्रति शेयर मूल्य पर आया था। शुक्रवार को यह बीएसई (कोड – 533106) में 3.18 फीसदी की गिरावट के साथ 1328.70 रुपए और एनएसई (कोड – OIL) में 2.32 फीसदी गिरकर 1336.30 रुपए पर बंद हुआ है। हो सकता है आज भी गिरावट आए। लेकिन कंपनी के कामकाज और भावी योजनाओं को देखें तोऔरऔर भी

हमारे देश के अधिकांश लोगों की तरह ही हैं दयाकृष्ण जोशी। किस्मत में भरोसा करते हैं। कहते हैं – अरे यार, भविष्य की क्या चिंता करना? जो होगा देखा जाएगा। एक आईटी कंपनी में कार्यरत जोशी का सोचना सही भी है। भारी वेतन। सुखी परिवार। स्नेहिल बीवी, दो प्यारे-प्यारे बच्चे – 8 साल की लडक़ी व 6 साल का लडक़ा। बच्चों के भविष्य हेतु: लेकिन पिछले साल एक हादसे में अपने 30 साल के एक रिश्तेदार कीऔरऔर भी

सिटी बैंक में 300 करोड़ रुपए की अनुमानित धोखाधड़ी का मुख्य अभियुक्त शिवराज पुरी लोगों व कंपनियों से जुटाई गई ज्यादातर रकम शेयर बाजार के डेरिवेटिव सौदों में लगाता था। गुड़गांव पहुंची सेबी की दो सदस्यीय टीम ने पुरी के निवेश के पैटर्न को जांचने के बाद यह पता लगाया है। इस बीच सोमवार को इस मामले में पुलिस ने हीरो समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी संजय गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। हीरो समूह की इकाई हीरोऔरऔर भी

साल 2010 में 5700 से 6160 तक। यह रहा है साल के शुरू से लेकर अंत का निफ्टी का सफर। निफ्टी एक मुकाम हासिल कर चुका है। अब स्टॉक्स भी जनवरी 2011 में ऐसा करेंगे। आप स्क्रीन देखते हैं, बिलखते हैं और अपना हौसला खो बैठते हैं। लेकिन हम कर भी क्या सकते हैं। यह भारतीय बाजार के सिस्टम की नाकामी है। दिसंबर के सेटलमेंट में जिन स्टॉक्स के भावों में गिरावट आई, वे कभी सुधर करऔरऔर भी

हमने इसी कॉलम में 6 अगस्त की सुबह बाजार खुलने से पहले जब बिलकेयर लिमिटेड (बीएसई कोड – 526853) के बारे में लिखा था, तब पिछली शाम 5 अगस्त, गुरुवार को उसका बंद भाव 474.30 रुपए था। तब तक उसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 600 रुपए था और एचडीएफसी सिक्यूरिटीज की रिसर्च रिपोर्ट के हवाले हमने बताया था कि यह शेयर एक साल के भीतर 615 रुपए तक जा सकता है। लेकिन इसमें तो कमाल होऔरऔर भी

दोपहर तक बीएसई सेंसेक्स 20,000 के नीचे और एनएसई निफ्टी 6000 के नीचे चला गया था। लेकिन यह कोई चिंता की बात नहीं, क्योंकि बाजार दो कदम आगे बढ़ने से पहले एक कदम पीछे चलकर अपने पैर जमाता है। चिंता की बात यह है कि हजारों कंपनियों के बीच हम निवेश के लिए किन-किन को चुनें। इसमें भी कंपनियों को चुनना तो बाद में होता रहेगा। उससे पहले यह जानने की जरूरत है कि कौन से सेक्टरऔरऔर भी

अगर साल 2003 से पूंजी बाजार में उतरी सार्वजनिक क्षेत्र की 28 कंपनियों के आईपीओ (प्रारंभिक सार्वजनिक ऑफर) के इतिहास को आधार मानें तो कोल इंडिया और सेल के आगामी पब्लिक इश्यू बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इन 28 कंपनियों में से 94 फीसदी के आईपीओ इश्यू मूल्य से कम से कम 10 फीसदी बढ़त के साथ बाजार में सूचीबद्ध हुए हैं। प्रमुख ब्रोकरेज व निवेश बैंकिंग फर्म एनाम सिक्यूरिटीज ने तमाम आंकड़े जुटाकर यह हकीकत उजागरऔरऔर भी

सार्वजनिक अस्पतालों को चलाने के लिए सरकार को सब्सिडी देनी पड़ती है, जबकि निजी अस्पताल महंगे होने के बावजूद लोगों से पटे रहते हैं और करोड़ों का मुनाफा कमाते हैं। यह मानसिकता और पद्धति का सवाल है। ब्रिटेन में सब्सिडी चलती है तो हेल्थकेयर सिस्टम पिटा पड़ा है। जर्मन में स्वास्थ्य बीमा चलता है तो हेल्थकेयर सिस्टम चकाचक है। भारत में सब घालमेल है। लेकिन ‘जान है तो जहान है’ और परिजनों के लिए कुछ भी करनेवालेऔरऔर भी

बेस्ट एंड क्रॉम्प्टन इंजीनिरिंग में जोखिम बहुत है तो रिटर्न भी बहुत मिल सकता है। कल इसका शेयर बीएसई (कोड – 500046) में 2.36 फीसदी बढ़कर 17.35 रुपए और एनएसई (कोड – BECREL) में 2.94 फीसदी बढ़कर 17.50 रुपए पर बंद हुआ है। कंपनी मुश्किलों से उबरने के दौर में है और अंदाजा है कि इसका स्टॉक दस-बारह महीनों में 45 रुपए तक जा सकता है। यानी 150 फीसदी से ज्यादा रिटर्न के साथ शेयर अब केऔरऔर भी