वित्त मंत्रालय की तरफ से मिल रहे संकेत कतई अच्छे नहीं है। उसका साफ कहना है कि वह रुपए की गिरावट को रोकने के लिए हस्तक्षेप नहीं कर सकता। मतलब यह कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का नुकसान जारी रहेगा और बाजार से भागने की फिराक में लगे रहेंगे। इसलिए बाजार में फिलहाल स्थायित्व आने की गुंजाइश नहीं दिखती है। इस बीच हमारे वाणिज्य सचिव स्वीकार कर चुके है कि निर्यात के आंकड़ों में 9 अरब डॉलरऔरऔर भी

बाजार में जबरदस्त चर्चा है कि मंदड़ियों ने कई दिग्गज स्टॉक्स को धूल चटाने की ठान ली है। उनके नए लक्ष्य जानकर आपका माथा चकरा जाएगा। वे इनफोसिस को 699 रुपए, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) को 599 रुपए और एसबीआई को 899 रुपए पर पहुंचाने की ठान चुके हैं। जबकि इनफोसिस अभी 1755 रुपए, आरआईएल 745 रुपए और एसबीआई 1790 रुपए के आसपास चल रहा है। इससे आप मंदड़ियों का मंसूबा भांप सकते हैं। इसे भांपकर बहुत सेऔरऔर भी

बाजार इस समय जिस तरह हर दिन धड़ाम-धड़ाम गिर रहा है, उसमें हमारे-आप जैसे निवेशकों के लिए सबसे बेहतर यह होगा कि बिजनेस चैनलों को देखना बंद कर दें, अगले साल-डेढ़ साल के खर्चों के इंतजाम के लिए पर्याप्त धन बैंक एकाउंट में रख दें और इसके बाद वह अतिरिक्त धन अलग कर लें जिसे हम कई सालों के लिए निवेश कर सकते हैं बगैर इस बात की चिंता किए कि रोज़-ब-रोज़ उसमें कितनी घट-बढ़ हो रहीऔरऔर भी

बाजार में शुरुआती भाव बढ़त की उम्मीद का रहा क्योंकि पिछले दो सत्रों में भारी गिरावट हो चुकी थी। सूचकांक बढ़कर खुले। लेकिन फिर शॉर्ट सौदों की मार शुरू हो गई। बहुत सारे धुर जुआरियों में ट्रेडिंग के दम पर रातोंरात लाखों कमाने की चाहत अब भी जोर मार रही है। इनमें से कुछ लोग बाजार में सुधार आने की उम्मीद में ट्रेड कर रहे हैं तो बहुत से लोग गिरावट पर ही खेलना चाहते हैं। और,औरऔर भी

कॉस्मो फिल्म्स कोई मरी-गिरी कंपनी नहीं है। 1981 में उसने देश में पहली बार बीओपीपी (बाय-एक्सिली ओरिएंटेड पॉलि प्रोलिपीन) फिल्म बनाने की शुरुआत की। इन फिल्मों का व्यापक इस्तेमाल पैकेजिंग व लैमिनेशन के काम में होता है। कंपनी थर्मल लैमिनेशन फिल्म भी बनाती है। उसकी दो उत्पादन इकाइयां औरंगाबाद (महाराष्ट्र) और कर्जण (गुजरात) में हैं। यूं तो कंपनी देश में भी माल बेचती है। लेकिन उसका मुख्य जोर निर्यात पर है क्योंकि अमेरिका व यूरोप से उसेऔरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था ने कमजोरी दिखाई है। जीडीपी की विकास दर सुस्त पड़ी है। कॉरपोरेट क्षेत्र के लाभार्जन के अनुमान घटा दिए गए हैं। दुनिया से नकारात्मक खबरें आ रही हैं। और, बाजार में फौरन सुधार की कोई आशा नहीं है। इन सारी बातों के मद्देनज़र अगर मंदड़िए हर बढ़त पर बेच रहे हैं तो उनका ऐसा करना जायज है। मंदड़ियों की यह ताजातरीन उम्मीद भी गलत नहीं कही जा सकती है कि निफ्टी 2700 तक जा सकताऔरऔर भी

बाजार में कोई दिशा नहीं नज़र आती। तेजड़िए और मंदड़िए अपने-अपने तीर-कमान और तर्क लेकर भिड़े हुए हैं। मंदड़ियों के पास शॉर्ट सौदे करने की तमाम वजहें हैं। जैसे, अर्थव्यवस्था का कामकाज ठीक नहीं है, जीडीपी घट रहा है, राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है, कंपनियों का लाभार्जन दबाव में है और बराबर डाउनग्रेड हो रहे हैं। इन सबसे ऊपर उनकी पक्की राय है कि निफ्टी 4000 तक गिर सकता है और अगले छह महीनों में बाजार मेंऔरऔर भी

शेयरों के भाव किस हद तक ग्लोबल और किस हद तक लोकल कारकों से प्रभावित होते है, इसका तो ठीकठाक कोई पैमाना नहीं है, लेकिन इतना तय है कि आज के जमाने में कंपनियों के धंधे पर दोनों कारकों का भरपूर असर पड़ता है। इसीलिए शायद अंग्रेजी के इन दोनों शब्दों को मिलाकर नया शब्द ‘ग्लोकल’ चला दिया गया है। ये ग्लोकल असर कैसे कंपनी को कस लेते हैं, इसका एक उदाहरण है भारत की सबसे बड़ीऔरऔर भी

बाजार के पहले आधे घंटे में आया उछाल दमदार नहीं दिखा। बल्कि, लगता है कि यह मंदड़ियों को 5110 पर स्टॉप लॉस का डर दिखाने की कसरत थी। फिर बाजार ने शुरुआती बढ़त छोड़ दी और 5096.55 तक पहुंचने के बाद गिरने लगा। मंदड़ियों ने 5040 के लक्ष्य के साथ 5090 पर फिर से शॉर्ट सौदे करने शुरू कर दिए। दोपहर दो बजे के आसपास बाजार ने फिर पेंग भरी और निफ्टी 5099.25 तक पहुंच गया। लेकिनऔरऔर भी

शेयर बाजार ही वह ठौर है जहां पहुंचाकर अपनी बचत को हम मुद्रास्फीति के क्षयकारी असर से बचा सकते हैं। चूंकि भारत सरकार की तरफ से सरकारी दामादों को छोड़कर किसी भी भारतीय को सामाजिक सुरक्षा नहीं मिली है, इसलिए हारी-बीमारी से लेकर बच्चो की पढ़ाई-लिखाई, शादी-ब्याज व अपने रिटायरमेंट तक के लिए हमें खुद ही बचाना पड़ता है। लेकिन सरकार शायद लंबे समय तक सामाजिक सुरक्षा दे भी नहीं सकती। यूरोप में तो थी व्यक्ति कोऔरऔर भी