देश का भुगतान संतुलन विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ने से तभी दुरुस्त होगा, जब शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) बढ़ेगा। स्थिति यह है कि मार्च 2026 में खत्म वित्त वर्ष 2025-26 में देश में आया शुद्ध एफडीआई मात्र 7.65 अरब डॉलर रहा है, जबकि इसी दौरान एफपीआई ने भारत से (इक्विटी व बॉन्ड मिलाकर) कुल 16.59 अरब डॉलर निकाले हैं। इसके बाद चालू वित्त वर्ष 2025-26 के ढाई महीनों में ही वे कल तक 12.35 अरब डॉलर और निकाल चुके हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेशकों के खंडित भरोसे का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसी के चलते अमेरिकी डॉलर आज 95 रुपए के आसपास डोल रहा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2014 में सरकार बनाने के बाद 40 रुपए पर लाने का वादा किया था। लेकिन आज उनमें कोई लाज-शर्म नहीं बची कि वे सरकार की 12 साल की उपलब्धियों को गिनाते वक्त ऐसी अनेक विफलताओं की सफाई पेश कर सकें। सरकार की गलत नीतियों के चलते देश का चालू खाते का घाटा 25.2 अरब डॉलर हो चुका है, जो पिछले साल 2024-25 में 22.9 अरब डॉलर था। इसी दौरान पूंजी खाते का सरप्लस 16.6 अरब डॉलर से 99.57% सूखकर 7.2 करोड़ डॉलर रह गया। कारण बड़ा साफ है कि विदेश निवेशक किसी भी सूरत में पलटकर भारत आने को तैयार नहीं है। अब बुधवार की बुद्धि…
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