पुरी डेरिवेटिव में लगाता था ज्यादा रकम, हीरो का अधिकारी गिरफ्तार

सिटी बैंक में 300 करोड़ रुपए की अनुमानित धोखाधड़ी का मुख्य अभियुक्त शिवराज पुरी लोगों व कंपनियों से जुटाई गई ज्यादातर रकम शेयर बाजार के डेरिवेटिव सौदों में लगाता था। गुड़गांव पहुंची सेबी की दो सदस्यीय टीम ने पुरी के निवेश के पैटर्न को जांचने के बाद यह पता लगाया है। इस बीच सोमवार को इस मामले में पुलिस ने हीरो समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी संजय गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया।

हीरो समूह की इकाई हीरो कारपोरेट सर्विसेज के एसोसिएट उपाध्यक्ष (एकाउंट्स) संजय गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी के तहत गिरफ्तार किया गया है। 120 बी का संबंध आपराधिक साजिश से है। गुप्ता को बाद में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट व अतिरिक्त सिविल जज डी एन भारद्वाज के समक्ष पेश किया गया। सूत्रों के मुताबिक गुप्ता ने ही सिटी बैंक के जालसाज रिलेशनशिप मैनेजर शिवराज पुरी को हीरो समूह के दूसरे लोगों से मिलवाया था और इसके एवज में उसने पुरी से 20 करोड़ रुपए का कमीशन लिया था।

बता दें कि पिछले हफ्ते पुलिस ने सिटी बैंक के गुड़गांव शाखा में धोखाधड़ी मामले में पूछताछ के लिए शिवराज पुरी के साथ गुप्ता को बुलाया था। करीब 300 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का यह मामला गलत तरीके से निवेश उत्पादों को बड़ी हैसियत वाले ग्राहकों को बेचे जाने से जुड़ा है। पुरी लोगों को 18 से 36 फीसदी सालाना रिटर्न का झांसा देता था। इसके लिए उसने सिटी बैंक के लेटरहेड का इस्तेमाल किया था। बृजमोहन लाल मुंजाल के नेतृत्व वाला हीरो समूह स्वीकार कर चुका है कि इस धोखाधड़ी के मामले में उसके 28. 75 करोड़ रुपए फंसे हैं।

अब तक की जांच और पुरी से पूछताछ से पता चला है कि वह कंपनियों और एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल्स) से जुटाई गई रकम का ज्यादातर हिस्सा शेयर बाजार के डेरिवेटिव प्रपत्रों में लगाता था। सूत्रों के मुताबिक उसने कैश सेगमेंट में बहुत कम निवेश किया है और ज्यादातर रकम निफ्टी या स्टॉक ऑप्शंस में लगाई है। ऑप्शंस में केवल मार्जिन मनी देनी होती है। निफ्टी एक सूचकांक है, इसलिए उसमें तो डिलीवरी का सवाल ही नहीं उठता। लेकिन स्टॉक ऑप्शन में अभी तक डिलीवरी की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि सेबी के फैसले के बावजूद स्टॉक एक्सचेंजों ने डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेट की व्यवस्था लागू नहीं की है।

यह भी पता चला है कि पुरी लोगों व कंपनियों को झांसा देकर जुटाई गई मुख्य रूप से दो ब्रोकरेज फर्मों – रेलिगेयर सिक्यूरिटीज और बोनांजा फाइनेंशियल के माध्यम से लगाता था। मुंबई के जांच विभाग के दो लोग गुड़गांव में डटे हुए हैं। अभी तक इन लोगों ने इस बारे में काफी कुछ इकट्ठा कर लिया है।

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